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देवा मूवी रिव्यू: सनकी के जबरदस्त एक्शन और अभिनय का धमाल


देवा में शाहिद कपूर (सोर्स: पोस्टर/रॉय कपूर फिल्म्स/ज़ी स्टूडियोज)
परिचय
31 जनवरी को रिलीज़ हुई देवा (2025 फिल्म) एक एक्शन, थ्रिलर है| जिसका निर्देशन रोशन एंड्रूज़ ने किया है| इस फिल्म का टोन एक्शन थ्रिलर और थीम सस्पेंस पर आधारित है| जिसमें सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन दिखाया गया है| एक्शन फिल्मों को देखने वाले विशेषकर युवाओं को यह फिल्म पसंद आ सकती है| फिल्म का ट्रेलर जितना वादा करता है, फिल्म उसी तरह से पर्दे पर दिखाई देती है|
देवा 2025 में अभिनेता कौन है?
शाहिद कपूर, प्रवेश राणा, पवेल गुलाटी, पूजा हेगड़े, गिरीश कुलकर्णी, मनीष वधवा और उपेंद्र लिमाये
क्या देवा मूवी रीमेक है ?
हाँ, देवा फिल्म साल 2013 में रिलीज हुई मलयालम फिल्म मुंबई पुलिस की रीमेक है, जिसके निर्देशक भी रोशन एंड्रयूज है|
प्लॉट/स्टोरी
यह फिल्म एक ऐसे पुलिस इंस्पेक्टर की कहानी पर आधारित है, जिसमें उसकी दोस्ती, प्यार और जज्बात को दिखाया गया है फिल्म सस्पेंस से भरपूर है एक गैंगस्टर को मारने के बाद एक ऐसी अप्रिय घटना घटित होती है जिससे पूरी फिल्म ही सस्पेंस से भर जाती है, वह ऐसा क्या सस्पेंस है? क्या उस घटना से उसकी जिंदगी प्रभावित होती है? क्या उससे उसकी दोस्ती, प्यार और रिश्ता प्रभावित होता है? यह सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी|
एक्टिंग एंड कैरक्टर्स
देव की भूमिका में शाहिद कपूर का अभिनय बहुत ही शानदार है उन्होंने एक सनकी किस्म और गुस्से वाले व्यक्ति की भूमिका में जान डाल दी है ��ह बहुत ही मंजे हुए कलाकार हैं उनका अभिनय उत्तम दर्जे का है उनके द्वारा किए गए एक्शन तो कमाल के हैं उनका एटीट्यूड, बॉडी लैंग्वेज और फेशिअल एक्सप्रेशंस बहुत ही प्रभावित करते हैं वह फिल्म इंडस्ट्री के कुछ चुनिंदा अच्छे कलाकारों में गिने जाते हैं, वह पूरी फिल्म में छाए हुए हैं और फिल्म उनके कंधों पर चलती है इस भूमिका के लिए उनको काफी सारे अवॉर्ड्स नॉमिनेशंस मिल सकते हैं फरहान की भूमिका में प्रवेश राणा का अभिनय भी कमाल का है उन्होंने भी अपनी भूमिका को पूरा हंड्रेड परसेंट देने की कोशिश की है रोहन की भूमिका में पवेल गुलाटी का अभिनय भी बढ़िया है उन्होंने भी अपने रोल को अच्छे से निभाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी| दिया की भूमिका में पूजा हेगड़े का अभिनय भी ठीक-ठाक रहा उनके लिए कुछ खास करने को नहीं था बहुत छोटी सी भूमिका थी| विशेष भूमिकाओं में उपेंद्र लिमाये और मनीष वाधवा का अभिनय भी ठीक-ठाक रहा|

देवा में शाहिद कपूर (सोर्स: पोस्टर/रॉय कपूर फिल्म्स/ज़ी स्टूडियोज)
डायरेक्शन
इस फिल्म को रोशन एंड्रयूज ने निर्देशित किया है यह उनकी पहली हिंदी फिल्म है इससे पहले उन्होंने एक तमिल और मलयाली फिल्में निर्देशित की है उनकी पहली मलयाली फिल्म उदयानणु थरम (2005) में रिलीज हुई थी इसका निर्देशन भी उन्होंने बहुत ही शानदार तरीके से किया है पर फिल्म की कहानी में कोई खास दम नहीं है, वह काफी हद तक फिल्म को संभाल पाए| निर्देशक फिल्म के सस्पेंस को अंत तक बरकरार रखने में कामयाब रहा, कुछ दृश्य को उन्होंने बहुत बढ़िया से फिल्माया है
कहानी-पटकथा
फिल्म की कहानी पटकथा बॉबी संजय, अब्बास दलाल, हुसैन दलाल, अरशद सैयद और सुमित अरोड़ा ने लि��ी है| बॉबी संजय मलयाली फिल्मों में लिखते हैं यह उनकी ही लिखी हुई फिल्म मुंबई पुलिस (2013) की रीमेक कहीं जा सकती है| और वह फिल्म के निर्देशक रोशन एंड्रयूज के साथ साल 2005 से जुड़े हुए हैं इसकी कहानी में कुछ खास दम नहीं है और पटकथा भी कमज़ोर लिखी गई है
डायलॉग
अब्बास दलाल और हुसैन दलाल ने डायलॉग बढ़िया लिखे हैं फिल्म की थीम और टोन के मुताबिक हैं|
एक्शन
फिल्म में सुप्रीम सुंदर, अब्बास अली मुगल, अनल अरासु और परवेज़ शेख का एक्शन बहुत ही जबरदस्त है,और खतरनाक स्टंट्स इस्तेमाल किये गए है, एक्शन को फिल्म की USP भी कही जा सकती है|
एडिटिंग
ए श्रीकर प्रसाद की एडिटिंग थोड़ी सी ढीली है,10-15 मिनट की फिल्म काटी जा सकती थी शुरू की 30 से 35 मिनट की फिल्म थोड़ी सी धीमी गति से चलती है| फर्स्ट हाफ लम्बा है और फिल्म इंटरवल के बाद ही शुरू होती है|
सिनेमैटोग्राफी
अमित राय की सिनेमैटोग्राफी लाजवाब कहीं जा सकती है मुंबई की खूबसूरत लोकेशंस को बहुत अच्छे से दिखाया गया है एरियल व्यूज दृश्य को अच्छे से देखा फिल्माया गया है|
बैकग्राउंड स्कोर
जैक्स बेजॉय का बैकग्राउंड स्कोर बहुत ही शानदार बन पड़ा है, पूरी तरह से हर दृश्य के साथ परफेक्ट sync करता है|

देवा में शाहिद कपूर (सोर्स: स्क्रीनशॉट /रॉय कपूर फिल्म्स/ज़ी स्टूडियोज)
कोरियोग्राफी
बोस्को मार्टिस के कोरियोग्राफी शुरू के एक शादी के गीत भसड़ मचा की बहुत बढ़िया है|
म्यूजिक और लिरिक्स
फिल्म में ना तो संगीत का और ना ही गीत का कुछ खास स्कोप था|
साउंड डिजाइन
सुभाष साहू का साउंड डिज़ाइन भी अच्छा है|
प्रोडक्शन डिजाइन
संदीप शरद रावड़े का प्रोडक्शन डिज़ाइन भी ठीक-ठाक है|
कॉस्ट्यूम डिजाइन
निहारिका जोली, मालविका काशीकर, गुलनाज खान, चांदनी मेहता की ��ॉस्ट्यूम डिजाइन के लिए ज्यादा स्कोप नहीं था|
क्लाइमेक्स
बहुत ही शानदार बन पड़ा है
ओपिनियन
देवा फिल्म, शाहिद कपूर के सनकी अभिनय, एक्शन और सस्पेंस के लिए देखी जा सकती है|
रेटिंग
6/10
लोकप्रिय डायलॉग
मुंबई तेरे बाप की नहीं है मुंबई पुलिस वालों की है|
देवा मूवी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
देवा फिल्म ने पहले दिन 5.78 करोड़ कमाए है|
देवा मूवी बजट
देवा फिल्म का बजट 80 करोड़ है|
Flaws
- एक इंटिमेट दृश्य को डालने का मोटिव समझ में नहीं आता वह डालने की क्या जरूरत थी| - शाहिद कपूर का जासूस बनना समझ से परे है| - कुछ एक्शन दृश्यों को जबरदस्ती ठूँसा गया है| - कुछ दृश्यों का कहानी से कोई जुड़ाव नहीं है| - फिल्म के मुख्य चरित्र के द्वारा धूम्रपान का इस्तेमाल धड़ल्ले से पर्दे पर दिखाया गया है| - यह फिल्म सेकुलरिज्म का परफेक्ट एग्जांपल कहीं जा सकती है जैसे मुख्य पात्र हिन्दू, जीजा मुस्लिम और दोस्त ईसाई दिखाया गया है|
CBFC
- सीबीएफसी के सुझावों के बाद, फिल्म निर्माता रोशन एंड्रूज को कथित तौर पर लिप-लॉक परिदृश्य में बदलाव करने का आदेश दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप चुंबन के 6 सेकंड काट दिए गए। - अन्य परिवर्तनों में "अभद्र इशारे" और कुछ अश्लील शब्दों को संवाद और उपशीर्षक दोनों में कोमल समकक्षों के साथ बदलना शामिल था। - सीबीएफसी ने मुंबई के फोर्ट जिले में एक ऐतिहासिक स्थल हुतात्मा चौक के संदर्भ में फिल्म निर्माताओं से स्पष्टीकरण भी मांगा। CBFC-U/A Movietime-2h36m Genre-Action Thriller Backdrop-Mumbai Release-31 January 2025 प्रोडूसर: सिद्धार्थ रॉय कपूर, उमेश कुमार बंसल, डायरेक्टर: रोशन एंड्रयूज, साउंड डिज़ाइन: सुभाष साहू, कास्टूम डिज़ाइन: निहारिका जोली, मालविका काशीकर, गुलनाज खान, चांदनी मेहता, म्यूजिक: विशाल मिश्रा, लिरिक्स: राजशेखर, बैकग्राउंड स्कोर: जैक्स बेजॉय, प्रोडक्शन डिज़ाइन: संदीप शरद रावड़े एडिटर: ए श्रीकर प्रसाद, सिनेमेटोग्राफी: अमित राय, कोरियोग्राफी: बॉस्को मार्टिस, डायलॉग्स: अब्बास दलाल, हुसैन दलाल, स्टोरी-स्क्रीनप्ले: हुसैन दलाल, अब्बास दलाल, सुमित अरोड़ा, अरशद सैयद, बॉबी-संजय, एक्शन: सुप्रीम सुंदर, अब्बास अली मुगल, अनल अरासु, परवेज़ शेख, कास्टिंग डायरेक्टर: मुकेश छाबड़िया Read the full article
#उपेंद्रलिमाये#एक्शन#गिरीशकुलकर्णी#थ्रिलर#देवा#देवाफिल्म#देवामूवी#पवेलगुलाटी#पूजाहेगड़े#प्रवेशराणा#रोशनएंड्रूज़#शाहिदकपूर#सिद्धार्थरॉयकपूर
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Shahrukh Khan Mannat: Shahrukh Khan के मन्नत के बाहर मची अफरातफरी, मौके पर पुलिस ने लिया ये एक्शन!
Shahrukh Khan Mannat : मुंबई। Shahrukh Khan Mannat बॉलीवुड के किंग खाई की फैन फॉलोविंग काफी अच्छी खासी है। लोग उन्हें देखने के लिए काफी इंतजार करते है। उनके मन्नत हाउस के बाहर आए दिन लोगों का भीड़ मिलती है। लोग उनके एक झलक देखने के लिए काफी बेताब रहते है। इसी कड़ी में ईद के मौके पर भी लोग शाहरुख खान के दादार के लिए मन्नत के बाहर पहुंचे हुए थे। #WATCH | Mumbai: Actor Shah Rukh Khan along with…

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सिकंदर ट्रेलर धमाका: सलमान खान के एक्शन ने मचाया तूफान, फैंस बोले – ये तो रिकॉर्ड तोड़ेगी!
सिकंदर ट्रेलर रिएक्शन: सलमान खान के एक्शन सीक्वेंस ने मचाया तहलका, ब्लॉकबस्टर की ओर पहला कदम? सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सिकंदर’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ, जिसने सिनेमाप्रेमियों और फैंस के बीच जबरदस्त हलचल मचा दी है। जैसे ही ट्रेलर लॉन्च हुआ, सोशल मीडिया पर इसका क्रेज छा गया। फैंस इसे “ब्लॉकबस्टर इन द मेकिंग” बता रहे हैं और सलमान खान के जबरदस्त एक्शन सीक्वेंस की तारीफ कर रहे हैं। इस…
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भारत की जीत के बाद महू में भड़की हिंसा: मस्जिद के पास दो गुटों में पथराव, कई घायल
चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भारत की जीत के बाद इंदौर के महू इलाके में हिंसा भड़क गई। जश्न के दौरान जामा मस्जिद के पास दो गुटों में झड़प हुई, जिससे कई लोग घायल हो गए। जानिए पूरी खबर।
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Young India Climate Community: जलवायु नेतृत्व में बागपत के अमन कुमार की राष्ट्रीय पहचान
यंग इंडिया क्लाइमेट कम्युनिटी में चयन, राष्ट्रीय नीति निर्माण में निभाएंगे भूमिका बागपत, 25 फरवरी 2025: जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को साकार करने में युवा नेतृत्व को सशक्त बनाने के उद्देश्य से यूनिसेफ युवा और ब्रिंग बैक ग्रीन फाउंडेशन द्वारा यंग इंडिया क्लाइमेट कम्युनिटी का गठन किया गया है। इस राष्ट्रीय स्तर की पहल के तहत बागपत जिले के ट्यौढी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता…
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जयपुर में जेडीए द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार सख्त एक्शन जारी, 700 से ज्यादा अवैध निर्माणों पर कार्रवाई
मूकनायक मीडिया ब्यूरो | 26 जून 2024 | जयपुर – दिल्ली – बाँसवाड़ा : राजस्थान की राजधानी जयपुर में जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार सख्त एक्शन लिए जा रहे हैं। ऐसे में आज 26 जून 2024 बुधवार को जेडीए द्वारा न्यू सांगानेर रोड पर बड़े स्तर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जयपुर में जेडीए द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार सख्त एक्शन जारी जेडीए ने इस कार्रवाई से…

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#700 से ज्यादा अवैध निर्माणों पर कार्रवाई#जयपुर में जेडीए द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार सख्त एक्शन जारी
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सिद्धार्थ मल्होत्रा की 'योद्धा' को वीकेंड का मिला फायदा
सिद्धार्थ मल्होत्रा, दिशा पटानी और राशि खन्ना अभिनीत एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘योद्धा’ को वीकेंड का जबरदस्त फायदा मिला है। फिल्म ने पहले दिन भारत में 4.25 करोड़ रुपये, दूसरे दिन 5.75 करोड़ रुपये और तीसरे दिन 7 करोड़ रुपये की कमाई की। इस तरह, फिल्म ने अपने पहले वीकेंड में 17 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। फिल्म की कमाई में शुक्रवार से शनिवार और शनिवार से रविवार को अच्छी वृद्धि देखने को मिली। यह दर्शाता…

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देव पटेल ने 'मंकी मैन' के मनोरंजक ट्रेलर में अपने आंतरिक एक्शन स्टार को दिखाया
देव पटेल ने ‘��ंकी मैन’ के मनोरंजक ट्रेलर में अपने आंतरिक एक्शन स्टार को दिखाया देव पटेल ‘मंकी मैन’ में एक नए एक्शन नायक की भूमिका निभाते हैं, जो उनके निर्देशन की पहली फिल्म है, जिसमें रोमांचक लड़ाई के दृश्य और मुंबई में भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ न्याय की खोज का वादा किया गया है। देव पटेल ‘मंकी मैन’ में एक नए एक्शन नायक की भूमिका निभाते हैं, जो उनके निर्देशन की पहली फिल्म है, इस रोमांचक फिल्म में एक…

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सिविक एक्शन प्रोग्राम तथा "चिकित्सा आपके द्वार" कार्यक्रम का आयोजन
सिविक एक्शन प्रोग्राम तथा "चिकित्सा आपके द्वार" कार्यक्रम का आयोजन #Chhattisgarh #CivicActionProgram
गरियाबन्द (छ0ग0 ) से लगभग 60 किमी दूर अति दुर्गम, घने जंगल एवं पहाड़ से आच्छादित घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 65 बटालियन की नवीन एफ ओ बी ( FOB ) ओढ़ स्थित डी/65 में श्री विजय कुमार सिंह कमाण्डेन्ट 65 बटालियन के नेतृत्व में कल दिनांक – 26/04/2023 को सिविक एक्शन प्रोग्राम तथा “चिकित्सा आपके द्वार” कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस मौके पर श्री डेनियल एल, उप कमांडेंट, श्री अनुभव गौड, वरिष्ठ चिकित्सा…

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स्काई फोर्स मूवी रिव्यू(2025): देश पर बलिदान देने वालों के साहस और देशभक्ति के जज्बे की कहानी


स्काई फोर्स फिल्म में अक्षय कुमार (क्रेडिट: पोस्टर/जिओ स्टूडियोज, मैडॉक फिल्म्स )
परिचय:
24 जनवरी 2025 को रिलीज हुई स्काई फोर्स एक्शन ड्रामा पर आधारित है जिसका निर्देशन संदीप केवलानी और अभिषेक अनिल कपूर ने किया है इसका टोन पेट्रियोटिक एक्शन ड्रामा और थीम बलिदान पर है फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ यह संदेश भी देती है कि देश की सेवा और देश से बड़ा कुछ नहीं| देश है तो हम है, देश नहीं तो हम भी नहीं| ट्रेलर के जैसे ही फिल्म भी पर्दे पर उसी तरह अच्छी दिखाई देती है| यह फिल्म एक सच्ची घटना जो 1965 में भारत-पाकिस्तान एयर वॉर के समय सरगोधा एयरबेस पर भारत की पहली एयर स्ट्राइक पर आधारित है जिसमें विंग कमांडर कुमार ओम आहूजा, अज्जमादा बोपैया देवय्या एमवीसी, पाकिस्तानी स्क्वाड्रन लीडर अमजद हुसैन, एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह, एयर कमोडोर डेविड लॉरेंस और एयर वाइस मार्शल अमित नारंग, यह उस समय की हमारी एयरफोर्स के जवान थे| इन सब असली वीरों के फ़िल्मी नाटकीय रूपांतरण में अक्षय कुमार, वीर पहाड़िया, निमरत कौर, सो��ा अली खान और शरद केलकर ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई है| यह फिल्म दर्शकों को कुर्सी से बांधे रखने में कामयाब रही|
प्लॉट:
यह फिल्म विंग कमांडर और स्क्वाड्रन लीडर की असली कहानी पर आधारित है जो इन दोनों की दोस्ती, प्यार और जज्बात को दर्शाती है| पाकिस्तान के सरगोधा एयरबेस पर भारत की पहली एयर स्ट्राइक करने के दौरान ऐसी घटना होती है कि जिससे स्क्वाड्रन लीडर गायब हो जाते है| वह कहां और कैसे गायब हो जाते है और क्या उनका कभी पता चल पाएगा? क्या विंग कमांडर उनको ढूंढ पाएंगे? क्या उनकी पत्नी को अपने पति के बारे में पता चल पायेगा? इन सभी सवालों को जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी|
एक्टिंग एंड कैरक्टर्स:
विंग कमांडर कुमार ओम आहूजा की भूमिका में अक्षय कुमार का अभिनय काबिले तारीफ है उन्होंने इस भूमिका को बहुत संजीदगी से निभाया| वह एक ऐसे कलाकार है जो अपनी भूमिका को दिलोदिमाग से निभाते हुए डूब जाते हैं उनकी संवाद अदायगी बहुत ही कमाल की है वह भारत के सबसे सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओं में गिने जाते है और वह अब तक अपने करियर में हर तरह की भूमिका निभा चुके है| इस फिल्म को देखते वक़्त उनकी पिछली दो फिल्में रुस्तम(2016) और एयरलिफ्ट(2016) की याद ताजा हो जाती है जहाँ रुस्तम(2016) के लिए तो इनको बेस्ट एक्टर का नेशनल अवार्ड भी मिला था| उसी पृष्ठभूमि पर यह फिल्म भी बनाई गई है जहाँ एयरलिफ्ट(2016) में इनके साथ पत्नी के रोल में निमरत कौर, इस फिल्म में भी उनकी पत्नी के रोल में है| स्क्वाड्रन लीडर की भूमिका में वीर पहाड़िया की यह पहली हिंदी फिल्म है और उनका अभिनय देखकर बिल्कुल भी ऐसा महसूस नहीं होता कि यह उनकी पहली फिल्म है वह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में लंबी रेस के घोड़े हो सकते हैं उनकी संवाद अदायगी, एटीट्यूड और बॉडी लैंग्वेज सब कमाल का है उन्होंने बिल्कुल अलग तरह से भूमिका को निभाया उनके अभिनय में ताजगी नजर आती है| प्रीति और गीता की भूमिका में निमरत कौर और सारा अली खान का अभिनय भी ठीक-ठाक कहा जा सकता है, उनके रोल की लंबाई तो ज्यादा नहीं थी और ज्यादा कुछ उनके लिए करने को भी नहीं था| अहमद हुसैन की भूमिका में शरद केलकर का अभिनय भी ठीक-ठाक रहा| सपोर्टिंग कास्ट में मनीष चौधरी, मोहित चौहान और वरुण बडोला का अभिनय भी ठीक-ठाक कह सकते है|
निर्देशन:
इस फिल्म को संदीप केवलानी और अभिषेक अनिल कपूर ने निर्देशित किया है यह दोनों की पहली First Debut Directorial है इस��े पहले अभिषेक अनिल कपूर निर्देशक अमर कौशिक की फिल्में जैसे स्त्री(2018) और बाला(2019) में एसोसिएट निदेशक रह चुके है और निर्देशक लक्ष्मण उत्तेकर की मिमी(2021) में असिस्टेंट निदेशक रह चुके हैं उन्होंने एक ऐसे सेंसिटिव और मुश्किल विषय पर फिल्म बनाकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है और साबित कर दिया कि अगर कहानी में दम हो तो अच्छी फिल्म बनाई जा सकती है एयर स्ट्राइक वाले दृश्यों को बहुत ही अच्छे से फिल्माया गया है टेक्नोलॉजी का खूब अच्छे से इस्तेमाल किया गया है उन्होंने फिल्म को बहुत अच्छे से निर्देशित किया है विश्वास ही नहीं होता कि यह उनकी पहली निर्देशित फिल्म है उन्होंने शुरू से लेकर अंत तक दर्शकों को बांधे रखा और कहीं से भी बोर महसूस होने नहीं दिया| हर डिपार्टमेंट में उनका पूरा कंट्रोल दिखाई देता है इमोशनल दृश्यों को भी निर्देशक ने पर्दे पर बहुत ही अच्छे से फिल्माया जो दिल को अंदर तक छू जाते है और दर्शक इमोशंस वाले दृश्यों को देखकर अपने आपको उन दृश्यों से जुड़ा हुआ पाता आता है|
कहानी-पटकथा-संवाद:
इसकी कहानी-पटकथा और संवाद आमिल कीयान खान, संदीप केवलानी, कार्ल ऑस्टिन और निरेन भट्ट ने लिखी है| कहानी सच्ची घटना पर आधारित है पटकथा बहुत ही मजबूत लिखी गई है फिल्म में हर दृश्य के बाद पता ही नहीं चलता कि आगे क्या होगा| संवाद भी बहुत अच्छे लिखे गए हैं पर इंग्लिश में भी संवाद होने के कारण उन दर्शकों के सिर से ऊपर से निकल जाएंगे जिनका इंग्लिश भाषा पर ज्ञान कम है| देशभक्ति से ओत प्रोत और अर्थपूर्ण संवाद लिखे गए है|
सिनेमैटोग्राफी:
इसकी सिनेमैटोग्राफी एस कृष्णन रविचंद्रन ने बहुत ही बढ़िया की है एयर स्ट्राइक के दृश्यों को बहुत ही बढ़िया से फिल्माया गया है एरियल व्यूज के दृश्य तो बहुत जबरदस्त बन पड़े हैं आकाश में जहाजों की लड़ाई के दृश्य तो बहुत खतरनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाले है| सिनेमैटोग्राफी सर्वोत्तम श्रेणी की कही जा सकती है|

स्काई फोर्स फिल्म में अक्षय कुमार और वीर पहाड़िया (क्रेडिट: पोस्टर/जिओ स्टूडियोज, मैडॉक फिल्म्स )
एडिटिंग:
ए श्रीकर प्रसाद की एडिटिंग कसी हुई है शुरू से लेकर अंत तक फिल्म कहीं से भी बोर नहीं करती| दृश्यों का ट्रांजिशन बहुत ही बढ़िया से किया गया है और गति भी तेज है
संगीत:
तनिष्क बागची का संगीत बहुत अच्छा बन पड़ा है चाहे देश भक्ति से ओत प्रोत माये गीत हो जिसे बी प्राक ने अपनी मधुर आवाज में बहुत ही दमदार तरीके से गाया है सतिंदर सरताज और जहरा एस खान की आवाज में रंग भी ठीक-ठाक है इमोशनल सॉन्ग विशाल मिश्रा की आवाज में क्या मेरी याद आती है दिल को छू लेने वाला गीत है| अरिजीत सिंह और अफसाना खान की आवाज में तू है तो मैं हूं एक रोमांटिक सॉन्ग है जो एक बार सुन सकते है|
लिरिक्स:
इरशाद कामिल के लिखे हुए गीतों जैसे क्या मेरी याद आती है और तू है तो मैं हूं अच्छे लिखे गए है मनोज मुन्तशिर ने माये गीत को बहुत अर्थपूर्ण लिखा है|
बैकग्राउंड स्कोर:
जस्टिन वर्गीज का बैकग्राउंड स्कोर बहुत ही धमाकेदार है फिल्म की टोन और थीम के साथ पूरी तरह से मेल खाता है|
कोरियोग्राफी:
विजय गांगुली की कोरियोग्राफी सिर्फ एक ही गीत रंग की अच्छी तरह से की गई है|
साउंड डिजाइन:
गणेश गंगाधरण का साउंड डिज़ाइन बहुत ही मजबूत है|
प्रोडक्शन डिजाइन:
मयूर शर्मा, सुजीत सुभाष सावंत और श्रीराम कन्नन अयंगर का प्रोडक्शन डिज़ाइन फिल्म में कुछ खास स्कोप नहीं रखता|
कॉस्ट्यूम डिजाइन:
शिवांक कपूर और नीना बोरा की कस्टम डिजाइनिंग 1965 के समय के अनुसार अच्छे से की गई है|
एक्शन:
क्रैग मकरए और परवेज़ शेख के एक्शन जबरदस्त, खतरनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाले है|
विज़ुअल इफेक्ट्स:
विज़ुअल इफेक्ट्स भी बहुत जानदार और फिल्म की जान कहे जा सकते है|
क्लाइमेक्स:
बहुत ही इमोशनल और आंखों में आंसू ला देने वाला है|
ओपिनियन:
बढ़िया सिनेमैटोग्राफी, देशभक्ति और इमोशनल फिल्मों को पसंद करने वाले यह फिल्म देख सकते है|
रेटिंग:
7.5/10
लोकप्रिय संवाद:
पाकिस्तानी फ़ोन पर बोलता है--जनाब कौन, जनाब कौन-अक्षय कुमार जवाब देता है--तेरा बाप हिंदुस्तान
Flaw:
अगर फिल्म के डायलॉग पूरी तरह से हिंदी में होते तो बढ़िया होता क्योंकि जिनका इंग्लिश में ज्ञान कम है, उनके ऊपर से यह सारे डायलॉग निकल जाएंगे| CBFC-U/A Movietime: 2h05m Genre: Patriotic Action Drama Release: 24 January, 2025 स्काई फोर्स कास्ट: अक्षय कुमार, वीर पहाड़िया, निमरत कौर, सोहा अली खान और शरद केलकर प्रोडूसर: दिनेश विजन, ज्योति देशपांडे, अमर कौशिक, साहिल बाबर खान, डा���रेक्टर: संदीप केवलानी, अभिषेक अनिल कपूर, साउंड डिज़ाइन: गणेश गंगाधरण, कास्टूम डिज़ाइन: शिवांक कपूर, नीना बोरा, म्यूजिक: तनिष्क बागची, लिरिक्स: इरशाद कामिल, मनोज मुंतशिर, श्लोक लाल, बैकग्राउंड स्कोर: जस्टिन वर्गीज़, प्रोडक्शन डिज़ाइन: मयूर शर्मा, सुजीत सुभाष सावंत, श्रीराम कन्नन अयंगर, एडिटर: ए श्रीकर प्रसाद, सिनेमेटोग्राफी: एस कृष्णन रविचंद्रन, कोरियोग्राफी: विजय गांगुली, डायलॉग्स: संदीप केवलानी, निरेन भट्ट, स्क्रीनप्ले: निरेन भट्ट, एक्शन: क्रैग मकरए, परवेज़ शेख, विजुअल इफैक्ट्स: प्राइम फोकस, कास्टिंग डायरेक्टर: कास्टिंग बे, अनमोल आहूजा, रणवीर वाधवानी स्काई फोर्स फिल्म का टोटल कलेक्शन/बॉक्स ऑफिस वर्ल्डवाइड कितना है?158.09 करोड़ स्काई फोर्स मूवी कैसी है?बहुत बढ़िया फिल्म जो एक बार अच्छी सिनेमैटोग्राफी, अभिनय, एक्शन और इमोशनल क्लाइमेक्स के लिए देख सकते है| स्काई फोर्स बॉक्स ऑफिस कलेक्शन डे ?15.30 करोड़ स्काई फोर्स हिट या फ्लॉप ?हिट स्काई फोर्स बजट 160 करोड़ स्काई फोर्स रिलीज़ दिनांक 24 जनवरी, 2025 Read the full article
#अक्षयकुमार#अभिषेकअनिलकपूर#एक्शन#जिओस्टूडियोज#निमरतकौर#मैडॉकफिल्म्स#वीरपहाड़िया#संदीपकेवलानी#साराअलीखान#स्काईफोर्स#स्काईफोर्सफिल्म#स्काईफोर्समूवी
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The Kerala Story Ban: पश्चिम बंगाल में बैन हुई 'द केरला स्टोरी', मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लिया एक्शन
The Kerala Story Ban : The Kerala Story Ban In West Bengal: बॉलीवुड एक्ट्रेस अदा शर्मा की फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ को लेकर विवाद रुकने का नाम नहीं ले रहा है. एक तरफ बॉलीवुड के मशहूर प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह की फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ (The Kerala Story) सिनेमाघरों से लेकर बॉक्स ऑफिस तक धमाल मचा रही है. दूसरी ओर देश के कई राज्यों में इस फिल्म का भारी विरोध देखने को मिल रहा है. अब खबर आ रही है कि…

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चित्रपटांविषयी
आपल्या आयुष्यात घडणाऱ्या कोणत्याही महत्वाच्या प्रसंगी जर विचारपूर्वक आणि सजगपणे जर आपण आपली कृती,हावभाव ,वर्तन बघितलं तर सहज लक्षात येतं की आपल्यावर चित्रपट या माध्यमाचा किती जास्त प्रभाव पडलेला आहे.प्यार का इजहार किंवा लग्नप्रसंगी वाजणारी गाणी, त्यावर केलं जाणारं नृत्य वगैरे सर्व आठवावं!! बऱ्याचदा आपल्या हालचाली आणि हावभावांवरून तो कोणत्या चित्रपटांवरून प्रभावीत झालेला आहे हे सहज सांगता येऊ शकतं! सध्या चित्रपटांवर समाजातील घटनांचा प्रभाव पडतो की चित्रपटांचा प्रभाव पडून समाजमन तयार होतं हे सांगणं अवघड आहे. बहुधा दोन्ही होत असावं.
साधारणपणे विसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धापासून जसे चित्रपट निर्मितीचे तंत्रज्ञान अधिकाधिक विकसित होत गेले तसे तसे चित्रपट या माध्यमाने मानवी मनाची पकड घेतलेली आहे आणि मनोरंजनाचे साधन म्हणून आपल्या आयुष्यात महत्वाचे स्थान पटकावले आहे.त्याआधीच्या काळात लोककला सोडल्या तर पुस्तकं ही ज्ञानोपासनेचं माध्यम असण्याबरोबरच मनोरंजनाचं देखील सहज उपलब्ध असलेलं माध्यम असावीत.
या दोन माध्यमांमध्ये एक समान दुवा आहे.जर तुम्हाला वाचनाची आवड असेल तर तुम्ही हे अनुभवलं असेल की जसजसे तुम्ही वाचक म्हणून उन्नत होत जाता तसं तसं तुम्हाला आधी जे वाचलं असेल त्यापेक्षा काहीतरी अधिक चांगलं, तुमच्या मनाचा, बुद्धीचा पैस रूंदावणारं, बुद्धीला आव्हान देणारं,जाणीवा समृद्ध करणारं,आत्मोन्नतीकडे नेणारं काहीतरी हवं असतं मग मनोरंजन हे एवढंच कारण त्यामागे राहत नाही.
मराठी मध्ये तुम्ही वाचनाची सुरुवात भलेही फास्टर फेणे, बोकया सातबंडे नी केली असली तरीही मग पुढे पु .लं. देशपांडे, व. पु . काळे, गो. नी . दांडेकर ,व्यंकटेश माडगूळकर ��. वाचत तुम्ही भालचंद्र नेमाडे, श्याम मनोहर,जी ए कुलकर्णी,जयवंत दळवी,नरहर कुरूंदकर, दुर्गा भागवत वगैरे लेखकांची पुस्तकं वाचू लागता. इंग्रजीमध्ये सुरवात चेतन भगत वगैरेच्या पुस्तकाने केली असली तरीही त्यापुढे जाऊन मग इतर लेखक जसे की खुशवंत सिंग, किरण नगरकर, जे के रोलिंग,डॅन ब्राऊन इत्यादी आणि मग अगाथा ख्रिस्ती, मार्क ट्वेन, शेक्सपियर, हेमिंग्वे पासून ते काफ्का, कामू इत्यादी लेखकांकडे वळता.चित्रपटांचं सुध्दा असंच काहीसं आहे. किंवा असायला हवं.
मनोरंजन या शब्दाचा एक फारच उद्बोधक अर्थ माझ्या अलीकडेच वाचनात आला. एक म्हणजे जो प्रचलित अर्थ आहे तो की ज्यामुळे मनाचं रंजन होतं अर्थात विरंगुळा मिळतो, पण यात रंजन हा शब्द दोन अर्थांनी वापरता येतो. रक्तरंजित या शब्दात जे "रंजित" हे रंजन या शब्दाचे एक रूप आहे त्याचा अर्थ डाग असा आहे.
आपलं चित्रपट बघण्यामागे सर्वात मुख्य कारण म्हणजे आपल्याला रोजच्या कामामधून विरंगुळा म्हणून काहीतरी मनोरंजन हवं असतं पण मला मात्र तेवढ्याच कारणासाठी चित्रपट बघावा असं काही वाटत नाही.पण तेवढ्याच एका कारणासाठी आपल्याकडे अनेक जण चित्रपट बघतात आणि त्यामुळे देमार बाष्कळ बॉलीवुड, हॉलिवुड किंवा टॉलीवुड चित्रपट तयार होतात आणि होतच राहतात.
मग आपण मनोरंजनाच्या नावाखाली जी काही सामग्री बघतो त्यातून मनावर डाग पडणार नाहीत याची काळजी देखील घ्यायला हवी. बॉलीवुड, हॉलीवुड ,टॉलीवुड मधल्या मुख्य प्रवाहातल्या तद्दन मसाला चित्रपटांबद्दल दुसऱ्या अर्थाने मनोरंजन हा शब्द लागू पडतो असं बऱ्याचदा वाटतं !
माझी चित्रपट पाहण्याची सुरुवात दूरदर्शनवर शनिवारी लागणाऱ्या, ज्याला सुपरहिट मराठी चित्रपट म्हटलं जायचं ते अशोक सराफ,लक्ष्मीकांत बेर्डे ,सचिन पिळगावकर, महेश कोठारे इत्यादींचे चित्रपट पाहण्यापासून झाली. मग केव्हातरी शुक्रवारी रात्री लागणारे हिंदी चित्रपट पाहायला लागलो त्यामध्ये सलमान,शाहरुख,आमिर वगैरेंचे चित्रपट लागायचे, रविवारी दुपारी जुने हिंदी चित्रपट लागायचे त्यात दिलीपकुमार, देव आनंद, राज कपूर, राजेंद्र कुमार, ��मिताभ आदींचे चित्रपट लागायचे. पण एकूण चित्रपट बघण्यासाठी तेव्हा साधनंच कमी होती. फक्त टीव्ही हे एकच माध्यम,त्यातसुध्दा केवळ दूरदर्शन हे एकच चॅनल, कारण तेव्हा अभ्यास होणार नाही म्हणून आमच्याकडे केबल फक्त उन्हाळ्याच्या सुट्टीत लावली जायची. मग त्या उन्हाळ्याच्या सुट्टीचं वर्णन काय सांगावं !
मग उन्हाळयात डोरेमॉन, शिन-चॅन,बेन-टेन अशा वेगवेगळ्या कार्टून्स पासून ते स्टार उत्सवला लागणारं बी आर चोप्रा यांचं महाभारत, रामानंद सागर यांचं श्रीकृष्ण, रामायण किंवा शक्तिमान, सोनी वरच्या सी आय डी पासून मग अमिताभ, सलमान, शाहरुख च्या एक्शन चित्रपटांपर्यंत सगळं काही बघून काढलं जायचं आणि वर्षभराचा अनुशेष भरून काढला जायचा. त्यावेळी मराठी माध्यमाच्या शाळेत शिकत असल्यामुळे इंग्रजी चित्रपट काही फारसे बघितले जायचे नाहीत किंवा बघितले तरी ते हिंदी डब असायचे आणि बरेचसे सुपरहीरोचे तद्दन मारझोडयुक्त चित्रपट असायचे.
नंतर सातवी-आठवीत "अभ्यासघर" नावाच्या विद्यार्थ्यांचा सर्वांगीण विकास व्हावा म्हणून काढलेल्या विक्रम वाळींबे सरांच्या क्लासला जाऊ लागलो तिथे चांगल्या इंग्रजी चित्रपटांची ओळख झाली. तिथे सरांनी आम्हाला इंडियाना जोन्स, व्हर्टिकल लिमिट, टू ब्रदर्स, थ्री हंड्रेड, रॅटाट���ईल, मादागास्कर, द कराटे किड असे अनेक उत्तम चित्रपट दाखवले. तिथे चांगल्या इंग्रजी चित्रपटांबद्दल रुची निर्माण झाली.
याच सुमारास मग घरी डीव्हीडी आणि कंप्यूटर आल्यावर सीडीज आणून जॅकी चॅनचे वेगवेगळ्या कुंगफू स्टाईलवरचे रिवेंज या थीमवर बेतलेले अनेक चित्रपट बघितले. यातच एकदा एका आत्तेभावाने नववीच्या की दहावीच्या उन्हाळयाच्या सुट्टीत जवळपास २०-२५ वेगवेगळे इंग्रजी चित्रपट असलेला एक पेनड्राइव आणून दिला. त्यामध्ये इन्सेप्शन, बॅटमॅन ट्रीलॉजी, टायटॅनिक, प्लॅनेट ऑफ एप्स वगैरे भन्नाट चित्रपट होते. त्यातले तेव्हा किती समजले हा भाग जाऊ दे पण बघायला मजा आली, एकूणच हे पाश्चात्य चित्रपट म्हणजे काहीतरी वेगळं प्रकरण आहे एवढं फक्त कळत होतं.
पुढे इंजिनीअरिंगला गेल्यावर नवीन स्मार्टफोन हातात आला होता आणि नुकतंच अंबानींनी मोफत इंटरनेट जाहीर केलं होतं. अशा दोन्ही गोष्टी बरोबर पथ्यावर पडल्यामुळे, एखादा खजिनाच सापडल्यासारखं झालं ! तरीसुद्धा तेव्हा ओटीटी माध्यम फारसं प्रचलित नसल्यामुळे मोफत असलेलं टॉरेंट हाच एक पर्याय उपलब्ध होता. त्याचं तंत्र एकदा अवगत झाल्यावर मग मात्र भरमसाठ वेब सीरिज आणि इंग्रजी चित्रपट डाउनलोड करून पाहण्याचा एक कार्यक्रम सुरू झाला. म्हणजे त्या वेळी दिवसाला किमान एक चित्रपट, किंवा मग वेब सीरीजचे ४-५ एपिसोड बघितल्याशिवाय दिवस संपत नसे. सुरुवातीच्या काळात तिथे सुद्धा डब्ड चित्रपट बघितले पण हळूहळू सबटायटल्स वाचून चित्रपट बघण्याची सवय झाली.

तिथे सुद्धा सुरुवात झाली ती एक्शन, क्राइम, सुपरहीरो वगैरे प्रकारातले चित्रपट बघण्यापासून. त्यात मग Marvel, DC चे अनेक चित्रपट,Mad Max Fury Road, Harry Potter, Lord of the Rings, Hobbit यांसारख्या चित्रपट शृंखला, Flash, Arrow वगैरे सीरिज हे सगळं झपाटल्यासारखं बघून काढलं. पण ते सगळे ३-४ महिन्यातच सफाचट झालं. मग जरा गूगल केल्यानंतर IMDb टॉप २५० चित्रपटांची नावं बघितल्यावर लक्षात आलं की आपण तर अजून या चित्रपट क्षेत्राच्या महासागरात किनाऱ्यावरच आहोत, काहीच बघितलं नाही,अजून पूर्ण डुबकी मारली नाही. तेव्हा कोणत्या निकषांवर सीरीज,चित्रपट बघावेत असं काही ठरलं नव्हतं. मग एक ठरलं की IMDb वर ज्यांचं रेटिंग ७ च्या वर असेल किंवा Rotten Tomatoes चं रेटिंग जर ८५% च्या वर असेल तर त्यात मग Genre साठी कोणतं अनमान न करता सीरीज,चित्रपट बघायचे.
इंजिनीरिंगच्या त्या ४ वर्षांच्या काळात अनेकदा रात्र रात्र जागून अक्षरशः झपाटल्यासारखे १५०-२०० चित्रपट आणि २० -२२ सीरीज बघितल्या. त्यात लक्षणीय म्हणाव्या अशा या :
Breaking Bad
Game of Thrones
House of Cards
Mindhunter
Fleabag
Dark
Friends
The Big Bang Theory
Young Sheldon
The Marvelous Mrs. Maisel
Narcos
आणि हे जे काही आदल्या दिवशी बघितलं असेल त्यावर मग दुसऱ्या दिवशी वर्गात गरमागरम चर्चा व्हायची. आता मागे वळून त्या दिवसांकडे बघितलं की माझी मलाच शंका येते की मी नक्की इंजिनीरिंग कॉलेजला गेलो होतो की फिल्म इन्स्टिट्यूट मध्ये !!सुरुवातीच्या काळात नावाजलेल्या अभिनेत्यांचे चित्रपट बघण्याकडे कल होता. पण हळूहळू एक लक्षात आलं की दिग्दर्शक जर चांगला असेल तर चित्रपट चांगला असण्याची शक्यता जास्त ! त्यातूनच मग हॉलीवुडच्या चांगल्या दिग्दर्शकांची नावं शोधून त्यांचे चित्रपट बघण्याचा सपाटा लावला . त्यात अर्थातच मग
Steven Spielberg
Christopher Nolan
Quentin Tarantino
David Fincher
George Lucas
Martin Scorsese
Alfred Hitchcock
Stanley Kubrick
Ridley Scott
Clint Eastwood
Roman Polanski
Francis Ford Coppola
Ron Howard
charlie Chaplin
या आणि अशा नावाजलेल्या दिग्दर्शकांचे बऱ्यापैकी सगळे चित्रपट बघून काढले. त्यानंतर मग साहजिकच मोर्चा वळला Academy Awards अर्थात Oscar मिळालेले किंवा त्यासाठी नामांकन मिळालेले चित्रपट, Cannes Film Festival Awards मध्ये प्रदर्शित झालेले चित्रपट यांच्याकडे. त्यामुळे पुढे दिलेल्या विषयांवरील अनेक चित्रपट बघितले गेले.
पहिले व दुसरे विश्वयुद्ध
वेगवेगळ्या क्षेत्रातल्या महान लोकांचे बायोपिक्स
धर्म-तत्वज्ञान -पौराणिक गोष्टी
खेळ
पत्रकरिता
अनेक उत्तमोत्तम कालातीत कादंबऱ्यांची चित्रपटात केलेली रूपांतरे,
पीरियड ड्रामाज
मूलभूत मानवी प्रवृत्तींचे व भावभावनांचे दर्शन
गुन्हेगारी प्रवृत्तींचे वास्तववादी दर्शन
लैंगिकता
कोर्टरूम ड्रामाज
प्रेमाचं वेगवेगळ्या स्थल-कालातले आणि वयाच्या वेगवेगळ्या टप्प्यांवरचे दर्शन
माणसाच्या मनात विशिष्ट परिस्थितीत चालणारे वेगवेगळ्या विचारांचे आणि भावनांचे द्वंद्व.
विज्ञान कथा
या इतक्या वैविध्यपूर्ण विषयांवर बनलेले आशयसंपन्न चित्रपट बघितल्यानंतर आता भाषेचं आणि विषयाचं बंधन राहिलं नव्हतं.फक्त चित्रपटाचं दिग्दर्शन,संगीत, अभिनय,कथा,संवाद चांगले असायला हवेत.आता ऑस्कर जिंकलेले, नामांकन मिळालेले, त्याचबरोबर ज्याला World cinema म्हणतात ते, म्हणजे खऱ्या अर्थाने वैश्विक मानवी मूल्यांवर भाष्य करणारे असे चित्रपट बघण्यात मजा येऊ लागली. यातून मग विविध भाषांमधले चित्रपट बघितले:
फ्रेंच चित्रपट (French New Wave मधले चित्रपट , Ingmar Bergman वगैरेंचे चित्रपट)
ईटालियन चित्रपट(Vittorio De Sica, Federico Fellini, Giuseppe Tornatore इ. दिग्दर्शकांचे चित्रपट)
जपानी चित्रपट (Akira Kurosawa या महान दिग्दर्शकाचे चित्रपट)
इराणी चित्रपट (Asghar Farhadi, Abbas Kiarostami,Majid Majdi, Jafar Panahi इ. दिग्दर्शकांचे चित्रपट)
कोरियन चित्रपट(Bong Joon-ho,Park Chan-wook इ. दिग्दर्शकांचे)
चिनी चित्रपट (Wong Kor Wai,Zhang Yimou,Huo Jianqi इ. दिग्दर्शकांचे)
बंगाली चित्रपट (Satyajit Ray,Ritwik Ghatak, Mrunal Sen, Tapan Sinha,Rituparna Ghosh इ. दिग्दर्शकांचे चित्रपट)

मल्याळम चित्रपट (G Arvindan, Adoor Gopalkrishnan इ. दिग्दर्शकांचे चित्रपट)


तामिळ चित्रपट (Maniratnam, Kamal Haasan,Vetrimaaran, S shankar इ. दिग्दर्शकांचे )


हिन्दी चित्रपट(विशेषत: समांतर चित्रपटांमध्ये गणले जाणारे श्याम बेनेगल, गोविंद निहलानी, सुधीर मिश्रा, दीबाकर बॅनर्जी इ. दिग्दर्शकांचे,(नसीरउद्दीन शाह,ओंम पुरी,अमरिश पुरी,स्मिता पाटील,शबाना आझमी इ अभिनेत्यांनी काम केलेले) चित्रपट.


मराठी चित्रपट (सुमित्रा भावे -सुनील सुकथनकर ,जब्बार पटेल ,उमेश कुलकर्णी )


अशा विविध भाषांमधील विविध विषयांवर बनलेले चित्रपट बघितले. त्यातून हे लक्षात आलं की चित्रपट जेवढा स्थान���क आणि मुळात, तिथल्या मातीत रुजलेला असेल तेवढा तो वैश्विक होतो.
प्रत्येक चांगला चित्रपट हा चांगल्या पुस्तकाप्रमाणे तुम्हाला काहीतरी देऊन जातो, तुम्हाला भावनिक दृष्ट्या ,जाणिवेच्या, नेणिवेच्या पातळीवर अधिक समृद्ध करतो. प्रत्येक चित्रपट बघताना तुम्ही स्वतः त्यातल्या अनेक पात्रांशी समरस होऊन जाता आणि त्यांचं आयुष्य जगत असता,अनुभवसमृद्ध होत असता.चांगल्या पुस्तकांप्रमाणेच, चांगल्या चित्रपटांमुळे सुद्धा एकाच आयुष्यात अनेक आयुष्यं सखोलतेने- सजगतेने जगण्याची,अनुभव घेण्याची संधी मिळते.
खरं तर एखादं पुस्तक आणि त्याचं चांगलं चित्रीय रूपांतर यात वेळेच्या अभावी निवड करायची झाली तर चित्रपटाची निवड सोयीस्कर ठरते. त्या पुस्तकातला सगळा आशय २-३ तासांमध्ये दिग्दर्शक आपल्यापर्यंत पोहोचवतो. आणि तो अधिक प्रभावी ठरतो कारण घडणाऱ्या गोष्टीच्या दिसणाऱ्या चित्रासोबत उत्तम संवादफेक,चांगला अभिनय, पार्श्वभूमीला चांगल्या संगीताची जोड असते त्यामुळे कथेचा आशय अधिक जिवंतपणे, समर्पकपणे आणि समर्थपणे प्रेक्षकांपर्यंत पोहोचतो.
वीर सावरकरांनी सुद्धा सिनेमाला २० व्या शतकाची सुंदर देणगी आणि एक महान कला असं एके ठिकाणी म्हटलं आहे त्यामागे हेच कारण आहे.
यात फक्त तोटा असा होतो की जी कथा आपण पडद्यावर बघतो ती दिग्दर्शकाच्या नजरेतून बघतो त्यामुळे आपल्या कल्पनाशक्तीला थोडी कमी चालना मिळते आणि पात्रांच्या मनात चाललेले विचार पडद्यावर दाखवण्यास मर्यादा असतात.
हे सगळं बघत असतानाच चांगल्या सिनेमा बद्दल अधिक माहिती देणारी, उत्तम चित्रपट कोणता, तो कसा बघावा याची दृष्टी देणारी ही काही चांगली मराठी पुस्तकं माझ्या वाचनात आली:
लाईमलाइट (अच्युत गोडबोले- नीलांबरी जोशी)
पडद्यावरचे विश्वभान(संजय भास्कर जोशी)
सिनेमा पराडिसो ( नंदू मूलमुले)
नॉट गॉन विथ द विंड (विश्वास पाटील).
तसेच persistence.of.cinema, inthemood.forcinema,jump.cut.to यासारखी उत्तम recommendations देणारी Instagram पेजेस देखील आहेत. ChalchitraTalks नावाच्या Podcast मधून देखील उत्तम recommendations मिळतात.
त्याशिवाय कोणताही चित्रपट बघितल्यानंतर त्यावर
Roger Ebert
Senses of Cinema
सारख्या वेगवेगळ्या समीक्षकांची समीक्षा वाचण्याची सवय लागली. त्यामुळे चित्रपटाचा आपल्याला लागलाय तो आणि तेवढाच अर्थ आहे की आणखीही काही अर्थ आहे हे समजू लागले.
या सगळ्यात जसजसे आपण अधिकाधिक आणि दर्जेदार चित्रपट पाहू लागतो तसतसे काहीतरी अधिक नाविन्यपूर्ण, समृद्ध करणारं आपल्याला हवं असतं. मग सरळसोट चित्रपटांकडून जटिल विषय हाताळणाऱ्या, वेगवेगळ्या स्तरांवर मानवी भावभावना हाताळणाऱ्या, ज्यांचे एकापेक्षा अधिक अर्थ लागू शकतात अशा चित्रपटांकडे आपण जाऊ लागतो. पण त्याचा अर्थ असा नव्हे की मग साधे सरळ चित्रपट बघणे बंद करावे. त्याचा अर्थ एवढाच की जाणकार प्रेक्षक म्हणून आपली इयत्ता वाढलेली आहे.
जेव्हा आपण वेगवेगळ्या भाषांमधले,प्रांतांमधले,देशांमधले, वेगवेगळ्या विषयांवरचे चित्रपट पाहतो तेव्हा आपण एक प्रकारे वैश्विक नागरिक बनतो. त्या देशांमधली संस्कृति,तिथले आचार विचार, वागण्या बोलण्याची पद्धत, तिथलं खानपान हे सगळे अप्रत्यक्षपणे अनुभवल्यामुळे आपल्या विचारात, वागण्यात खुलेपणा येतो.एवढ्या सगळ्या भावभावना अनुभवल्यानंतर शेवटी माणूस प्रेमाचा भुकेला आहे ही मौल्यवान गोष्ट,हे सत्य इतक्या विविध रुपांतून, घटनांमधून आपल्या समोर येतं, मनावर ठसतं.याहून अधिक माणसाला काय हवं !!
~ चैतन्य कुलकर्णी
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चैंपियंस ट्रॉफी जीत के बाद इंदौर के महू में हिंसा: मस्जिद के सामने दो गुटों के बीच भड़की झड़प

चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भारत की जीत के बाद इंदौर के महू इलाके में जश्न का माहौल अचानक हिंसा में बदल गया। रविवार रात दुबई में भारत की शानदार जीत के बाद कुछ युवाओं ने महू क्षेत्र में विजय रैली निकाली।
मस्जिद के पास भड़की हिंसा
जश्न मनाते हुए रैली जब जामा मस्जिद के पास पहुंची तो वहां मौजूद कुछ लोगों के साथ कहासुनी हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों गुटों के बीच भीषण पथराव शुरू हो गया। इस घटना में कई लोग घायल हुए हैं और हिंसा के दौरान दुकानों में आग भी लगा दी गई।
स्थिति नियंत्रण में, इलाके में पुलिस तैनात
हिंसा के बाद इलाके में तनाव फैल गया, जिसके चलते पुलिस प्रशासन एक्शन में आ गया। महू क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि घटना के बाद स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि इलाके में पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हालात पर पूरी नजर रखी जा रही है।
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कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के प्रयासों से कालवाड़ रोड पर नई पुलिया का उद्घाटन, जनता ने किया आभार व्यक्त 🚧✅

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ जी कैबिनेट मंत्री, राजस्थान सरकार
एक्शन मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का वादा हुआ पूरा, जनता ने जताया आभार
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के सार्थक प्रयासों से कालवाड़ रोड पर नई पुलिया के निर्माण कार्य का उद्घाटन, जनता ने जताया कर्नल साहब का आभार
कालवाड़ रोड पर ₹4.07 करोड़ ��ी लागत से नई पुलिया का निर्माण कार्य, जनता ने जताया कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का आभार
कैबिनेट मंत्री, राजस्थान सरकार और झोटवाड़ा के लोकप्रिय भाजपा विधायक कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ अपना हर किया हुआ वादा पूरा कर रहे हैं। कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के सार्थक प्रयासों से बांडी नदी, कालवाड़ रोड पर नई पुलिया निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। इस निर्माण कार्य की लागत ₹4.07 करोड़, लंबाई 286 मी. और चौड़ाई : 7.5 मी. (2 लेन) है।
जनता और कार्यकर्ताओं ने कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के इस सराहनीय काम की प्रशंसा करते हुए हार्दिक आभार जताया है।
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा, इस नई पुलिया के निर्माण से क्षेत्र में यातायात की गति तेज होगी, जिससे लोगों को लंबी दूरी तय करने में समय की बचत होगी और यात्रा सुगम, सुरक्षित और सरल होगी। इसके निर्माण से आसपास के क्षेत्रों में व्यापार और अन्य ��तिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा
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