#parivartini ekadashi charity
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narayansevango · 2 months ago
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परिवर्तिनी एकादशी: तिथि, दान का महत्व और नारायण सेवा संस्थान में दान
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परिवर्तिनी एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और दान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व
धार्मिक महत्व: यह एकादशी विशेष इसलिए है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु अपने रूप को बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पाप मोचन: इस दिन व्रत रखने और दान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
धन वृद्धि: मान्यता है कि इस दिन दान करने से धन में वृद्धि होती है और सुख-समृद्धि आती है।
परिवर्तिनी एकादशी पर कौन सा दान करें?
परिवर्तिनी एकादशी पर अन्न, वस्त्र, धन आदि का दान करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से, गरीबों और जरूरतमंदों ��ो भोजन दान करना बहुत पुण्यदायी होता है।
नारायण सेवा संस्थान में दान करें
आप परिवर्तिनी एकादशी के शुभ अवसर पर नारायण सेवा संस्थान में दान करके पुण्य कमा सकते हैं। यह संस्थान जरूरतमंद लोगों की सेवा में लगा हुआ है और आपके दान से कई लोगों का जीवन बदल सकता है।
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shriraghavgaudham011 · 1 year ago
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Ekadashi fast holds an important place in Hindu religion . Every year there are 24 Ekadashis. When Adhikamas or Malamas arrive, their number increases to 26. Parivartini Ekadashi is considered to be the most important Ekadashi fast of all. Charitable acts on Ekadashi are often dedicated to Lord Vishnu, as Ekadashi is considered one of His sacred days. Giving to the less fortunate is seen as an offering to the divine. It's important to note that while charity and acts of giving are emphasized on Ekadashi, the specific customs and traditions may vary among different regions and communities within Hinduism. Lord Vishnu goes into Yoga Nidra from Devshayani Ekadashi and on the Ekadashi of Bhadrapada Shukla Paksha, he changes sides on his Sheshashaiya. The worship and fasting of this Ekadashi is considered especially fruitful.
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