#भारत में ठीक होने की दर
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Cure PE: Best Sexologist in Patna, Bihar India | Dr. Sunil Dubey
शीघ्रपतन गुप्त या यौन समस्या:
यदि आप शीघ्रपतन से पीड़ित गुप्त रोगी हैं, तो आपको अपनी इस गुप्त समस्या के बारे में निश्चित ही इसके सही तथ्यों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। वास्तव में, भारत में 35-40% लोग (18 वर्ष से ऊपर) इस मानसिक व मनोवैज्ञानिक गुप्त विकार से प्रभावित हैं। दुनिया में, 30-35% से अधिक लोग अपने यौन जीवन में शीघ्रपतन की इस गुप्त समस्या की रिपोर्ट करते हैं। पुरुषों में होने वाले इस गुप्त समस्या (शीघ्रपतन) के दो अर्थ हैं। सबसे पहली बात कि यह कोई यौन समस्या नहीं है, बल्कि यौन शिक्षा और आत्म-जागरूकता की कमी के कारण व्यक्ति के यौन जीवन के यह घटना होती है। दूसरी बात, यह एक गुप्त समस्या है और यह व्यक्ति के यौन जीवन में स्खलन के समय को प्रभावित करती है, जिससे पति-पत्नी के बीच संघर्ष की स्थिति बनती है।
शीघ्रपतन की परिभाषा:
शीघ्रपतन पुरुषों में होने वाली एक ऐसी स्थिति है जिसमें उसके स्खलन अपेक्षित समय से पहले होता है, अक्सर यह महिला साथी के प्रवेश के 1-2 मिनट के भीतर, जिससे व्यक्ति के यौन जीवन या युगल की अंतरंगता में निराशा और परेशानी का सबब होता है। विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे जो पटना के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर भी हैं, कहते हैं कि बहुत सारे सेक्सोलॉजिस्ट शीघ्रपतन के इलाज के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाते हैं। दरअसल, भारत में 10 में से 4 पुरुष इस गुप्त समस्या से पीड़ित होते हैं और वे अपने चिकित्सा व उपचार के लिए सही गुप्त व यौन रोग विशेषज्ञ या चिकित्सक चुनने में भ्रमित रहते हैं और इसका नतीजा यह होता है कि लोग आयुर्वेद और इसके चिकित्सा विज्ञान पर उंगली उठाते हैं। इसका मूल कारण है, सही आयुर्वेदिक चिकित्सा व उपचार से वंचित रह जाते है।
सही सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर चुनने में लोगों का असमंजस:
वास्तविकता यह है कि किसी भी गुप्त या यौन समस्या का समाधान केवल और केवल आयुर्वेद में ही विद्यमान है। आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी चिकित्सा विज्ञान के विशेषज्ञ व सेक्सोलॉजिस्ट शीघ्रपतन के गुप्त रोगी का सटीक व प्रभावपूर्ण चिकित्सा व उपचार प्रदान करते हैं। इसके पीछे का कारण यह है कि शीघ्रपतन के प्रकार और प्रकृति के अनुसार, आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसकी दवा तैयार की जाती है, जिसे केवल आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी में विशेषज्ञता रखने वाले सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर ही सही पहचान कर इसे निर्मित कर सकते हैं। शीघ्रपतन का इलाज एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है जहां लोग विज्ञापनों या धोखेबाजों के जाल में फंस जाते हैं और घंटों और मिनटों में इलाज की प्रक्रिया देखकर वहां चले जाते हैं। वे प्रामाणिक व अनुभवी सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर को चुनने से चूक जाते हैं जो उनका सही से इलाज कर सकते है और उनकी समस्या को हमेशा के लिए ठीक कर सकते है।
पुरुषों में होने वाले शीघ्रपतन के प्रकार:
प्राथमिक शीघ्रपतन: आजीवन स्थिति जो कि व्यक्ति के पहले यौन क्रिया से शुरू हो जाती है।
द्वितीयक शीघ्रपतन: अधिग्रहित स्थिति जो व्यक्ति को उनसे मनोवैज्ञानिक व भावनात्मक असंतुलन के कारण होता है।
प्राकृतिक परिवर्तनशील शीघ्रपतन: परिवर्तनशील स्खलन समय दर समय बदलती रहती है।
निम्नलिखित कारणों से व्यक्ति शीघ्रपतन का शिकार हो सकता है-
डॉ. सुनील दुबे, बिहार के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट, कहते हैं कि उन्होंने अपने पांच साल पुरुषों और महिलाओं में होने वाले भिन्न-भिन्न गुप्त व यौन विकारों पर अपना शोध किया हैं। वह दुबे क्लिनिक में प्रतिदिन प्रैक्टिस करते हैं जो पटना के लंगर टोली, चौराहा में स्थित है, यह एक प्रमाणित और गुणवत्ता-सिद्ध आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी चिकित्सा विज्ञान क्लिनिक है। अपने दैनिक अभ्यास व अनुभव के आधार पर, वे कहते हैं कि अधिकांश पुरुष गुप्त रोगी अपने शीघ्रपतन और स्तंभन दोष के इलाज के लिए इस क्लिनिक में आते हैं। उनका कहना है कि आमतौर पर शीघ्रपतन एक मनोवैज्ञानिक व भावनात्मक गुप्त रोग है, लेकिन कुछ अन्य कारक भी पुरुष को इस गुप्त विकार से प्रभावित कर सकता हैं।
मनोवैज्ञानिक कारक: चिंता, तनाव और अवसाद वे मनोवैज्ञानिक कारक हैं, जिसके कारण व्यक्ति अत्यधिक या दीर्घकालिक तनाव के कारण पुरुषों में होने वाले इस शीघ्रपतन की समस्या से पीड़ित हो सकता है।
न्यूरोलॉजिकल कारक: न्यूरोलॉजिकल कारकों के मामले में, व्यक्ति शीघ्रपतन से पीड़ित हो सकता है। ये न्यूरोलॉजिकल कारक तंत्रिका क्षति और न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन हो सकते हैं।
हार्मोनल कारक: पुरुषों में कम सेरोटोनिन और उच्च डोपामाइन दो हार्मोनल कारक हैं जो उनके यौन गतिविधि में शीघ्रपतन का कारण बन सकते हैं।
शारीरिक कारक: प्रोस्टेट की समस्याएं, मूत्र पथ के संक्रमण (यूटीआई) और स्तंभन दोष शारीरिक कारक हैं जो पुरुष यौन गतिविधि में शीघ्रपतन का कारण बन सकते हैं।
जीवनशैली कारक: अच्छे स्वास्थ्य के लिए जीवनशैली हमेशा मायने रखती है। धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन और खराब नींद की गुणवत्ता जीवनशैली कारक हैं जो किसी व्यक्ति को शीघ्रपतन की ओर ले जा सकते हैं।
शीघ्रपतन की समस्या से स्थाई मुक्ति:
डॉ. सुनील दुबे कहते हैं कि आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से शीघ्रपतन वीर्य, जीवन शक्ति और मन का विकार होता है। दरअसल, शीघ्रपतन की स्थिति में व्यक्ति यौन ऊर्जा की कमी, कमजोरी, भावनात्मक और मानसिक स्थिति में असंतुलन से ग्रस्त हो जाता है। उनका कहना है कि हर्बल उपचार, आयुर्वेदिक नुस्खे, आहार संबंधी सलाह, पंचकर्म चिकित्सा, घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव गुप्त व यौन समस्याओं को सुधारने के लिए प्रभावी और प्राकृतिक प्रक्रियाएं हैं।
अपने चिकित्सा व उपचार में, वे सभी गुप्त व यौन समस्याओं को खत्म करने के लिए आवश्यक प्राकृतिक प्रक्रियाएं प्रदान करते हैं। सर्वोत्तम परिणाम के लिए, गुप्त व यौन रोगी को दुबे क्लिनिक में जाना चाहिए जो भारत का प्रमुख आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी क्लिनिक है। भारत के विभिन्न शहरों से लोग दुबे क्लिनिक से जुड़ते है। इस क्लिनिक से फ़ोन पर अपॉइंटमेंट लें और समय पर क्लिनिक जाएँ। सही सेक्सोलॉजिस्ट का चयन सुरक्षित व प्रभावी उपचार का आधार है।
अधिक जानकारी:
दुबे क्लिनिक
भारत का प्रमाणित आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी क्लिनिक
डॉ. सुनील दुबे, भारत के वरिष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट
हेल्पलाइन नंबर: +91 98350 92586
स्थल: दुबे मार्केट, लंगर टोली, चौराहा, पटना-04
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क्या आपका वैवाहिक जीवन बिखर रहा है? आपको इसके बारे में ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम इस स्थिति से गुजरने में आपकी सहायता करने के लिए यहां हैं। जैसा कि आप जानते हैं, तलाक की दर दैनिक आधार पर अधिक हो रही है। भारत में तलाक की दर साल दर साल लगातार बढ़ रही है. भारत में 1.36 मिलियन लोग तलाकशुदा हैं. यह विवाहित आबादी के 0.24% के बराबर है। यह वह जगह है जहां हमें विवाह के बाद परामर्श के महत्व को समझना चाहिए। शादी करने के बाद कई ऐसी चीजें हो सकती हैं जिन पर शादीशुदा जोड़े एडजस्ट कर रहे हैं और त्याग कर रहे हैं। लेकिन, अगर इसे ठीक से हल नहीं किया जाता है, तो यह वैवाहिक संबंध को भी तोड़ देगा। पोस्ट मैरिटल काउंसलिंग वैवाहिक चुनौतियों को समझने और अपने रिश्ते को मजबूत करने के लिए जोड़े के बीच होने वाली चिकित्सा का एक प्रकार है। पोस्ट मैरिटल काउंसलिंग के लक्ष्यों में बेहतर संचार, संघर्ष सुलझाने, विश्वास का पुनर्निर्माण, भावनात्मक बंधन को मजबूत करने और जीवन परिवर्तनों का प्रबंधन शामिल है। पोस्ट मैरिटल काउंसलिंग जोड़ों के अनदेखे मुद्दों को खोजने में मदद करती है। इसके अलावा, जोड़ों के बीच छोटी समस्याओं पर चर्चा की जा सकती है और एक बड़ी बाधा बनने से पहले हल किया जा सकता है। यह एक विवाह परामर्शदाता की मदद से किया जाता है। यदि आपके वैवाहिक संबंध किसी भी समस्या का सामना करते है���, तो जल्द से जल्द एक पोस्ट मैरिटल काउंसलिंग प्राप्त करना बेहतर है। यहां तक कि अगर यह किसी भी मुद्दे का सामना नहीं कर रहा है, तो आप कई मुद्दों को पा सकते हैं जो आपके साथी के साथ संबोधित नहीं किए जाते हैं।यह आपको एक अच्छा वैवाहिक जीवन जीने में मदद करेगा। पोस्ट मैरिटल काउंसलिंग के बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉ. राणा के मेडिकल हॉल से संपर्क करें।
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Covid-19: देश में कोविड-19 के 3,720 नए मामले।
नयी दिल्ली, तीन मई (भाषा) देश में कोरोना वायरस संक्रमण के 3,720 नए मामले सामने आए हैं, वहीं उपचाराधीन मरीजों की संख्या 40,177 है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय द्बारा सुबह आठ बजे अद्यतन किए गए आंकडों के अनुसार संक्रमण से 20 और लोगों की मौत होने से मृतक संख्या 5,31,584 हो गई है। इनमें संक्रमण से मौत के आंकड़ों का पुन:मिलान करते हुए केरल ने वैश्विक महामारी से जान गंवाने वाले मरीजों की सूची में छह नाम जोड़े हैं।आंकडों के अनुसार, देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़कर 4,49,56,716 हो गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, उपचाराधीन मामले कुल मामलों का 0.09 प्रतिशत है, वहीं संक्रमण से उबरने की राष्ट्रीय दर 98.73 प्रतिशत है।संक्रमण से कुल 4,43,84,955 लोग ठीक हो चुके हैं।मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, देशव्यापी टीकाकरण अभियान की शुरुआत से अब तक टीकों की कुल 220.66 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं। गौरतलब है कि भारत में सात अगस्त 2020 को कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गई थी। संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गए थे। देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ से अधिक हो गए थे। चार मई 2021 को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी। पिछले साल 25 जनवरी को संक्रमण के कुल मामले चार करोड़ के पार चले गए थे। Pc:Daily Sabah Read the full article
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नवी मुंबई : अनिल बेदाग - दुनिया का सबसे बड़ा वर्टिकली इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर प्रोवाइडर अपोलो (Apollo) भारत में मरीजों की देखभाल में सबसे आगे रहा है और हेल्थकेयर में अंग प्रत्यारोपण क्रांति का नेतृत्व किया है। आज अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने 500 बच्चों के लिवर प्रत्यारोपण के सफल समापन की घोषणा की। अपोलो प्रत्यारोपण कार्यक्रम दुनिया के सबसे बड़े और सबसे व्यापक प्रत्यारोपण कार्यक्रमों में से एक है, जो अत्याधुनिक सेवाओं की पेशकश करता है। इसमें लीवर रोग का प्रबंधन, किडनी रोग का प्रबंधन, लीवर और किडनी प्रत्यारोपण, हृदय और फेफड़े का प्रत्यारोपण शामिल है। 90% सफलता दर के साथ अपोलो लिवर ट्रांसप्लांट प्रोग्राम दुनिया भर के रोगियों के लिए गुणवत्ता और आशा का प्रकाश स्तंभ है। अपोलो अस्पताल में 50 स��� अधिक देशों से लिवर प्रत्यारोपण के मरीज आते हैं। फिलीपींस, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, जॉर्डन, पाकिस्तान, केन्या, इथियोपिया, नाइजीरिया, सूडान, तंजानिया, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, सीआईएस, म्यांमार और कई अन्य देशों के मरीजों ने भारत में परिवर्तनकारी और किफायती समाधान पाया है। डॉ.अनुपम सिब्बल, ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर-सीनियर पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल्स ने कहा, “हमें इस महत्वपूर्ण मील के पत्थर तक पहुंचने पर गर्व है और इतने बच्चों और परिवारों की मदद करने में सक्षम होने पर हमें गर्व है। पिछले कुछ वर्षों में कई चुनौतियों पर काबू पाया है। 4 किलोग्राम से कम वजन वाले छोटे बच्चों में प्रत्यारोपण, लिवर विफलता के अलावा गंभीर चिकित्सा स्थितियों वाले बच्चों और बच्चों में प्रत्यारोपण, एबीओ असंगत प्रत्यारोपण जब परिवार के पास रक्त समूह संगत दाता नहीं है। हम बहुत खुश हैं कि हमारी 500वीं मरीज एक बच्ची है और हमारे लगभग 45% मरीज अब लड़कियां हैं। डॉक्टरों, नर्सों और सपोर्ट स्टाफ की हमारी समर्पित टीम ने काम किया है। 1998 में जब हमने भारत में पहला सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया, तब से अपोलो ट्रांसप्लांट प्रोग्राम ने बच्चों और वयस्कों में 4100 से अधिक लिवर ट्रांसप्लांट किए हैं।'' अपोलो की 500 वीं बालचिकित्सा लिवर रोगी कहानी - प्रिशा बिहार के जहानाबाद में एक युवा मध्यवर्गीय जोड़े ने खुशी और श्रद्धा से अपनी पहली बेटी का नाम "प्रिशा" रखा, ��िसका शाब्दिक अर्थ है भगवान का उपहार। एक शिक्षक पति और गृहिणी पत्नी, पहले कुछ सप्ताह आनंदमय थे लेकिन फिर उन्हें एहसास हुआ कि प्रिशा को पीलिया हो गया है। एक डॉक्टर से दूसरे डॉक्टर के पास जाने की कठिन राह ने पूरी निराशा और पीड़ा को जन्म दिया जब उन्हें बताया गया कि उसे एक ऐसी बीमारी है जो मौत की सजा है, बाइलरी एट्रेसिया जिसके कारण उसका लीवर फेल हो जाएगा। वे हार मानने के लिए तैयार नहीं थे ��र शीर्ष विशेषज्ञों से संपर्क करने के लिए अपनी विनम्र पहुंच से आगे बढ़ गए, जब तक कि उन्हें एहसास नहीं हुआ कि लिवर प्रत्यारोपण जीवन रक्षक होगा, और लगभग 6 महीने की उम्र में उसे अपोलो ले आए। चुनौतियां वास्तव में कई थीं लेकिन परिवार के संकल्प और टीम की प्रतिबद्धता के कारण उन पर काबू पा लिया गया। जब तैयारी की जा रही थी, तब पूरक आहार देने और प्रत्यारोपण के लिए पोषण पुनर्वास प्राप्त करने के लिए उसकी नाक के माध्यम से एक फीडिंग ट्यूब डाली गई थी। उसकी मां ने उसके लिवर का एक हिस्सा दान कर दिया और एक सफल लिवर ट्रांसप्लांट के बाद प्रिशा खूबसूरती से ठीक हो गई।
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14 राज्यों में रिकवरी रेट 90% या उससे ज्यादा, इन राज्यों का पजिटिविटी रेट बना चिंता का कारण
14 राज्यों में रिकवरी रेट 90% या उससे ज्यादा, इन राज्यों का पजिटिविटी रेट बना चिंता का कारण
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पतंजलि ने किया कोरोना की दवाई “कोरोनिल” बनाने का दावा । स्वामी रामदेव स्वयं को कोरोना से संक्रमित कर करेंगे ठीक ।
जहां एक ओर कोरोना वायरस या कोविड 19 या इसे चाईनीस वायरस कहना ठीक होगा, ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचा रखा है, वहीं दूसरी ओर इसके इलाज की भी कोशिशें तेजी से जारी हैं । इसी बीच पूरी दुनिया को चौंकाते हुए भारत की एक बड़ी आयुर्वेदिक दवाईयों की कंपनी पतंजलि ने यह दावा करके सबको हैरान कर दिया है कि उन्होंने इस महामारी के विरुद्ध शत प्रतिशत बिमारी का इलाज खोज निकाला है । स्वामी रामदेव ने तो यहाँ तक दावा किया है कि वे स्वयं को कोरोना से संक्रमति करने के पश्चात इस दवाई के सेवन से 3 से 7 दिनों में ही ठीक भी होकर दिखाएंगे । उनका कहना है कि योग के जरिये भी इस बिमारी को ठीक किया जा सकता है । और आयुर्वेदिक रसायनों के नियमित सेवन जैसे कि तुलसी, गिलोय तथा अश्वगंधा के द्वारा इसे पूर्णत: ठीक कर आदमी स्वस्थ हो सकता है ।
जिस दवाई की वे बात कर रहे हैं, उन्होंने उसका नाम “कोरोनिल” रखा है । इंडिया टीवी को दिए एक इंटरवियू में स्वामी रामदेव ने बताया कि उनकी दवाई ने क्लीनिकल ट्रायल का पहला चरण पूरा कर लिया है और इससे उन्होंने सैंकड़ों लोगों को ठीक करके दिखाया है । उन्होंने कहा कि इसे बनाने की विधि बहुत ही आसान है । इसमें मुलेठी, अश्वगंधा, दालचीनी, नीम, काली मिर्च, आंवला, शतावर, अदरक, गिलोय, कच्ची हल्दी इस सभी को एक साथ मिला कर व कूट कर इनका मसाला बनाना है, और इसे एक काढ़े या चाय की तरह नियमित तौर पिया जाना है ।
उन्होंने बताया कि उन्होंने इस बिमारी के इलाज के लिए रिसर्च अक्तूबर, 2019 से पहले ही शुरू कर दी थी और यही कारण है कि अब जाकर इसका इलाज बनकर तैयार हो पाया है । हालांकि उन्होंने कोरोनिल के साथ – साथ श्वासारि वटी को भी सुबह शाम एक – एक गोली लेने को कहा है, जिससे इस बिमारी को ठीक करने में जल्दी सहायता मिलेगी । साथ ही उन्होंने सभी को भस्त्रिका प्राणायाम, कपालभाति एवं अनुलोम विलोम करने का भी नियमित रूप से करने का आग्रह किया है, ताकि इससे सभी के फेफड़े मजबूत हो सकें एवं कोरोना जैसी किसी भी बिमारी से लड़ने में सहायता मिल सके ।
इससे एक दिन पहले पतंजलि आयुर्वेद के सी.ई.ओ. आचार्य बालकृष्ण ने भी बताया था कि उन्होंने दवाई का क्लीनिकल कंट्रोल के परिणाम भी आने वाले हैं । उन्होंने अपने वैज्ञानिकों की पूरी टीम इस काम पर लगा रखी है और अब परिणाम भी बेहद सुख की सांस देने वाले हैं । उन्होंने रोज के हिसाब से रोगियों का डाटा रखा, उन���े सुधार की दर जाँची । उन्होंने सैंकड़ों कोरोना वायरस से ग्रसित रोगियों को पंतजलि आयुर्वेद की दवाई दी और शत प्रतिशत रोगी ठीक भी हुए हैं । 80% रोगी तो 5 – 6 दिनों में ही पूर्णत: स्वस्थ हो गए थे । बाकि गंभीर रोगियों को अधिक से अधिक 14 दिनों में ठीक करने का उन्होंने दावा किया है ।
सबसे बड़ी बात उन्होंने कही है कि उन्हें पता है कि दुनिया को इस दवाई का सबूत भी देना होगा और इसीलिए वे क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल ही कर रहे हैं और आने वाले 4 से 5 दिनों के भीतर ही वे इसे पूरा कर लेंगे । और इसी के बाद वे पूरी दुनिया को प्रमाणों सहित ही कोरोना का दवा देंगे और भारत व आयुर्वेद का डंका पूरा दुनिया में बजेगा, जिसे सभी को मानना होगा ।
यदि ऐसा होता है तो यह खबर भारत ही नहीं पूरी दुनिया के लिए उत्साहवर्धक होने वाली है क्योंकि अब तक इस बिमारी से पूरी दुनिया में 80 लाख से अधिक लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं और साढ़े चार लाख से अधिक लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है । अकेले भारत में संक्रमित लोगों को संख्या 3 लाख को पार करने वाली है और कई राज्यों में तो हालात बेकाबू हैं । इससे लोगों की जान के साथ – साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुँचा है । लोगों की नौकरियां चली गई हैं और व्यापार पूरी तरह से ठप पड़ा है । ऐसे में आशा यही है कि जब तक इस महामारी के रोकथाम की कोई वैक्सीन नहीं आ जाती, तब तक पतंजलि का कोरोनिल दवा रामबाण बनकर भारत देश के मरीजों का ही नहीं, अपितु पूरे विश्व के मरीजों की ईलाज कर सके और लाखों जाने व अर्थव्यवस्थाएं बचा सकें ।
अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएं – https://rawpolitics.in/
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एक ओर जहाँ पूरी दुनिया के वैज्ञानिक कोविड-19 के लिए दवा खोजने और टिका बनाने के जदोजहद में लगे हुए है | , वही बाबा रामदेव भारत में अपनी चमत्कारी दवा कोरोलिन के साथ आ टपके ! तुर्रा ये कि कोविड -19 के इलाज़ में इसकी सफलता दर 70 , 80 या 90 % नहीं बल्कि पुरे 100 % है | मेडिसिन ( आयुर्वेदिक दवाओं समेत ) के इतिहास में शायद ही कोई और दवा 100 % सफलता की निश्चितता का दावा करती हो ! बाबा जी ने ये घोषणाएं अपनी पूरी मंडली के साथ राष्ट्रीय टेली विज़न पर की और देश -दुनिया देखती रह गई|भारत की बात बाद में लेकिन इस नौटंकी की वजह से दुनिया के वैज्ञानिक विरादरी पर तब -तक हमारे देश की अच्छी -खासी किरकरी हो चुकी थी | बाबा रामदेव की इस घोषणा के बाद , उत्तराखंड सरकार ने कहा कि उसकी लाइसेंस देने वाली संस्था ने दिव्या फार्मेसी को ( पतंजली कि दावा इकाई ) किसी किस्म का अप्रूवल कोरोना किट के लिए नहीं दिया है | साथ ही साथ राजस्थान सरकार ने पतंजली द्वारा किसी किस्म के क्लीनिकल ट्रायल कि जानकारी के संबध में अनभिज्ञयता जता दी | रही सही कसर इस खबर ने पूरी कर दी की कोविड -19 के हल्के लक्षणों वाले मरीजों को भी ट्रायल के दौरान पतंजली की कोरोनिल से कोई आराम न होने पर उन्हें ऐलोपैथिक दावा देकर ठीक किया गया था | भाण्डा फुट चूका था , और भारत सरकार के आयुष विभाग ने भी रामदेव को नोटिस पकड़ा दी है | दो कदम और आगे आकर ड्रग अथॉरिटी ने ये राज भी खोल दिया कि रामदेव ने 'कोरोनिल' का लाइसेंस सर्दी -खासी -जुखाम के लिए ले रखा है | कहा जाता है आयुर्वेद दुनिया कि प्राचीनतम चिकित्सा पद्धतियों में से एक है | चिकित्सा संबधी प्राचीन ज्ञान को भारत में आयुर्वेद ने लिपिबद्ध , सुसंगत और सांस्थानिक रूप प्रदान किया है | अतीत के किसी भी ज्ञान के सामान आयुर्वेद का मानव समाज की बेहतरी के लिए अपना योगदान रहा है |यही कारण है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता में अभिवृद्धि हो या सामान्य सर्दी -जुखाम हो या फिर मर्ज (बवासीर ) वैगरह , आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का प्रयोग भारत में आज भी लोकप्रिय है | लेकिन इसी के साथ जैसे किसी भी प्राचीन ज्ञान परम्परा कि सीमा बनती है आयुर्वेद की भी अपनी एक सीमा है | आधुनिक काल का सच है | सर्जरी हो , टीकाकरण हो , हार्ट ट्रांसप्लांट हो , ये सब आधुनिक चिकित्सा पद्धति की देन है | जिनका कोई भी प्राचीन चिकित्सा पद्धति मुकाबला नहीं कर सकती है | इसी वजह से " आयुर्वेदाचार्य " ' बालकृष्ण ' की तबियत बिगड़ने पर उन्हें सीधे Aiims की याद आ जाती है |
#हार्ट ट्रांसप्लांट#सामान्य सर्दी#प्रतिरोधकक्षमता में अभिवृद्धि#साइड इफ़ेक्ट#भारतीयसमाज#रासायनिक क्रियारोग#सर्दी -जुकाम#सर्जरी#बालकृष्ण#बाबारामदेव#प्राचीनतमचिकित्सा पद्धतियों#प्राचीन ज्ञान#प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त#पिछड़ापन#पतंजली#टीकाकरण#कोरोलिन#कार्यकारण#काढ़े#कफ#एलोपैथी#उत्तराखंड सरकार#आयुष विभाग#आयुर्वेदाचार्य#AIIMS#Competitive Edge#आधुनिक चिकित्सा पद्धति#आधुनिक विज्ञानंआयुर्वेद#आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का प्रयोग#भारत में
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क्रय शक्ति समता: ट्विटर पर खर्चीला भारत में खर्चीला खर्चीला? जानें पता करें मस्क का विज्ञान
क्रय शक्ति समता: ट्विटर पर खर्चीला भारत में खर्चीला खर्चीला? जानें पता करें मस्क का विज्ञान
ट्विटर ब्लू टिक: प्रेक्षक मास (एलोन मस्क) ने 1 नवंबर को ऐसा किया था जो कि विज्ञापन के लिए खतरनाक था। सभी के लिए ठीक नहीं है। एक बार फिर से चालू होने के बाद, विशेष अपडेट के लिए पावर पायरिटी (परचेज़िंग पावर पैरिटी) के एयर परचेजिंग पावर पायराइटी । आइए क्या परचेजिंग पावर पायरिटी (परचेजिंग पावर पैरिटी)? ओईसीडी (ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट) के पावर पायर पायरी कन्वर्जन की दर वैभव…
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Reduced Libido: Top-level Best Sexologist in Patna, Bihar | Dr. Sunil Dubey
पुरुषों होने वाले में कामेच्छा की कमी या लॉस ऑफ लिबिडो बारे में:-
आज के समय में लोगो का जीवन व लाइफस्टाइल इतना व्यस्त हो गया है कि वे टेक्नोलॉजी से ज्यादा और प्रकृति से कम जुड़ पाते है। कहा भी गया है विज्ञान लोगो के लिए जितना फायदेमंद है उतना ही इसके दुष्प्रभाव भी है। हम जैसे इसका उपयोग करते है यह वैसे ही हमें परिणाम देता है। गुप्त रोग या यूँ कहे कि यौन रोग जिसके बारे में लोग न तो सुनना पसंद करते है और न ही बोलना। परन्तु यह है तो एक बीमारी ही जो न केवल एक व्यक्ति को बल्कि उसके परिवार को भी प्रभावित करता है। आज का यह सत्र, पुरुषों में कामेच्छा की कमी, जिसे हाइपोसेक्सुअलिटी या कम यौन इच्छा के रूप में भी जाना जाता है, एक सामान्य स्थिति ��ै जिसमें व्यक्ति को उसके यौन रुचि, उत्तेजना या आनंद में लगातार कमी होती है। वास्तव में, पुरुषों में कामेच्छा में कमी व्यक्ति के जीवन में सबसे अधिक बार 40 वर्ष की आयु के बाद होती है क्योंकि उस समय, टेस्टोस्टेरोन (पुरुष यौन हॉर्मोन) का स्तर प्रति वर्ष 1% की दर से लगातार कम होती जाती है।
विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य, गुप्त व यौन रोग विशेषज्ञ और आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सुनील दुबे, जो कि पटना में शीर्ष स्तर के सेक्सोलॉजिस्ट भी हैं, कहते हैं कि मुख्य रूप से शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और जीवनशैली से जुड़े सामान्य कारक हैं जो किसी व्यक्ति के यौन या सामान्य जीवन को प्रभावित करते हैं। कम कामेच्छा की इस स्थिति में, शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, जीवनशैली, उम्र बढ़ने और चिकित्सा स्थितियां किसी व्यक्ति को गुप्त व यौन रोग की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस गुप्त व यौन विकार पर अपना शोध भी किया है और इससे छुटकारा पाने के लिए सबसे प्रभावी आयुर्वेदिक चिकित्सा-उपचार और देसी उपाय भी खोज निकाले हैं। आज के समय में, भारत के विभिन्न शहरों से गुप्त व यौन रोगी दुबे क्लिनिक से फ़ोन पर संपर्क क�� अपना इलाज करवाने के लिए पटना आते है।
पुरुषों में कामेच्छा कम होने के कारणों के बारे में: -
शारीरिक कारण:
कम टेस्टोस्टेरोन और थायरॉयड विकार हार्मोनल असंतुलन हैं जो कामेच्छा को कम करते हैं और यौन जीवन को नीरस बनाते है।
मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापा व पुरानी बीमारियाँ हैं जो किसी भी व्यक्ति के यौन जीवन को पूरी तरह से प्रभावित करती हैं।
स्लीप एपनिया और अनिद्रा नींद संबंधी विकार हैं जो कामेच्छा और हार्मोन संतुलन को प्रभावित करते हैं।
एंटीडिप्रेसेंट और रक्तचाप की दवाएँ सीधे शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।
मनोवैज्ञानिक कारण:
तनाव, चिंता या अवसाद समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
रिश्ते संबंधी मुद्दे और सही संचार का न होना, विशेषकर वैवाहिक जीवन में।
आघात या पिछले अनुभव मनोवैज्ञानिक घटक हैं।
कम आत्मसम्मान या शरीर की छवि मानव मनोविज्ञान को प्रभावित करती है।
प्रदर्शन संबंधी चिंता हार्मोन संतुलन और तंत्रिका को प्रभावित करती है।
जीवनशैली कारक:
असंतुलित आहार, व्यायाम की कमी या शारीरिक निष्क्रियता।
शराब और धूम्रपान का अत्यधिक सेवन।
काम या तनाव के कारण नींद की कमी या थकान।
अत्यधिक काम या तनाव या जिम्मेवारी का तनाव।
उम्र बढ़ने के मामले:
टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर में गिरावट।
स्तंभन दोष या कमज़ोर इरेक्शन।
संवेदनशीलता और उत्तेजना में कमी।
डॉ. सुनील दुबे जो कि बिहार के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर है, कहते हैं कि आम तौर पर कामेच्छा की कमी या हाइपोसेक्सुअलिटी व्यक्ति को अलग-अलग चरणों या उम्र में प्रभावित करती है। इसकी प्रकृति और प्रभाव के आधार पर इसे तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है। चलिए जानते है इसके प्रकार को –
प्राथमिक हाइपोसेक्सुअलिटी: पुरुषों में आजीवन यौन इच्छा की कमी का होना।
द्वितीयक हाइपोसेक्सुअलिटी: पुरुषों में कामेच्छा की कमी का होना।
परिस्थितिजन्य हाइपोसेक्सुअलिटी: विशिष्ट परिस्थितियों में कामेच्छा की कमी का होना।
डॉ. सुनील दुबे बताते है कि कम कामेच्छा के लक्षणों को जानने से व्यक्ति को उपचार, दवा, मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त करने में मदद म���लती है। किसी भी गुप्त या यौन समस्या के शुरुआती चरण में, सही उपचार और दवा हमेशा रोगियों के स्वास्थ्य को तुरंत ठीक करने में मदद करती है। निम्नलिखित लक्षण जो किसी भी व्यक्ति के कामेक्षा की स्थिति को दर्शाती है –
यौन गतिविधियों और विचारों में रुचि में कमी का होना।
बार-बार यौन उत्तेजना या आनंद में कमी का होना।
इरेक्शन प्राप्त करने या बनाए रखने में कठिनाई होना।
संभोग की आवृत्ति या तीव्रता में कमी होना।
साथी के साथ अंतरंगता या यौन गतिविधि से बचना।
��म कामेच्छा के निदान व उपचार के बारे में, डॉ. सुनील दुबे कहते हैं कि चिकित्सा इतिहास और शारीरिक परीक्षण, हार्मोन स्तर परीक्षण (टेस्टोस्टेरोन और थायरॉयड), मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन (तनाव और अवसाद), जोड़े का संबंध और जीवनशैली का आकलन महत्वपूर्ण चीजें हैं। वह उन सभी सभी लोगों को बताते हैं कि कामेच्छा की कमी लोगों में एक आम समस्या है। अंतर्निहित कारणों को संबोधित करना, खुले संचार का अभ्यास करना, जीवनशैली में बदलाव पर विचार करना और एक पेशेवर गुप्त व यौन स्वास्थ्य चिकित्सक की तलाश करना सर्वोत्तम परिणाम के लिए सबसे अच्छा निर्णय हैं।
दुबे क्लिनिक में गुप्त व यौन रोग का आयुर्वेदिक चिकित्सा व उपचार: -
डॉ. सुनील दुबे जो दुबे क्लिनिक में दैनिक अभ्यास करते हैं यह एक प्रमाणिक और गुणवत्ता-सिद्ध आयुर्वेद व सेक्सोलॉजी चिकित्सा विज्ञान क्लिनिक है। यह चिकित्सालय लंगर टोली, चौराहा और पटना-04 में स्थित है जहाँ पूरे भारत से लोग अपनी गुप्त व यौन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए इस क्लिनिक से संपर्क करते हैं। वास्तव में, यह बिहार, भारत का पहला आयुर्वेदिक क्लिनिक है जो पिछले 60 वर्षों से अपनी सेवाएँ सभी गुप्त व यौन रोगियों को प्रदान करते आ रहा है।
डॉ. सुनील दुबे सभी गुप्त व यौन रोगियों को अपना व्यापक आयुर्वेदिक उपचार, चिकित्सा, यौन परामर्श और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान करते हैं। कम कामेच्छा के उपचार और दवा के मामले में, वे रोगियों को अपना समग्र चिकित्सा व उपचार प्रदान करते हैं जिसमें टेस्टोस्टेरोन थेरेपी, हार्मोन चेकअप, ईडी उपचार, नींद की सहायता, संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा, तनाव प्रबंधन तकनीक, नींद में सुधार मार्गदर्शन, सामान्य पदार्थ का उपयोग उपचार और सभी आवश्यक उपाय शामिल हैं।
यदि आप कामेच्छा में कमी या किसी भी गुप्त व यौन विकार का अनुभव कर रहे हैं, तो व्यक्तिगत उचित व सुरक्षित आयुर्वेदिक उपचार, मार्गदर्शन, सहायता और दवा के लिए डॉ. सुनील दुबे से परामर्श लें। दुबे क्लिनिक में अपॉइंटमेंट बुक करें जो प्रतिदिन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक फ़ोन पर उपलब्ध है। समय पर क्लिनिक पर जाएँ और अपने यौन समस्या को हमेशा के लिए अलविदा कहें...
और अधिक जानकारी के लिए: -
दुबे क्लिनिक
भारत का प्रमाणित आयुर्वेदा व सेक्सोलोजी क्लिनिक
डॉ. सुनील दुबे, सीनियर सेक्सोलॉजिस्ट
हेल्पलाइन नंबर: +91 98350-92586
स्थान: दुबे मार्केट, लंगर टोली, चौराहा, पटना-04
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हड्डी फ्रैक्चर के प्रभावी उपचार के लिये IIT गुवाहाटी ने विकसित की नई तकनीक
न्यूजवेव @ नई दिल्ली भारतीय शोधकर्ताओं ने ऐसी नई तकनीक विकसित की है जिससे यह आकलन कर सकते हैं कि पैर की हड्डी का फ्रैक्चर सर्जरी के बाद कैसे और किस सीमा तक ठीक हो सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिमुलेशन मॉडल पर आधारित यह तकनीक सर्जरी के बाद जाँघ की हड्डी के फ्रैक्चर में उपयोगी हो सकती है। साथ ही, यह तकनीक फ्रैक्चर उपचार के लिए सर्जरी से पहले सही इम्प्लांट या तकनीक चुनने में भी मदद करेगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि विभिन्न फ्रैक्चर निर्धारण रणनीतियों के उपचार परिणामों का आकलन करने के लिए इस तकनीक का उपयोग हो सकता है। इससे रोगी के विशिष्ट शारीरिक गठन और फ्रैक्चर प्रकार के आधार पर इष्टतम रणनीति का चयन किया जा सकता है। यह अध्ययन आईआईटी, गुवाहाटी के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। यह अध्ययन, आर्थोपेडिक्स में सटीक और प्रभावी निर्णय लेने की दर में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिससे फ्रैक्चर रिकवरी से जुड़ी लागत और बीमारी का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है। विभिन्न उपचार विधियों के बाद फ्रैक्चर रिकवरी की प्रक्रिया को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने परिमित तत्व विश्लेषण, एआई टूलऔर फजी लॉजिक के संयोजन का उपयोग किया है। इसके लिए विशिष्ट सिमुलेशन के साथ-साथ अस्थि-विकास मापदंडों का उपयोग किया गया है। फ्रैक्चर उपचार क्षमता की तुलना के लिए हड्डियों को स्थिरता प्रदान करने वाले स्क्रू आधारिततंत्र के प्रभाव की पड़ताल भी की गई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि टूटी हड्डियों में सुधार के संबंध में एआई मॉडल के आकलन प्रयोगात्मक अवलोकन के अनुरूप पाये गए हैं, जो इसकी विश्व��नीयता को दर्शाते हैं।
आईआईटी गुवाहाटी के सूत्रों ने बताया कि इस सटीक मॉडल का उपयोग उपचार के समय को कम कर सकता है, और उन रोगियों के लिए आर्थिक बोझ और दर्द को कम कर सकता है, जिन्हें जांघ के फ्रैक्चर के उपचार की आवश्यकता होती है। विभिन्न जैविक और रोगी-विशिष्ट मापदंडों के अलावा, यह एआई मॉड्यूल धूम्रपान और मधुमेह जैसे घटकों को भी आकलन प्रक्रिया में शामिल कर सकता है। आईआईटी (IIT) गुवाहाटी के डिपार्टमेंट ऑफ बायोसाइंस में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सौप्तिक चंदा और उनके शोध छात्र प्रतीक नाग का यह अध्ययन शोध पत्रिका प्लस वन में प्रकाशित किया है। डॉ सौप्तिक चंदा बताते हैं कि ‘‘जटिल जैविक घटनाओं को समझने और उनका आकलन करने में एआई प्रभावी रूप से सक्षम है, इसीलिए, स्वास्थ्य विज्ञान अनुप्रयोगों में यह तकनीक एक बड़ी भूमिका निभा सकती है।‘‘ उम्रदराज लोगों की बढ़ती आबादी के साथ दुनियाभर में जाँघ की हड्डी और कूल्हे के फ्रैक्चर की घटनाएं बढ़ी हैं। अकेले भारत में हर साल 2 लाख हिप फ्रैक्चर होते हैं, जिनमें से अधिकांश को अस्पताल में भर्ती होने और ट्रॉमा केयर की आवश्यकता होती है। शोधकर्ताओं की योजना इस एल्गोरिदम के आधार पर एक सॉफ्टवेयर ऐप विकसित करने की है, जिसका उपयोग अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में उनके फ्रैक्चर उपचार प्रोटोकॉल के हिस्से के रूप में किया जा सकता है। पशुओं पर अध्ययन के जरिये मापदंडों में सुधार के लिए शोधकर्ता पूर्वोत्तर इंदिरा गांधी क्षेत्रीय स्वास्थ्य और चिकित्सा विज्ञान अस्पताल, शिलांग के डॉ. भास्कर बोरगोहेन एवं हड्डी रोग विशेषज्ञों की उनकी टीम के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। (इंडिया साइंस वायर) Read the full article
#AI#IITGuwahati#ArtificialIntelligence#Bioengineering#Biosciences#BoneHealing#Fractures#Geriatricpopulation
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��ारत में 5,910 नए कोविड मामले, 16 मौतें
नई दिल्ली, 5 सितंबर (SuryyasKiran)। भारत में पिछले 24 घंटों में 5,910 नए कोविड मामले दर्ज किए गए, जो पिछले दिन की संख्या 6,809 के मुकाबले थोड़ी कम है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को दी है। इसी अवधि में, देश में 16 और लोगों की मौत हुई जिसके बाद कुल मौतों की संख्या 5,28,007 हो गई। इस बीच, सक्रिय केसलोड 53,974 है, जो देश के कुल पॉजिटिव मामलों का 0.12 प्रतिशत है।पिछले 24 घंटों में 7,034 मरीजों के ठीक होने के बाद अब तक ठीक होने वालों की कुल संख्या 4,38,80,464 हो गई। इस बीच, भारत की दैनिक पॉजिटिविटी दर बढ़कर 2.60 प्रतिशत है, जबकि साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 2.15 प्रतिशत है।साथ ही इसी अवधि में, देश भर में कुल 2,27,313 परीक्षण किए गए। सोमवार की सुबह तक, भारत का कोविड-19 टीकाकरण कवरेज 213.52 करोड़ से अधिक हो गया।टीकाकरण अभियान की शुरूआत के बाद से 4.04 करोड़ से अधिक किशोरों को कोविड-19 वैक्सीन की पहली खुराक दी गई है।--SuryyasKiranपीटी/एसकेपी Read the full article
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कोरोनावायरस लाइव अपडेट: 16,103 नए मामले, भारत में 31 और मौतें
कोरोनावायरस लाइव अपडेट: 16,103 नए मामले, भारत में 31 और मौतें
भारत COVID-19 लाइव: वसूली दर 98.54% दर्ज की गई, मंत्रालय ने कहा। (फ़ाइल) नई दिल्ली: भारत ने रविवार को 16,103 नए कोरोनोवायरस मामलों को जोड़ा, जबकि 31 नई मौतों ने देश के वायरस से संबंधित मृत्यु संख्या को बढ़ाकर 5,25,199 कर दिया, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला। मंत्रालय ने कहा कि सक्रिय मामले 1,11,711 हैं, जिसमें कुल संक्रमण का 0.26 प्रतिशत शामिल है, जबकि ठीक होने की दर 98.54…
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OnePlus 10R 5G, Nord CE 2 Lite के स्पेसिफिकेशन भारत में लॉन्च से पहले छेड़े गए
OnePlus 10R 5G, Nord CE 2 Lite के स्पेसिफिकेशन भारत में लॉन्च से पहले छेड़े गए
OnePlus 10R 5G भारत में 28 अप्रैल को OnePlus Nord CE 2 Lite के साथ लॉन्च होने के लिए बिल्कुल तैयार है। लॉन्च से ठीक एक हफ्ते पहले, चीनी स्मार्टफोन कंपनी ने आगामी वनप्लस स्मार्टफोन्स के बारे में कई विवरणों का खुलासा किया है, जो उनके कैमरे, बैटरी और फास्ट चार्जिंग क्षमताओं की एक झलक पेश करते हैं। OnePlus 10R 5G में अनु��ूली फ्रेम दर के साथ 120Hz फ्लुइड डिस्प्ले की सुविधा की पुष्टि की गई है। OnePlus…
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#वनप्लस#वनप्लस 10आर 5जी स्पेसिफिकेशंस#वनप्लस 10आर नॉर्ड सीई 2 लाइट स्पेसिफिकेशन टीज़र इंडिया लॉन्च की तारीख 28 अप्रैल वनप्लस 10आर 5जी#वनप्लस नॉर्ड सीई 2#वनप्लस नॉर्ड सीई 2 विनिर्देशों
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OnePlus 10R 5G में 120Hz फ्लुइड डिस्प्ले का टीज़र, Nord CE 2 Lite में 5,000mAh की बैटरी होगी
OnePlus 10R 5G में 120Hz फ्लुइड डिस्प्ले का टीज़र, Nord CE 2 Lite में 5,000mAh की बैटरी होगी
OnePlus 10R 5G भारत में 28 अप्रैल को OnePlus Nord CE 2 Lite के साथ लॉन्च होने के लिए बिल्कुल तैयार है। लॉन्च से ठीक एक हफ्ते पहले, चीनी स्मार्टफोन कंपनी ने आगामी वनप्लस स्मार्टफोन्स के बारे में कई विवरणों का खुलासा किया है, जो उनके कैमरे, बैटरी और फास्ट चार्जिंग क्षमताओं की एक झलक पेश करते हैं। OnePlus 10R 5G में अनुकूली फ्रेम दर के साथ 120Hz फ्लुइड डिस्प्ले की सुविधा की पुष्टि की गई है। OnePlus…
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#वनप्लस#वनप्लस 10आर 5जी स्पेसिफिकेशंस#वनप्लस 10आर नॉर्ड सीई 2 लाइट स्पेसिफिकेशन टीज़र इंडिया लॉन्च की तारीख 28 अप्रैल वनप्लस 10आर 5जी#वनप्लस नॉर्ड सीई 2#वनप्लस नॉर्ड सीई 2 विनिर्देशों
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Corona cases in India : देश में कोरोना के नए मामलों में आज बढ़ोतरी दर्ज, पिछले 24 घंटे के भीतर सामने आए 1938 नए केस
नई दिल्ली: भारत में एक दिन में कोविड-19 के 1,938 नए मामले सामने आने के बाद देश में कोरोना वायरस (Corona Updates in India) से अब तक संक्रमित हो चुके लोगों की संख्या बढ़कर 4,30,14,687 हो गई। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 22,427 रह गई है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, देश में 67 और लोगों की मौत के बाद, संक्रमण की वजह से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 5,16,672 हो गई। देश में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 22,427 हो गई है, जो कुल मामलों का 0.05 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 660 की कमी दर्ज की गई। मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.75 प्रतिशत है। अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण की दैनिक दर 0.29 प्रतिशत और साप्ताहिक दर 0.35 प्रतिशत दर्ज की गई। देश में अभी तक 78.49 करोड़ से अधिक नमूनों की कोविड-19 संबंधी जांच की गई है, जिनमें से 6,61,954 नमूनों की जांच पिछले 24 घंटे में की गई। देश में अभी तक कुल 4,24,75,588 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं और कोविड-19 से मृत्यु दर 1.20 प्रतिशत है। India reports 1,938 fresh #COVID19 cases & 2,531 recoveries and 67 deaths, in the last 24 hours Active case: 22,427 (0.05%) Daily positivity rate: 0.29% Total recoveries: 4,24,75,588 Death toll: 5,16,672 pic.twitter.com/hkoKVky685 — ANI (@ANI) March 24, 2022 वहीं, राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 182.23 करोड़ से अधिक खुराक दी गई हैं। उल्लेखनीय है कि देश में सात अगस्त 2020 को संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गई थी। संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गए थे। देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ के पार हो गए थे। पिछले साल चार मई को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी। इस साल 26 जनवरी को मामले चार करोड़ के पार पहुंच गए थे। Read the full article
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