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04.01.2025, लखनऊ | हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पूर्व संरक्षक, महाकवि और गीतों के दरवेश पद्मभूषण (डॉ०) गोपाल दास नीरज जी के जन्मशती वर्ष के अवसर पर "यह नीरज की प्रेम सभा है" कार्यक्रम का भव्य आयोजन हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के संयुक्त तत्वावधान में संत गाडगे प्रेक्षा गृह, संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ में किया गया । मुख्य अतिथि के रूप में श्री दिनेश शर्मा जी, माननीय सांसद एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश ने कार्यक्रम में शिरकत की | जबकि विशिष्ट अतिथि में श्री मुकेश शर्मा जी, माननीय सदस्य, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश, श्री पवन सिंह चौहान जी, माननीय सभापति, वित्तीय एवं प्रशासनिक विलम्ब समिति, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश, श्री राजेश पांडे जी, रिटायर्ड आईपीएस, नोडल अधिकारी, यूपीडा की गरिमामयी उपस्थिति रही । कार्यक्रम की अध्यक्षता आदरणीय श्री अशोक कुमार जी, माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एवं अध्यक्ष, राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उत्तर प्रदेश ने की | अतिथियों को प्रतीक चिन्ह व अंगवस्त्र से सम्मानित किया |
“यह नीरज की प्रेम सभा है” कार्यक्रम के अंतर्गत हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा साहित्य एव संगीत जगत मे अपना अलग मुकाम बनाने वाले 6 प्रबुद्धजनों को सम्मानित किया गया, साथ ही अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, नीरज जी के गीतो पर बांसुरी वादन तथा नृत्य की प्रस्तुति भी की गयी |
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ, तत्पश्चात मुख्य अतिथि श्री दिनेश शर्मा जी, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री अशोक कुमार जी, विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश शर्मा जी, श्री पवन सिंह चौहान जी, श्री राजेश पांडे जी, उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रमुख श्री सर्वेश अस्थाना, श्री मिलन प्रभात 'गुंजन' (नीरज जी के पुत्र), श्री पल्लव नीरज (नीरज जी के पौत्र), हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल और न्यासी डॉ॰ रूपल अग्रवाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा नीरज जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया |
कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि माननीय श्री दिनेश शर्मा जी ने अपने वि��ार व्यक्त करते हुए कहा कि, “मैं हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा को कार्यक्रम "यह नीरज की प्रेम सभा है" आयोजित करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं | आज हम उस महान कवि और व्यक्तित्व को याद कर रहे हैं, जिन्होंने न केवल अपनी काव्य रचनाओं से हमें समृद्ध किया, बल्कि अपनी सादगी, विनम्रता और गहन संवेदनशीलता से हमारे जीवन को प्रेरित किया । महाकवि गोपाल दास 'नीरज' जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । उनकी कविताएँ मानवीय भावनाओं का गहन चित्रण करती थीं । इतने बड़े साहित्यिक व्यक्तित्व के बावजूद, वे अत्यंत साधारण और सहज जीवन जीते थे । मुझे याद है, जब मैं छोटा था, तब अपने पिता जी के साथ नीरज जी को एक कवि सम्मेलन में सुनने गया था । उनकी कविताएँ न केवल मंच पर नई ऊर्जा का संचार करती थीं, बल्कि उन्होंने कवि सम्मेलनों को एक नया स्वरूप भी प्रदान किया । एक बार, मैं गोखले मार्ग स्थित एक घर में उन्हें लेकर स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी से मिलने गया । वह एक अविस्मरणीय क्षण था । लगभग पौने दो घंटे तक हमने नीरज जी और अटल जी की कविताएँ सुनीं । यह दो महान आत्माओं का संगम था । आगे चलकर अटल जी हमारे देश के प्रधानमंत्री बने, लेकिन नीरज जी ने 'कवि हृदय के प्रधानमंत्री' के रूप में हमेशा हमारे दिलों पर राज किया । नीरज जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि चाहे आप कितने ही ऊँचे मुकाम पर क्यों न पहुँच जाएँ, सादगी और विनम्रता ही आपके व्यक्तित्व की सच्ची पहचान है । उनकी कविताएँ आज भी हमें जीवन के गहरे अर्थ समझाने के साथ-साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं ।“
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री अशोक कुमार जी ने कहा कि, ”आज हम महाकवि गोपाल दास 'नीरज' जी को याद कर रहे हैं, जिनके गीतों में अद्भुत कशिश और गहराई थी । उनका गीत "इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में, तुमको लग जाएँगी सदियाँ हमें भुलाने में" सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक भावना है, जो यह बताती है कि सच्चे कलाकार और उनकी कला को भुलाना आसान नहीं होता । नीरज जी के शब्दों में जीवन का यथार्थ, प्रेम, पीड़ा और मानवीय संबंधों का गहन चित्रण था । वे जब मंच पर अपनी रचनाएँ गाते, तो ऐसा लगता था मानो शब्दों में जान आ गई हो । उनकी कविताएँ हमें सिखाती हैं कि साधारण शब्द असाधारण प्रभाव डाल सकते हैं । आइए, उनकी स्मृतियों को सहेजें और उनकी प्रेरणा को अपनी ज़िंदगी में उतारें ।"
श्री राजेश पांडे जी ने कहा कि, “इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान नीरज जी ��े मेरी पहली मुलाकात हुई । उस एक मुलाकात से जो रिश्ता जुड़ा, व�� उनके जीवन के अंत तक बना रहा । नीरज जी के साथ समय बिताना ऐसा लगता था, मानो शब्दों और संवेदनाओं का समंदर हमारे सामने बह रहा हो । उनकी बातों में, उनकी कविताओं में, और उनके व्यक्तित्व में वह जादू था, जो हर किसी को अपना बना लेता था । नीरज जी का जीवन यह सिखाता है कि रिश्ते शब्दों से नहीं, बल्कि दिल से बनाए जाते हैं । उनकी सादगी, उनकी संवेदनशीलता और उनकी काव्य रचनाओं ने हर किसी को प्रभावित किया । चाहे मंच पर उनकी कविताएँ हों या उनके व्यक्तिगत संबंध, हर जगह उन्होंने एक अमिट छाप छोड़ी । उनकी रचनाओं की खासियत यह थी कि वे मानवीय भावनाओं, प्रेम, पीड़ा और जीवन के यथार्थ को इतनी गहराई से व्यक्त करते थे कि हर व्यक्ति खुद को उनसे जुड़ा महसूस करता था । आइए, आज हम नीरज जी की कविताओं और उनके जीवन से प्रेरणा लें । उनके दिखाए मार्ग पर चलें और उनके रिश्तों की तरह अपने जीवन में मधुरता और गहराई लाएँ ।“
हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि, “नीरज जी ने अपने गीतों और मानवतावादी दृष्टिकोण से भारतीय साहित्य में अमिट छाप छोड़ी । उनकी पंक्तियां "एक मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए, जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए ।" हमें आज भी प्रेरित करती हैं । नीरज जी का ट्रस्ट से जुड़ाव हमारी सांस्कृतिक यात्रा का अमूल्य हिस्सा है । उनके आशीर्वाद और मार्गदर्शन ने हमें अनेक साहित्यिक व सामाजिक अभियानों में प्रेरित किया । श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा "गोपाल दास नीरज स्मृति पुरस्कार योजना" के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी और आदरणीय डॉ. दिनेश शर्मा जी का आभार व्यक्त किया । हमारा निवेदन है कि "गोपाल दास नीरज स्मृति पुरस्कार” का वितरण मुख्यमंत्री जी के कर कमलों से किया जाए । यह केवल नीरज जी का नहीं, बल्कि उनके प्रेम, मानवता के संदेश और साहित्य जगत का सम्मान होगा । श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने सभी से अपील करी कि ट्रस्ट को निरंतर सहयोग दें ताकि नीरज जी की स्मृति में और भव्य आयोजन निरंतर किए जा सकें ।“
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष श्री उदय प्रताप सिंह जी ने कहा कि, “हरिवंश राय बच्चन जी के बाद यदि कोई कवि सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली हुआ, तो वह गोपाल दास 'नीरज' जी थे । उनकी ग़ज़लें, भजन और कव्वालियां देखकर यह स्पष्ट होता है कि उनके पास भाषाओं के कितने रंग और विविधता थी । नीरज जी ने हिंदी भाषा की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया । उन्होंने हिंदी को नए आयाम दिए और जन-जन तक पहुँचाया । बावजूद इसके, उनके व्यक्तित्व में कभी अहंकार नहीं आया । उनकी सादगी और विनम्रता आज के कवियों के लिए एक बड़ी सीख है । आइए, हम उनके योगदान को नमन क���ें और उनके जीवन से प्रेरणा लें ।"
नीरज जी के पुत्र श्री मिलन प्रभात "गुंजन" ने कहा कि, “पापा का हर लेख, हर विचार जीवन के उन अनकहे पहलुओं को उजागर करता था, जो आमतौर पर हम नहीं देख पाते । उनकी रचनाओं की विशेषता यह थी कि उन्होंने शब्दों के माध्यम से जीवन की गहराई को हमारे सामने रखा । वे जानते थे कि सच्ची भावनाएँ शब्दों में नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों में होती हैं । यही कारण था कि उनकी लिखाई न केवल समझने में आसान थी, बल्कि वह दिलों को छूने वाली थी । आज हम उनका आदर करते हैं क्योंकि उन्होंने हमें यह सिखाया कि असली कला वह होती है, जो सरलता से दिलों तक पहुँच जाए । आइए, हम उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारे और अपनी लेखनी, विचार और भावनाओं को ऐसी सादगी और गहराई से व्यक्त करें, जैसे उन्होंने किया ।“
नीरज जी के पौत्र श्री पल्लव नीरज ने अपने संबोधन में कहा कि, “बाबा की कविताओं का पाठ करना एक अद्भुत अनुभव था । उनकी रचनाओं में गहराई और सरलता का अद्भुत सामंजस्य था । वे छोटी-छोटी बातों को याद रखते थे और उन्हें अपनी कविताओं में हम तक पहुँचाते थे, जो उनके जीवन जीने के तरीके को दर्शाता है । नीरज जी का व्यक्तित्व और उनकी कविताएँ हमारे दिलों में आज भी जीवित हैं । उनके साथ बिताए हर एक पल की यादें हमेशा हमारे साथ रहेंगी । वे हमारे पास उनके शब्दों और आदर्शों के रूप में हमेशा हैं ।“
विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश शर्मा जी, श्री पवन सिंह चौहान जी तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रमुख श्री सर्वेश अस्थाना जी ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए |
कार्यक्रम के अंतर्गत हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा साहित्य एव संगीत जगत मे अपना अलग मुकाम बनाने वाले 6 प्रबुद्धजनों श्री उदय प्रताप सिंह (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष), डॉ हरिओम (आईएएस), श्री आलोक राज (आईपीएस), श्री सूर्यपाल गंगवार (आईएएस), श्री अखिलेश मिश्रा (आईएएस), श्री पवन कुमार (आईएएस) को प्रतीक चिन्ह व अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया |
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन मे डॉ. विष्णु सक्सेना (हाथरस), डॉ. प्रवीण शुक्ल (दिल्ली), श्री दिनेश रघुवंशी (फरीदाबाद), डॉ. सोनरूपा विशाल (बदायूं), श्री बलराम श्रीवास्तव (मैनपुरी), श्री यशपाल यश (फिरोजाबाद), डॉ. राजीव राज (इटावा), श्री सर्वेश अस्थाना (लखनऊ) ने अपनी कविताएँ प्रस्तुत की :
डॉ. विष्णु सक्सेना जी : “शाख रिश्तों की अगर टूट के झुक जायेगी, प्यार की बहती हुई ये नदी रुक जायेगी, फेंकियेगा ना अगर पास हो पानी गंदा, प्यास चाहे ना बुझे आग तो बुझ जायेगी |"
डॉ. प्रवीण शुक्ल जी : "स्वर तो मौन हुआ है बेशक, पर धुन अब भी गूँज रही है, गीत भवन में काव्य-कामिनी, अपना प्रियतम ढूँढ़ रही है, वो लगते थे बड़े अलग से, कहते थे वो सारे जग से, बूँद-बूँद रस के झरने से पूरा घड़ा भरा करता है, कुछ साँसों के रुक जाने से नीरज ��हीं मरा करता है |”
श्री दिनेश रघुवंशी जी : “मैं हूँ सौभाग्यशाली प्यार जो पाया बुज़ुर्गों का, मुझे ऊँचाइयों तक प्यार ही लाया बुज़ुर्गों का, मेरे ईश्वर मेरी चाहत नहीं इसके सिवा कुछ भी, मेरे सर पर हमेशा ही रहे साया बुज़ुर्गों का |”
डॉ. सोनरूपा विशाल जी : “नैन को रूप की ज़रूरत है, प्यास को कूप की ज़रूरत है, बर्फ़ पिघला सके दिलों की जो, अब तो उस धूप की ज़रूरत है |”
श्री बलराम श्रीवास्तव जी : "घुला जब दर्द पानी में तो आंसू हो गए खारे, ढुलक कर आ गए बाहर हुए हैं नैन से न्यारे, तुम्हारे आंसुओं की भक्ति और अनुरक्ति के आगे, तुम्हारी जीत होती है सदा रहते हैं हम हारे ll”
श्री यशपाल यश जी : “हो जाता हर दर्द हवा है, बन जाता हर गीत दवा है, यहाँ वासना प्रतिबंधित है, यह नीरज की प्रेम सभा है |”
डॉ. राजीव राज जी : "जो साधना से हीन से संगीत नहीं है, सद्भावना विह��न है वो मीत नहीं है, आँसू न जिसका शब्द शब्द चूमने लगे, शब्दों की व्यवस्था है मगर गीत नहीं है ।“
श्री सर्वेश अस्थाना जी : "रिश्तों में तकरार बहुत है, लेकिन इनमें प्यार बहुत है, सारी दुनिया खुश रखने को, बस अपना परिवार बहुत है |”
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का संचालन कवि श्री सर्वेश अस्थाना (लखनऊ) ने किया । श्री राजीव वत्सल ने नीरज जी के गीतो पर बांसुरी वादन प्रस्तुत कर सभी श्रोताओं के दिल मे नीरज जी की यादों को ताजा कर दिया तथा श्रीमती स्नेहा ने नीरज जी के गीतो पर नृत्य कर समा बांध दिया |
कार्यक्रम में विशेष अतिथियों के रूप में श्रीमती मालविका हरिओम श्री मिलन प्रभात 'गुंजन' (नीरज जी के पुत्र), श्री पल्लव नीरज (नीरज जी के पौत्र), कवि श्री सुरेश श्रीवास्तव, हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की आंतरिक सलाहकार समिति के सदस्य श्री महेंद्र भीष्म, श्री पंकज अवस्थी, डॉ अल्का निवेदन, डॉ ऋतु चक्रबोरती, डॉ शिखा श्रीवास्तव, डॉ राधा बिष्ट एवं लखनऊ शहर के गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही |
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CG: 30 मार्च को बिलासपुर में पीएम मोदी की सभा, सुरक्षा के लिए SPG तैनात; दो लाख लोगों की भीड़ जुटाने की तैयारी
पीएम मोदी की सभा के लिए 55 एकड़ निजी जमीन पर पंडाल और रोड बनाया गया है। बिल्हा ब्लॉक के मोहभठ्ठा में प्रधानमंत्री मोदी का एक घंटे का कार्यक्रम है। इस दौरान वे केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों का लोकार्पण करने के साथ ही आधारशिला भी रखेंगे। Source link
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𝐂𝐮𝐫𝐫𝐞𝐧𝐭 𝐀𝐟𝐟𝐚𝐢𝐫𝐬 𝟐𝟕 𝐌𝐚𝐫𝐜𝐡 𝟐𝟎𝟐𝟓 𝐎𝐧𝐞 𝐋𝐢𝐧𝐞𝐫 | Daily One Liner Current Affairs 2025 by The Lucknow Classes
Download Weekly and Monthly Current Affairs PDF From Telegram: 𝐓𝐇𝐄 𝐋𝐔𝐂𝐊𝐍𝐎𝐖 𝐂𝐋𝐀𝐒𝐒𝐄𝐒
1. किस AIIMS में पहली स्वदेशी MRI मशीन स्थापित की जाएगी? - AIIMS दिल्ली
2. हाल ही में, लोक सभा में पास हुए विधेयक के अनुसार, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय किस राज्य में खोला जाएगा? - गुजरात के आणंद
3. कौन सा मंत्रालय नई दिल्ली में वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी का 12वां चरण लॉन्च करेगा? - कोयला मंत्रालय
4. रामेश्वरम मंदिर भारत के किस राज्य में स्थित है जहां प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 6 अप्रैल 2025 को नए पम्बन पुल का उद्घाटन किया जाएगा? - तमिलनाडु
5. किस भारतीय पहलवान ने अम्मान, जॉर्डन में एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता है? - सुनील कुमार
6. हाल ही में, किस देश ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है? - पपुआ न्यू गिनी
7. हाल ही में, बांग्लादेश ने अपना स्वतन्त्रता दिवस मनाया है, बांग्लादेश किस वर्ष में आजाद हुआ था? - 1971
8. किस मंत्रालय ने हाल ही में "बालपन की कविता" नामक पहल शुरू की? - शिक्षा मंत्रालय
1. In which AIIMS will the first indigenous MRI Machine be installed? - AIIMS Delhi
2. Recently, according to the bill passed in the Lok Sabha, in which state will Tribhuvan Sahkari University be opened? - Gujarat
3. Which ministry will launch the 12th tranche of commercial coal mine auctions in New Delhi? - Ministry of Coal
4. In which state of India is Rameswaram Temple located, where Prime Minister Modi will inaugurate the new Pamban bridge on 6 April 2025? - Tamil Nadu
5. Which Indian wrestler has won a Bronze Medal at the Asian Wrestling Championship in Amman, Jordan? - Sunil Kumar
6. Recently, which country has temporarily closed social media platform Facebook? - Papua New Guinea
7. Recently, Bangladesh celebrated its Independence Day. In which year did Bangladesh become independent? - 1971
8. Which ministry recently launched the initiative called "Balpan Ki Kavita"? - Ministry of Education
#currentaffairs27march2025 #thelucknowclasses
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किसानों और बागबानों का कल्याण सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता, सीएम सुक्खू बोले, किसानों को उजड़ने नहीं देंगे
Himachal News: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को चौड़ा मैदान में हिमाचल प्रदेश किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल से बात की। इस अवसर पर किसान सभा की ओर से ��ूर्व विधायक राकेश सिंघा ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। उन्होंने कहा कि किसानों और बागबानों का कल्याण सुनिश्चित करना वर्तमान राज्य…
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Regional Marathi Text Bulletin, Chhatrapati Sambhajinagar
Date – 08 March 2025
Time 7.10 AM to 7.20 AM
Language Marathi
आकाशवाणी छत्रपती संभाजीनगर
प्रादेशिक बातम्या
दिनांक ०८ मार्च २०२५ सकाळी ७.१० मि.
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आज जागतिक महिला दिनानिमित्त सर्वत्र विविध कार्यक्रमांचं आयोजन
शासकीय योजना महिलांपर्यंत पोहोचवण्यासाठी राज्यसरकार आदिशक्ती ���मिती स्थापन करणार
राज्याच्या आर्थिक पाहणी अहवालात विकास दर सात पूर्णांक तीन टक्के राहण्याची शक्यता
महापुरूषांची बदनामी करणाऱ्यांविरोधातला कायदा चालू अधिवेशनात मंजूर करावा-खासदार उदयनराजे भोसले यांची मागणी
आणि
छत्रपती संभाजीनगरच्या मिनाक्षी बिराजदार यांना ज्ञानज्योती सावित्रीबाई फुले पुरस्कार जाहीर तर राष्ट्रीय युवा पुरस्कारासाठी हिंगोलीच्या पुष्यमित्र जोशी यांची निवड
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जागतिक महिला दिन आज साजरा होत आहे. यंदाचा जागतिक महिला दिन 'नारी शक्ती सह विकसित भारत' या संकल्पनेनुसार साजरा करण्यात येत आहे. राष्ट्रपती द्रौपदी मुर्मू तसंच पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी आंतरराष्ट्रीय महिला दिनानिमित्त शुभेच्छा दिल्या आहेत.
गुजरातच्या नवसारी जिल्ह्यात आज आयोजित लखपती दीदी कार्यक्रमात पंतप्रधान, लखपती दीदींशी संवाद साधणार आहेत. पंतप्रधानांच्या हस्ते या कार्यक्रमात प्रातिनिधिक स्वरुपात ५ लखपति दीदींना प्रमाणपत्रं देऊन सन्मानित करण्यात येणार आहे.
नवी दिल्लीत राष्ट्रपतींच्या उपस्थितीत एका परिसंवादाचं आयोजन करण्यात आलं आहे.
राष्ट्रीय महिला आयोगाच्या वतीनं आज दिल्लीत अखिल भारतीय महिला अधिवक्ता परिषद आयोजित करण्यात आली आहे. विकसित भारतासाठी महिलांच्या वाढलेल्या भूमिकेसंदर्भात या परिषदेत चर्चा होणार असल्याचं, आयोगाच्या अध्यक्ष विजया रहाटकर यांनी सांगितलं आहे. देशभरातून सुमारे एक हजार महिला वकील या परिषदेत सहभागी होणार आहेत.
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आंतरराष्ट्रीय महिला दिन आणि पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर यांच्या त्रिजन्मशताब्दी वर्षानिमित्त काल विधीमंडळात ‘महिलांच्या शाश्वत विकासाची उद्दिष्टे आणि सक्षमीकरण’ या विषयावर ��िशेष चर्चा झाली, विधान परिषदेत उपसभापती डॉ नीलम गोऱ्हे, उ��मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, विरोधी पक्षनेते अंबादास दानवे, पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे, प्रज्ञा सातव, चित्रा वाघ, मनिषा कायंदे, भावना गवळी, गटनेते प्रवीण दरेकर यांच्यासह इतर सदस्यांनी या चर्चेत सहभाग घेतला.
विधानसभेत झालेल्या चर्चेत मनिषा चौधरी, सरोज अहिरे, अनुराधा चव्हाण आणि इतर महिला सदस्यांसह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी सहभाग घेतला.
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महिला आणि बालविकास मंत्री आदिती तटकरे यांनी या चर्चेला उत्तर दिलं, राज्य शासनाच्या विविध योजना महिलांपर्यंत पोहोचवण्यासाठी ग्रामस्तरावर आदिशक्ती समिती या नावाने महिलांची एक विशेष समिती स्थापन करण्यात येईल अशी माहिती तटकरे यांनी दिली.
दरम्यान, राज्यातील प्रत्येक ग्रामपंचायतीमध्ये विशेष ग्राम सभा आयोजित करण्यात येणार असल्याचंही तटकरे यांनी सांगितलं.
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जागतिक महिला दिनानिमित्त सर्वत्र विविध उपक्रम घेण्यात येत आहे. नांदेड जिल्ह्यात विविध क्षेत्रात उत्कृष्ट कार्य करणाऱ्या महिलांचा सन्मान करण्यात येणार आहे.
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परभणी इथल्या वसंतराव नाईक मराठवाडा कृषी विद्यापीठात काल विशेष कार्यक्रम घेण्यात आला. कृषी विद्यापीठात शिक्षण घेणाऱ्या महिलांची वाढती संख्या हे महिला परिवर्तनापेक्षाही काळाचं परिवर्तन असल्याचं मत कुलगुरू डॉ इंद्र मणी यांनी व्यक्त केलं.
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हिंगोली जिल्ह्यातल्या अंगणवाडी पर्यवेक्षिका, अंगणवाडी सेविका आणि मदतनीस यांचा जिल्हाधिकारी अभिनव गोयल यांच्या हस्ते काल सत्कार करण्यात आला.
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बीड इथं आज प्रसिद्ध उद्याोगांच्या वतीनं महिलांसाठी विशेष रोजगार मेळावा होणार आहे.
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छत्रपती संभाजीनगर जिल्हाधिकारी कार्यालयात महिला अधिकारी - कर्मचाऱ्यांची काल आरोग्य तपासणी करण्यात आली. पाणी, स्वच्छता, आणि आरोग्य क्षेत्रात योगदान देणाऱ्या महिलांचा आज जिल्हा परिषद आणि ग्रामविकास संस्थेच्या सहकार्याने सत्कार केला जाणार आहे.
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आकाशवाणीकडूनही महिला दिन अभिनव प्रकारात साजरा केला जात आहे, वृत्तविभागाची आज दिवसभरातली बहुतांश बातमीपत्रं आणि इतर कार्यक्रम महिला निवेदक सादर करणार आहेत.
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जागतिक महिला दिनानिमित्त मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी महिलांना शुभेच्छा देताना "लाडकी बहीण योजना" बंद होणार नसल्याचा पुनरुच्चार केला आहे.
दरम्यान, लाडकी बहीण योजनेअंतर्गत फेब्रुवारी तसंच मार्च महिन्याचा प्रत्येकी दीड हजार रुपयांचा हप्ता जमा करण्याची प्रक्रिया सुरू झाली आहे. महिला आणि बालकल्याण मंत्री आदिती तटकरे यांनी ही माहिती दिली. त्या म्हणाल्या..
बाईट – आदिती तटकरे
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प्रशासकीय कामकाजात नवी संस्कृती रु��वण्याचा सरकारचा प्रयत्न असल्याचं प्रतिपादन, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी केलं आहे. ते काल विधानसभेत राज्यपालांच्या अभिभाषणाच्या आभार प्रस्तावावर बोलत होते. प्रत्येक विभागाला शंभर दिवसांत कामकाजाचं उद्दीष्ट दिलेलं असून, उत्तम काम करणाऱ्या अधिकाऱ्यांचा एक मे रोजी सत्कार करणार असल्याचं मुख्यमंत्र्यांनी सांगितलं. जनतेने भरघोस मतदान करून जो विश्वास दाखवला, त्या विश्वासाला अनुरुप असं काम राज्य सरकार करत असल्याचं, मुख्यमंत्र्यांनी नमूद केलं. ते म्हणाले...
बाईट – मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
राज्यात चालू आर्थिक वर्षात आतापर्यंत १ लाख ३९ हजार कोटी रुपयांची गुंतवणूक झाल्याचं, मुख्यमंत्री फडणवीस यांनी सांगितलं. प्रधानमंत्री मोफत सूर्यघर योजनेच्या धर्तीवर राज्य सरकार नवी योजना आणत असून, शंभर युनिट पर्यंत वीज वापरणाऱ्या दीड कोटी ग्राहकांना घराच्या छतावर सौर पॅनल बसवता येतील, असं मुख्यमंत्र्यांनी सांगितलं. राज्यात १०० ते ३०० युनिट वीज वापरणाऱ्या ग्राहकांसाठी वीज दर १७ टक्क्यांनी कमी केले जात आहेत तसंच स्मार्ट मीटर बसवल्यास, दिवसाच्या वीज वापरावर १० टक्के सवलत मिळेल, असं मुख्यमंत्र्यांनी सांगितलं. प्रीपेड मीटर ऐच्छिक असून ग्राहकांना पोस्टपेड मीटरचा पर्याय उपलब्ध असेल, अशी माहिती त्यांनी दिली. शक्तिपीठ महामार्गासाठी भूमीअधिग्रहण लवकरच सुरू करणार असल्याचं फडणवीस यांनी सांगितलं.
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विधान परिषदेत उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी या आभार प्रस्तावाच्या चर्चेला उत्तर दिलं. महायुतीच्या नव्या सरकारची सुरूवात दमदार झाली असून, पहिल्या अर्थसंकल्पामध्ये त्याचं प्रतिबिंबही दिसेल, असं सांगत, आपल्याला दुप्पट वेगाने आणि चौपट क्षमतेने राज्याचा विकास करायचा असून विरोधकांनी विकास यात्रेत सहभागी व्हावं असं आवाहन शिंदे यांनी केलं.
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उपमुख्यमंत्री तथा अर्थमंत्री अजित पवार यांनी राज्याचा वर्ष २०२४-२५ चा आर्थिक पाहणी अहवाल काल सादर केला. चालू आर्थिक वर्षात राज्याचा विकास दर सात पूर्णांक तीन दशांश टक्के राहण्याची शक्यता या अहवालात वर्तवण्यात आली असून, राज्याचं दरडोई उत्पन्न ११ टक्क्यांनी वाढून तीन लाख ९ हजार ३४० रुपये होण्याचा अंदाज वर्तवण्यात आला आहे.
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महापुरुषांची बदनामी करणाऱ्यांवर कडक शिक्षेची तरतूद असलेला कायदा विधानसभेच्या चालू अधिवेशनात मंजूर करावा अशी मागणी खासदार उदयनराजे भोसले यांनी केली आहे. ते काल सातारा इथं पत्रकार परिषदेत बोलत होते. या कायद्यात दोषीला किमान दहा वर्षाची शिक्षा आणि मोठ्या दंडाची तरतूद केली जावी, अशी मागणीही त्यांनी यावेळी केली.
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साहित्य अकादमीचा मराठी भाषांतरासाठीचा वर्ष २०२४ चा पुरस्कार सुदर्शन आठवले यांना जाहीर झाला आहे. गुरुचरण दास यांच्या 'द डिफिकल्टी ऑफ बीइंग गु��' या इंग्रजी पुस्तकाचं त्यांनी भाषांतर केलं आहे. ५० हजार रुपये आणि ताम्रपट असं या पुरस्काराचं स्वरुप आहे.
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राज्य शासनाचे २०२२-२३ वर्षाचे ज्ञानज्योती सावित्रीबाई फुले पुरस्कार काल जाहीर करण्यात आले आहे. यात छत्रपती संभाजीनगरच्या सोयगाव तालुक्यातल्या मिनाक्षी बिराजदार यांच्यासह राज्याच्या पाच विभागातल्या प्रत्येकी एका महिलेचा समावेश आहे.
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केंद्र शासनाच्या युवक कल्याण आणि क्रीडा मंत्रालयातर्फे दिल्या जाणाऱ्या राष्ट्रीय युवा पुरस्कारासाठी हिंगोली जिल्ह्यातल्या पुष्यमित्र जोशी या युवकाची निवड झाली आहे. पुष्यमित्र हा संशोधक, नवोपक्रमकर्ता, लेखक आणि धोरण सल्लागार म्हणून ओळखला जातो. त्याच्या तीन संशोधनांना केंद्र सरकारचं पेटंट मिळालेलं आहे.
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छत्रपती संभाजीनगर इथं डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाडा विद्यापीठात काल संविधान गौरव महोत्सव साजरा झाला. मुंबई उच्च न्यायालयाचे माजी न्यायमूर्ती अंबादास जोशी यांनी या महोत्सवात मार्गदर्शन करतांना, समाजाने परस्परांच्या हक्काचं रक्षण केलं, तर न्यायालयात जाण्याची वेळच येणार नाही, अशी आशा व्यक्त केली.
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जालना जिल्ह्यातल्या परतूर इथल्या तहसीलदार प्रतिभा गोरे यांच्या वाहनावर हल्ला प्रकरणी सहा संशयितांविरुध्द परतूर पोलीस ठाण्यात गुन्हा दाखल करण्यात आला आहे. गुरुवारी रात्री उशीरा ही घटना घडली होती.
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Jamshedpur jugsalai mla mangal kalinda : छोटाबांकी डैम के सौंदर्याकरण का विषय विधायक मंगल कालिंदी ने सदन में उठाया, कल्पना सोरेन को दी जन्मदिन की बधाई
जमशेदपुर : झारखण्ड विधान सभा के द्वितीय (बजट) सत्र के शून्यकाल के दौरान जुगशालाई विधायक मंगल कालिंदी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जुगसलाई विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत जमशेदपुर प्रखण्ड के पलासबनी पंचायत में “छोटाबांकी डैम” सुन्दर वादियों के बीच अवस्थित है. यहां झारखण्ड राज्य के साथ-साथ अन्य राज्यों के भी पर्यटक आते है परन्तु उक्त डैम के सौंदर्याकरण, डैम तक पहुंच पथ का चौड़ीकरण तथा पर्यटकों के ठहरने एवं…
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From Billionaire to President: Donald Trump’s Life Story

Introduction
Donald Trump Political Journey : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जितने शक्तिशाली व्यक्ति हैं उतने ही बड़े एक सफल उद्योगपति भी रहे हैं. राजनीति में कदम रखने से पहले ट्रंप एक रियल स्टेट कारोबारी भी रह चुके हैं और उनके पिता भी एक मशहूर प्रॉपर्टी डीलर थे. बचपन में काफी चंचल होने की वजह से उन्हें 13 साल की उम्र में सैन्य स्कूल में एडमिशन करा दिया और उसके उनके पिता की मौत के बाद ट्रंप ने सबसे पहले बिजनेस सं��ाला. वहीं, धीरे-धीरे उन्होंने इस बिजनेस को अमेरिका के बाहर भी विस्तार देना शुरू कर दिया.
Table Of Content
कैसा रहा शुरुआती जीवन?
चर्चाओं और विवादों में ऐसे आए ट्रंप
कैसे बने ट्रंप रियल एस्टेट के कारोबारी?
पहले राजनीति से नफरत, फिर राष्ट्रपति बने
ट्रंप के साथ जुड़ा सबसे बड़ा विवाद
डोनाल्ड ट्रंप स्कूल के समय से ही काफी आक्रामक थे और यह वजह थी कि उनके खिलाफ स्कूल से पिता फ्रेड ट्रंप के पास काफी शिकायतें जाती थीं. ट्रंप बचपन में अपने बैच के स्टूडेंट्स को बुली भी किया करते थे और इन्हीं सभी शैतानियों को देखते हुए फ्रेड ट्रंप ने उनका एडमिशन मिलिट्री स्कूल में करा दिया था और उस समय डोनाल्ड ट्रंप की उम्र मात्र 13 वर्ष ही थी. मिलिट्री स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने के बाद ट्रंप फोर्डहम यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए एडमिशन लिया. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी चले गए. उन्होंने रियल स्टेट प्रोग्राम को अपना सब्जेक्ट चुना और इसमें अपने आपको विशेषज्ञ बनाने के लिए तेजी से काम किया.
इसी कड़ी में उन्होंने साल 1968 में इकोनॉमिक साइंस में भी डिग्री प्राप्त की और इसके बाद अपने पिता का पारंपरिक बिजनेस प्रॉपर्टी डीलर का काम संभाल लिया. लेकिन कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने प्रॉप्रर्टी डीलर का बिजनेस संभालने से पहले अपने पिता से 1 मिलियन डॉलर उधार लेकर रियल एस्टेट का बिजनेस किया और जब फ्रेड ट्रंप की मौत हो गई तो उसके बाद 47वें राष्ट्रपति ने प्रॉपर्टी डीलर की कमान अपने हाथों में ले ली.
कैसा रहा शुरुआती जीवन?
चर्चाओं और विवादों में ऐसे आए ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप लगातार सार्वजनिक मंचों से अपनी संपत्ति और सफलता का हर वक्त बखान करने लगे थे. इसके अलावा मैक्सिको पर आरोप लगाया था कि वह अमेरिका में नशीले पदार्थ, दुष्कर्मियों और अपराध को ट्रांसफर कर कर रहा है. साथ ही हर रैली में जनता के बीच वादा करने लगे कि वह संयुक्त राज्य की सीमाओं पर दीवार बनाने में आने वाली लागत को मैक्सिको से वसूलेंगे. वहीं, बर्थरिज्म नाम से एक एक थ्योरी है जिसके माध्यम से डोनाल्ड ट्रंप ने सवाल खड़ा किया कि क्या बराक ओबामा अमेरिका में पैदा हुए हैं? इसके बाद डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन ने उनकी आलोचना की और एक सभा में ट्रंप की प्रतिक्रिया पर निराशा व्यक्त की.
इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी इतिहास के सबसे विवादित राष्ट्रपति हैं जिन पर कई मुकदमे दर्ज हैं और उनमें से एक हश मनी केस में दोषी भी पाए गए हैं. मामला यह है कि ट्रंप ने एडल्ट फिल्म स्टार स्टॉर्मी डेनियल को चुप रहने के लिए 1,30,000 डॉलर दिए थे ताकि वह अपने और ट्रंप के बीच शारीरिक संबंध को लेकर कोई भी सूचना सार्वजनिक न करें. बता दें कि हश मनी को चुप रहने के लिए पैसा देना कोई गैर-कानूनी नहीं है बल्कि उन्होंने अपने रिकॉर्ड में बिजनेस खर्चा बताया था.
कैसे बने ट्रंप रियल एस्टेट के कारोबारी?
रियल एस्टेट के शुरुआती काम को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पिता से सीखा था. इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपने पिता के प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू दिया और देश-विदेश के क्लाइंट्स से बातचीत भी शुरू कर दी. साथ ही न्यूयॉर्क शहर में रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स का प्रबंधन पर भी काम किया. वहीं, पिता की मृत्यु के बाद ट्रंप ने सारा बिजनेस अपने हाथों में ले लिया और साल 1971 में उन्होंने ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन की शुरुआत की. इस दौरान उन्होंने ट्रंप टावर बनवाया जो वहां पर रियल एस्टेट कारोबार के क्षेत्र में काफी मशहूर है. वहीं, ट्रंप ने समय बीतने के साथ ही इस बिजनेस को अमेरिका के बाहर भारत, फिलीपींस और तुर्की में फैलाना शुरू कर दिया. साथ ही ट्रंप टॉवर ऑर्गेनाइजेशन ने होटल्स, गोल्फ कोर्स और कैसिनो का निर्माण करना भी शुरू कर दिया.
पहले राजनीति से नफरत, फिर राष्ट्रपति बने
साल 1980 की बात है जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक इंटरव्यू में राजनीति को सबसे ज्यादा ‘स्वार्थी जीवन’ बताया था. उस दौरान उन्होंने कहा था कि दुनिया में सबसे ज्यादा सक्षम व्यक्ति राजनीति की जगह बिजनेस का चयन करते हैं. हालांकि, 1987 तक आते-आते उन्होंने राष्ट्र्पति पद की उम्मीदवारी के लिए प्रचार करना शुरू कर दिया. उन्होंने अपनी एक रिफॉर्म पार्टी बनाई और राजनीतिक क्षेत्र में कदम रखा. वहीं, साल 2012 में वह रिपब्लिकन उम्मीदवार के रूप में लोगों के सामने आए. इसके बाद 9 नवम्बर 2016 को अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव जीतने में कामयाब रहे.
ट्रंप के साथ जुड़ा सबसे बड़ा विवाद
अमेरिका में 46वें राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए जो बाइडेन को 306 और डोनाल्ड ट्रम्प को 232 सीटें मिली थीं. इसके बाद भी ट्रंप ने अपनी को नहीं माना था और उस वक्त उनका कहना था कि चुनाव के दौरान धांधली हुई है. ट्रंप ने उस समय कई राज्यों में केस दर्ज कराए लेकिन ट्रंप के समर्थकों की अपील खारिज कर दी गई. दो मामलों में तो सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी थी. लेकिन वह लगातार इशारों ही इशारों में जिक्र करते रहे थे कि अगर चुनाव में नतीजे निष्पक्ष नहीं आए तो कुछ गलत हो सकता है. इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने सुरक्षा एजेंसियों को गच्चा देते हुए अमेरिकी संसद पर चढ़कर हिंसा शुरू कर दी और इस घटना की इतिहासकारों, राजनीतिक जानकारों और बौद्धिक लोगों ने जमकर आलोचना की कि लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं और चुनाव मैदान में राजनीतिक दल अपना मुद्दा लेकर जाते हैं.
इसके बाद जनता किसे स्वीकार करती है और किसे नकारती है उस फैसले को वह अपने वोट के माध्यम से बता देती है. वहीं, जनता की आवाज किस पार्टी को बहुमत मे लाती है और विपक्ष को बैठाना चाहती है उसे सभी राजनीतिक दलों को स्वीकार करना चाहिए. लेकिन देश की सर्वोच्चा संस्था पर हमला करना देश का अपमान तो है ही साथ ही वर्षों पुरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था का भी अपमान है. उस दौरान कैपिटल हिस्टोरिकल सोसाइटी के डायरेक्टर सैम्युअल हॉलिडे ने कहा था कि 24 अगस्त, 1814 में ब्रिटेन ने अमेरिका पर हमला कर दिया था. अमेरिकी सैनिकों को हराने के बाद ब्रिटिश सैनिकों ने कैपिटल हिल्स पर चढ़ाई की और वहां पर आग लगा दी. तब से लेकर 206 साल बाद 2021 में अमेरिकी संसद पर ऐसा हमला हुआ है.
Conclusion
डोनाल्ड ट्रंप ने 47वें अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है और उन्होंने अपने ऑफिस में कदम रखते ही जो बाइडेन के कई फैसलों को बदल दिया है. वहीं, इससे पहले वह साल 2017 से 2021 तक भी अमेरिका के राष्ट्रपति रहे उस दौरान उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यही रही थी कि उनके कार्यकाल के दौरान विश्व के किसी भी हिस्से में कोई बड़ा युद्ध नहीं हुआ था, जैसे की बाइडेन प्रशासन के कार्यकाल में रूस-यूक्रेन और फिलिस्तीन-इजराइल के बीच में चला है.
लेकिन ट्रंप के साथ कई सारे विवाद भी जुड़े हैं जिनमें से कई तो आज भी उनका पीछा नहीं छोड़ रहे हैं. सबसे मुख्य विवाद हश मनी केस रहा है जिसके मामले में उन्हें दोषी तक ठहरा दिया गया है. लेकिन कोर्ट ने अभी सजा का एलान करने से मना कर दिया है एक समय तो चर्चा होने लगी थी कि अगर डोनाल्ड ट्रंप को इस मामले में सजा मिल जाती है तो उनका राष्ट्रपति पद पर पहुंचना मुश्किल हो जाएगा. हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह से पहले कोर्ट ने उन्हें दोषी तो ठहरा दिया, लेकिन सजा नहीं दी. लेकिन उससे पहले दुनिया में चर्चा तेज होने लगी कि ट्रंप का शपथ ग्रहण समारोह का क्या होगा? क्या वह राष्ट्रपति बन पाएंगे? लेकिन कोर्ट ने उनकी सजा को फिलहाल टाल दिया.
इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप राजनीतिक क्षेत्र को भी अच्छा नहीं मानते थे लेकिन वह एक नहीं दो बार अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक प्रोपर्टी डीलर के रूप में की थी और उसको पूरे देश में फैलाने के बाद विदेश में लेकर गए जहां पर उन्होंने इस क्षेत्र पर दबदबा बना लिया. लेकिन साल 1987 में उन्होंने राजनीतिक क्षेत्र में आने का प्रयास किया और एक पार्टी बना ली. हालांकि उस दौरान उनको ज्यादा कामयाबी नहीं मिली लेकिन उनको जनता के बीच में पहचान मिलने लगी. इसके बाद वह धीरे-धीरे अपने कदम आगे बढ़ाने लगे और साल 2012 में रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हो गए और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो गए. डोनाल्ड ट्रंप ने धीरे-धीरे पार्टी के नेताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर ली और साल 2015 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी का दावा पेश कर दिया और साल 2016 में 45वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली.
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पद्मभूषण (डॉ) गोपाल दास नीरज | जन्मशती | यह नीरज की प्रेम सभा है | डॉ सुरेश श्रीवास्तव
04.01.2025, लखनऊ | हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पूर्व संरक्षक, महाकवि और गीतों के दरवेश पद्मभूषण (डॉ०) गोपाल दास नीरज जी के जन्मशती वर्ष के अवसर पर "यह नीरज की प्रेम सभा है" कार्यक्रम का भव्य आयोजन हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के संयुक्त तत्वावधान में संत गाडगे प्रेक्षा गृह, संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ में किया गया । मुख्य अतिथि के रूप में श्री दिनेश शर्मा जी, माननीय सांसद एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश ने कार्यक्रम में शिरकत की | जबकि विशिष्ट अतिथि में श्री मुकेश शर्मा जी, माननीय सदस्य, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश, श्री पवन सिंह चौहान जी, माननीय सभापति, वित्तीय एवं प्रशासनिक विलम्ब समिति, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश, श्री राजेश पांडे जी, रिटायर्ड आईपीएस, नोडल अधिकारी, यूपीडा की गरिमामयी उपस्थिति रही । कार्यक्रम की अध्यक्षता आदरणीय श्री अशोक कुमार जी, माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एवं अध्यक्ष, राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उत्तर प्रदेश ने की | अतिथियों को प्रतीक चिन्ह व अंगवस्त्र से सम्मानित किया |
“यह नीरज की प्रेम सभा है” कार्यक्रम के अंतर्गत हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा साहित्य एव संगीत जगत मे अपना अलग मुकाम बनाने वाले 6 प्रबुद्धजनों को सम्मानित किया गया, साथ ही अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, नीरज जी के गीतो पर बांसुरी वादन तथा नृत्य की प्रस्तुति भी की गयी |
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ, तत्पश्चात मुख्य अतिथि श्री दिनेश शर्मा जी, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री अशोक कुमार जी, विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश शर्मा जी, श्री पवन सिंह चौहान जी, श्री राजेश पांडे जी, उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रमुख श्री सर्वेश अस्थाना, श्री मिलन प्रभात 'गुंजन' (नीरज जी के पुत्र), श्री पल्लव नीरज (नीरज जी के पौत्र), हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल और न्यासी डॉ॰ रूपल अग्रवाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा नीरज जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया |
कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि माननीय श्री दिनेश शर्मा जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, “मैं हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा को कार्यक्रम "यह नीरज की प्रेम सभा है" आयोजित करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं | आज हम उस महान कवि और व्यक्तित्व को याद कर रहे हैं, जिन्होंने न केवल अपनी काव्य रचनाओं से हमें समृद्ध किया, बल्कि अपनी सादगी, विनम्रता और गहन संवेदनशीलता से हमारे जीवन को प्रेरित किया । महाकवि गोपाल दास 'नीरज' जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । उनकी कविताएँ मानवीय भावनाओं का गहन चित्रण करती थीं । इतने बड़े साहित्यिक व्यक्तित्व के बावजूद, वे अत्यंत साधारण और सहज जीवन जीते थे । मुझे याद है, जब मैं छोटा था, तब अपने पिता जी के साथ नीरज जी को एक कवि सम्मेलन में सुनने गया था । उनकी कविताएँ न केवल मंच पर नई ऊर्जा का संचार करती थीं, बल्कि उन्होंने कवि सम्मेलनों को एक नया स्वरूप भी प्रदान किया । एक बार, मैं गोखले मार्ग स्थित एक घर में उन्हें लेकर स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी से मिलने गया । वह एक अविस्मरणीय क्षण था । लगभग पौने दो घंटे तक हमने नीरज जी और अटल जी की कविताएँ सुनीं । यह दो महान आत्माओं का संगम था । आगे चलकर अटल जी हमारे देश के प्रधानमंत्री बने, लेकिन नीरज जी ने 'कवि हृदय के प्रधानमंत्री' के रूप में हमेशा हमारे दिलों पर राज किया । नीरज जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि चाहे आप कितने ही ऊँचे मुकाम पर क्यों न पहुँच जाएँ, सादगी और विनम्रता ही आपके व्यक्तित्व की सच्ची पहचान है । उनकी कविताएँ आज भी हमें जीवन के गहरे अर्थ समझाने के साथ-साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं ।“
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री अशोक कुमार जी ने कहा कि, ”आज हम महाकवि गोपाल दास 'नीरज' जी को याद कर रहे हैं, जिनके गीतों में अद्भुत कशिश और गहराई थी । उनका गीत "इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में, तुमको लग जाएँगी सदियाँ हमें भुलाने में" सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक भावना है, जो यह बताती है कि सच्चे कलाकार और उनकी कला को भुलाना आसान नहीं होता । नीरज जी के शब्दों में जीवन का यथार्थ, प्रेम, पीड़ा और मानवीय संबंधों का गहन चित्रण था । वे जब मंच पर अपनी रचनाएँ गाते, तो ऐसा लगता था मानो शब्दों में जान आ गई हो । उनकी कविताएँ हमें सिखाती हैं कि साधारण शब्द असाधारण प्रभाव डाल सकते हैं । आइए, उनकी स्मृतियों को सहेजें और उनकी प्रेरणा को अपनी ज़िंदगी में उतारें ।"
श्री राजेश पांडे जी ने कहा कि, “इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान नीरज जी से मेरी पहली मुलाकात हुई । उस एक मुलाकात से जो रिश्ता जुड़ा, वह उनके जीवन के अंत तक बना रहा । नीरज जी के साथ समय बिताना ऐसा लगता था, मानो शब्दों और संवेदनाओं का समंदर हमारे सामने बह रहा हो । उनकी बातों में, उनकी कविताओं में, और उनके व्यक्तित्व में वह जादू था, जो हर किसी को अपना बना लेता था । नीरज जी का जीवन यह सिखाता है कि रिश्ते शब्दों से नहीं, बल्कि दिल से बनाए जाते हैं । उनकी सादगी, उनकी संवेदनशीलता और उनकी काव्य रचनाओं ने हर किसी को प्रभावित किया । चाहे मंच पर उनकी कविताएँ हों या उनके व्यक्तिगत संबंध, हर जगह उन्होंने एक अमिट छाप छोड़ी । उनकी रचनाओं की खासियत यह थी कि वे मानवीय भावनाओं, प्रेम, पीड़ा और जीवन के यथार्थ को इतनी गहराई से व्यक्त करते थे कि हर व्यक्ति खुद को उनसे जुड़ा महसूस करता था । आइए, आज हम नीरज जी की कविताओं और उनके जीवन से प्रेरणा लें । उनके दिखाए मार्ग पर चलें और उनके रिश्तों की तरह अपने जीवन में मधुरता और गहराई लाएँ ।“
हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि, “नीरज जी ने अपने गीतों और मानवतावादी दृष्टिकोण से भारतीय साहित्य में अमिट छाप छोड़ी । उनकी पंक्तियां "एक मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए, जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए ।" हमें आज भी प्रेरित करती हैं । नीरज जी का ट्रस्ट से जुड़ाव हमारी सांस्कृतिक यात्रा का अमूल्य हिस्सा है । उनके आशीर्वाद और मार्गदर्शन ने हमें अनेक साहित्यिक व सामाजिक अभियानों में प्रेरित किया । श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा "गोपाल दास नीरज स्मृति पुरस्कार योजना" के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी और आदरणीय डॉ. दिनेश शर्मा जी का आभार व्यक्त किया । हमारा निवेदन है कि "गोपाल दास नीरज स्मृति पुरस्कार” का वितरण मुख्यमंत्री जी के कर कमलों से किया जाए । यह केवल नीरज जी का नहीं, बल्कि उनके प्रेम, मानवता के संदेश और साहित्य जगत का सम्मान होगा । श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने सभी से अपील करी कि ट्रस्ट को निरंतर सहयोग दें ताकि नीरज जी की स्मृति में और भव्य आयोजन निरंतर किए जा सकें ।“
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष श्री उदय प्रताप सिंह जी ने कहा कि, “हरिवंश राय बच्चन जी के बाद यदि कोई कवि सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली हुआ, तो वह गोपाल दास 'नीरज' जी थे । उनकी ग़ज़लें, भजन और कव्वालियां देखकर यह स्पष्ट होता है कि उनके पास भाषाओं के कितने रंग और विविधता थी । नीरज जी ने हिंदी भाषा की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया । उन्होंने हिंदी को नए आयाम दिए और जन-जन तक पहुँचाया । बावजूद इसके, उनके व्यक्तित्व में कभी अहंकार नहीं आया । उनकी सादगी और विनम्रता आज के कवियों के लिए एक बड़ी सीख है । आइए, हम उनके योगदान को नमन करें और उनके जीवन से प्रेरणा लें ।"
नीरज जी के पुत्र श्री मिलन प्रभात "गुंजन" ने कहा कि, “पापा का हर लेख, हर विचार जीवन के उन अनकहे पहलुओं को उजागर करता था, जो आमतौर पर हम नहीं देख पाते । उनकी रचनाओं की विशेषता यह थी कि उन्होंने शब्दों के माध्यम से जीवन की गहराई को हमारे सामने रखा । वे जानते थे कि सच्ची भावनाएँ शब्दों में नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों में होती हैं । यही कारण था कि उनकी लिखाई न केवल समझने में आसान थी, बल्कि वह दिलों को छूने वाली थी । आज हम उनका आदर करते हैं क्योंकि उन्होंने हमें यह सिखाया कि असली कला वह होती है, जो सरलता से दिलों तक पहुँच जाए । आइए, हम उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारे और अपनी लेखनी, विचार और भावनाओं को ऐसी सादगी और गहराई से व्यक्त करें, जैसे उन्होंने किया ।“
नीरज जी के पौत्र श्री पल्लव नीरज ने अपने संबोधन में कहा कि, “बाबा की कविताओं का पाठ करना एक अद्भुत अनुभव था । उनकी रचनाओं में गहराई और सरलता का अद्भुत सामंजस्य था । वे छोटी-छोटी बातों को याद रखते थे और उन्हें अपनी कविताओं में हम तक पहुँचाते थे, जो उनके जीवन जीने के तरीके को दर्शाता है । नीरज जी का व्यक्तित्व और उनकी कविताएँ हमारे दिलों में आज भी जीवित हैं । उनके साथ बिताए हर एक पल की यादें हमेशा हमारे साथ रहेंगी । वे हमारे पास उनके शब्दों और आदर्शों के रूप में हमेशा हैं ।“
विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश शर्मा जी, श्री पवन सिंह चौहान जी तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रमुख श्री सर्वेश अस्थाना जी ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए |
कार्यक्रम के अंतर्गत हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा साहित्य एव संगीत जगत मे अपना अलग मुकाम बनाने वाले 6 प्रबुद्धजनों श्री उदय प्रताप सिंह (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष), डॉ हरिओम (आईएएस), श्री आलोक राज (आईपीएस), श्री सूर्यपाल गंगवार (आईएएस), श्री अखिलेश मिश्रा (आईएएस), श्री पवन कुमार (आईएएस) को प्रतीक चिन्ह व अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया |
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन मे डॉ. विष्णु सक्सेना (हाथरस), डॉ. प्रवीण शुक्ल (दिल्ली), श्री दिनेश रघुवंशी (फरीदाबाद), डॉ. सोनरूपा विशाल (बदायूं), श्री बलराम श्रीवास्तव (मैनपुरी), श्री यशपाल यश (फिरोजाबाद), डॉ. राजीव राज (इटावा), श्री सर्वेश अस्थाना (लखनऊ) ने अपनी कविताएँ प्रस्तुत की :
डॉ. विष्णु सक्सेना जी : “शाख रिश्तों की अगर टूट के झुक जायेगी, प्यार की बहती हुई ये नदी रुक जायेगी, फेंकियेगा ना अगर पास हो पानी गंदा, प्यास चाहे ना बुझे आग तो बुझ जायेगी |"
डॉ. प्रवीण शुक्ल जी : "स्वर तो मौन हुआ है बेशक, पर धुन अब भी गूँज रही है, गीत भवन में काव्य-कामिनी, अपना प्रियतम ढूँढ़ रही है, वो लगते थे बड़े अलग से, कहते थे वो सारे जग से, बूँद-बूँद रस के झरने से पूरा घड़ा भरा करता है, कुछ साँसों के रुक जाने से नीरज नहीं मरा करता है |”
श्री दिनेश रघुवंशी जी : “मैं हूँ सौभाग्यशाली प्यार जो पाया बुज़ुर्गों का, मुझे ऊँचाइयों तक प्यार ही लाया बुज़ुर्गों का, मेरे ईश्वर मेरी चाहत नहीं इसके सिवा कुछ भी, मेरे सर पर हमेशा ही रहे साया बुज़ुर्गों का |”
डॉ. सोनरूपा विशाल जी : “नैन को रूप की ज़रूरत है, प्यास को कूप की ज़रूरत है, बर्फ़ पिघला सके दिलों की जो, अब तो उस धूप की ज़रूरत है |”
श्री बलराम श्रीवास्तव जी : "घुला जब दर्द पानी में तो आंसू हो गए खारे, ढुलक कर आ गए बाहर हुए हैं नैन से न्यारे, तुम्हारे आंसुओं की भक्ति और अनुरक्ति के आगे, तुम्हारी जीत होती है सदा रहते हैं हम हारे ll”
श्री यशपाल यश जी : “हो जाता हर दर्द हवा है, बन जाता हर गीत दवा है, यहाँ वासना प्रतिबंधित है, यह नीरज की प्रेम सभा है |”
डॉ. राजीव राज जी : "जो साधना से हीन से संगीत नहीं है, सद्भावना विहीन है वो मीत नहीं है, आँसू न जिसका शब्द शब्द चूमने लगे, शब्दों की व्यवस्था है मगर गीत नहीं है ।“
श्री सर्वेश अस्थाना जी : "रिश्तों में तकरार बहुत है, लेकिन इनमें प्यार बहुत है, सारी दुनिया खुश रखने को, बस अपना परिवार बहुत है |”
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का संचालन कवि श्री सर्वेश अस्थाना (लखनऊ) ने किया । श्री राजीव वत्सल ने नीरज जी के गीतो पर बांसुरी वादन प्रस्तुत कर सभी श्रोताओं के दिल मे नीरज जी की यादों को ताजा कर दिया तथा श्रीमती स्नेहा ने नीरज जी के गीतो पर नृत्य कर समा बांध दिया |
कार्यक्रम में विशेष अतिथियों के रूप में श्रीमती मालविका हरिओम श्री मिलन प्रभात 'गुंजन' (नीरज जी के पुत्र), श्री पल्लव नीरज (नीरज जी के पौत्र), कवि श्री सुरेश श्रीवास्तव, हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की आंतरिक सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. राजेंद्र प्रसाद, श्री महेंद्र भीष्म, श्री पंकज अवस्थी, डॉ अल्का निवेदन, डॉ ऋतु चक्रबोरती, डॉ शिखा श्रीवास्तव, डॉ राधा बिष्ट एवं लखनऊ शहर के गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही |
#YeNeerajKiPremSabhaHai #पद्मभूषण #गोपालदासनीरज #Geeton_Ke_Darvesh
#NarendraModi #PMOIndia
#YogiAdityanath
#UttarPradeshSahityaSabha
#JusticeAshokKumar #DineshSharma #PawanSinghChauhan #MukeshSharma #RajeshPandey #SarveshAsthana
#MilanPrabhatGunjan #PallavNeeraj
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#DrRajeevRaj #DrSonRoopaVishal #YashpalYash #DrPraveenShukla
#DineshRaghuvanshi #DrSuresh #YogiYogeshShukla #DrHariOm
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पद्मभूषण (डॉ) गोपाल दास नीरज | जन्मशती | यह नीरज की प्रेम सभा है | डॉ सुरेश श्रीवास्तव
04.01.2025, लखनऊ | हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पूर्व संरक्षक, महाकवि और गीतों के दरवेश पद्मभूषण (डॉ०) गोपाल दास नीरज जी के जन्मशती वर्ष के अवसर पर "यह नीरज की प्रेम सभा है" कार्यक्रम का भव्य आयोजन हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के संयुक्त तत्वावधान में संत गाडगे प्रेक्षा गृह, संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ में किया गया । मुख्य अतिथि के रूप में श्री दिनेश शर्मा जी, माननीय सांसद एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश ने कार्यक्रम में शिरकत की | जबकि विशिष्ट अतिथि में श्री मुकेश शर्मा जी, माननीय सदस्य, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश, श्री पवन सिंह चौहान जी, माननीय सभापति, वित्तीय एवं प्रशासनिक विलम्ब समिति, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश, श्री राजेश पांडे जी, रिटायर्ड आईपीएस, नोडल अधिकारी, यूपीडा की गरिमामयी उपस्थिति रही । कार्यक्रम की अध्यक्षता आदरणीय श्री अशोक कुमार जी, माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एवं अध्यक्ष, राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उत्तर प्रदेश ने की | अतिथियों को प्रतीक चिन्ह व अंगवस्त्र से सम्मानित किया |
“यह नीरज की प्रेम सभा है” कार्यक्रम के अंतर्गत हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा साहित्य एव संगीत जगत मे अपना अलग मुकाम बनाने वाले 6 प्रबुद्धजनों को सम्मानित किया गया, साथ ही अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, नीरज जी के गीतो पर बांसुरी वादन तथा नृत्य की प्रस्तुति भी की गयी |
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ, तत्पश्चात मुख्य अतिथि श्री दिनेश शर्मा जी, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री अशोक कुमार जी, विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश शर्मा जी, श्री पवन सिंह चौहान जी, श्री राजेश पांडे जी, उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रमुख श्री सर्वेश अस्थाना, श्री मिलन प्रभात 'गुंजन' (नीरज जी के पुत्र), श्री पल्लव नीरज (नीरज जी के पौत्र), हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल और न्यासी डॉ॰ रूपल अग्रवाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा नीरज जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया |
कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि माननीय श्री दिनेश शर्मा जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, “मैं हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा को कार्यक्रम "यह नीरज की प्रेम सभा है" आयोजित करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं | आज हम उस महान कवि और व्यक्तित्व को याद कर रहे हैं, जिन्होंने न केवल अपनी काव्य रचनाओं से हमें समृद्ध किया, बल्कि अपनी सादगी, विनम्रता और गहन संवेदनशीलता से हमारे जीवन को प्रेरित किया । महाकवि गोपाल दास 'नीरज' जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । उनकी कविताएँ मानवीय भावनाओं का गहन चित्रण करती थीं । इतने बड़े साहित्यिक व्यक्तित्व के बावजूद, वे अत्यंत साधारण और सहज जीवन जीते थे । मुझे याद है, जब मैं छोटा था, तब अपने पिता जी के साथ नीरज जी को एक कवि सम्मेलन में सुनने गया था । उनकी कविताएँ न केवल मंच पर नई ऊर्जा का संचार करती थीं, बल्कि उन्होंने कवि सम्मेलनों को एक नया स्वरूप भी प्रदान किया । एक बार, मैं गोखले मार्ग स्थित एक घर में उन्हें लेकर स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी से मिलने गया । वह एक अविस्मरणीय क्षण था । लगभग पौने दो घंटे तक हमने नीरज जी और अटल जी की कविताएँ सुनीं । यह दो महान आत्माओं का संगम था । आगे चलकर अटल जी हमारे देश के प्रधानमंत्री बने, लेकिन नीरज जी ने 'कवि हृदय के प्रधानमंत्री' के रूप में हमेशा हमारे दिलों पर राज किया । नीरज जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि चाहे आप कितने ही ऊँचे मुकाम पर क्यों न पहुँच जाएँ, सादगी और विनम्रता ही आपके व्यक्तित्व की सच्ची पहचान है । उनकी कविताएँ आज भी हमें जीवन के गहरे अर्थ समझाने के साथ-साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं ।“
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री अशोक कुमार जी ने कहा कि, ”आज हम महाकवि गोपाल दास 'नीरज' जी को याद कर रहे हैं, जिनके गीतों में अद्भुत कशिश और गहराई थी । उनका गीत "इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में, तुमको लग जाएँगी सदियाँ हमें भुलाने में" सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक भावना है, जो यह बताती है कि सच्चे कलाकार और उनकी कला को भुलाना आसान नहीं होता । नीरज जी के शब्दों में जीवन का यथार्थ, प्रेम, पीड़ा और मानवीय संबंधों का गहन चित्रण था । वे जब मंच पर अपनी रचनाएँ गाते, तो ऐसा लगता था मानो शब्दों में जान आ गई हो । उनकी कविताएँ हमें सिखाती हैं कि साधारण शब्द असाधारण प्रभाव डाल सकते हैं । आइए, उनकी स्मृतियों को सहेजें और उनकी प्रेरणा को अपनी ज़िंदगी में उतारें ।"
श्री राजेश पांडे जी ने कह�� कि, “इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान नीरज जी से मेरी पहली मुलाकात हुई । उस एक मुलाकात से जो रिश्ता जुड़ा, वह उनके जीवन के अंत तक बना रहा । नीरज जी के साथ समय बिताना ऐसा लगता था, मानो शब्दों और संवेदनाओं का समंदर हमारे सामने बह रहा हो । उनकी बातों में, उनकी कविताओं में, और उनके व्यक्तित्व में वह जादू था, जो हर किसी को अपना बना लेता था । नीरज जी का जीवन यह सिखाता है कि रिश्ते शब्दों से नहीं, बल्कि दिल से बनाए जाते हैं । उनकी सादगी, उनकी संवेदनशीलता और उनकी काव्य रचनाओं ने हर किसी को प्रभावित किया । चाहे मंच पर उनकी कविताएँ हों या उनके व्यक्तिगत संबंध, हर जगह उन्होंने एक अमिट छाप छोड़ी । उनकी रचनाओं की खासियत यह थी कि वे मानवीय भावनाओं, प्रेम, पीड़ा और जीवन के यथार्थ को इतनी गहराई से व्यक्त करते थे कि हर व्यक्ति खुद को उनसे जुड़ा महसूस करता था । आइए, आज हम नीरज जी की कविताओं और उनके जीवन से प्रेरणा लें । उनके दिखाए मार्ग पर चलें और उनके रिश्तों की तरह अपने जीवन में मधुरता और गहराई लाएँ ।“
हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि, “नीरज जी ने अपने गीतों और मानवतावादी दृष्टिकोण से भारतीय साहित्य में अमिट छाप छोड़ी । उनकी पंक्तियां "एक मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए, जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए ।" हमें आज भी प्रेरित करती हैं । नीरज जी का ट्रस्ट से जुड़ाव हमारी सांस्कृतिक यात्रा का अमूल्य हिस्सा है । उनके आशीर्वाद और मार्गदर्शन ने हमें अनेक साहित्यिक व सामाजिक अभियानों में प्रेरित किया । श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा "गोपाल दास नीरज स्मृति पुरस्कार योजना" के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी और आदरणीय डॉ. दिनेश शर्मा जी का आभार व्यक्त किया । हमारा निवेदन है कि "गोपाल दास नीरज स्मृति पुरस्कार” का वितरण मुख्यमंत्री जी के कर कमलों से किया जाए । यह केवल नीरज जी का नहीं, बल्कि उनके प्रेम, मानवता के संदेश और साहित्य जगत का सम्मान होगा । श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने सभी से अपील करी कि ट्रस्ट को निरंतर सहयोग दें ताकि नीरज जी की स्मृति में और भव्य आयोजन निरंतर किए जा सकें ।“
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष श्री उदय प्रताप सिंह जी ने कहा कि, “हरिवंश राय बच्चन जी के बाद यदि कोई कवि सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली हुआ, तो वह गोपाल दास 'नीरज' जी थे । उनकी ग़ज़लें, भजन और कव्वालियां देखकर यह स्पष्ट होता है कि उनके पास भाषाओं के कितने रंग और विविधता थी । नीरज जी ने हिंदी भाषा की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया । उन्होंने हिंदी को नए आयाम दिए और जन-जन तक पहुँचाया । बावजूद इसके, उनके व्यक्तित्व में कभी अहंकार नहीं आया । उनकी सादगी और विनम्रता आज के कवियों के लिए एक बड़ी सीख है । आइए, हम उनके योगदान को नमन करें और उनके जीवन से प्रेरणा लें ।"
नीरज जी के पुत्र श्री मिलन प्रभात "गुंजन" ने कहा कि, “पापा का हर लेख, हर विचार जीवन के उन अनकहे पहलुओं को उजागर करता था, जो आमतौर पर हम नहीं देख पाते । उनकी रचनाओं की विशेषता यह थी कि उन्होंने शब्दों के माध्यम से जीवन की गहराई को हमारे सामने रखा । वे जानते थे कि सच्ची भावनाएँ शब्दों में नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों में होती हैं । यही कारण था कि उनकी लिखाई न केवल समझने में आसान थी, बल्कि वह दिलों को छूने वाली थी । आज हम उनका आदर करते हैं क्योंकि उन्होंने हमें यह सिखाया कि असली कला वह होती है, जो सरलता से दिलों तक पहुँच जाए । आइए, हम उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारे और अपनी लेखनी, विचार और भावनाओं को ऐसी सादगी और गहराई से व्यक्त करें, जैसे उन्होंने किया ।“
नीरज जी के पौत्र श्री पल्लव नीरज ने अपने संबोधन में कहा कि, “बाबा की कविताओं का पाठ करना एक अद्भुत अनुभव था । उनकी रचनाओं में गहराई और सरलता का अद्भुत सामंजस्य था । वे छोटी-छोटी बातों को याद रखते थे और उन्हें अपनी कविताओं में हम तक पहुँचाते थे, जो उनके जीवन जीने के तरीके को दर्शाता है । नीरज जी का व्यक्तित्व और उनकी कविताएँ हमारे दिलों में आज भी जीवित हैं । उनके साथ बिताए हर एक पल की यादें हमेशा हमारे साथ रहेंगी । वे हमारे पास उनके शब्दों और आदर्शों के रूप में हमेशा हैं ।“
विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश शर्मा जी, श्री पवन सिंह चौहान जी तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रमुख श्री सर्वेश अस्थाना जी ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए |
कार्यक्रम के अंतर्गत हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा साहित्य एव संगीत जगत मे अपना अलग मुकाम बनाने वाले 6 प्रबुद्धजनों श्री उदय प्रताप सिंह (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष), डॉ हरिओम (आईएएस), श्री आलोक राज (आईपीएस), श्री सूर्यपाल गंगवार (आईएएस), श्री अखिलेश मिश्रा (आईएएस), श्री पवन कुमार (आईएएस) को प्रतीक चिन्ह व अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया |
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन मे डॉ. विष्णु सक्सेना (हाथरस), डॉ. प्रवीण शुक्ल (दिल्ली), श्री दिनेश रघुवंशी (फरीदाबाद), डॉ. सोनरूपा विशाल (बदायूं), श्री बलराम श्रीवास्तव (मैनपुरी), श्री यशपाल यश (फिरोजाबाद), डॉ. राजीव राज (इटावा), श्री सर्वेश अस्थाना (लखनऊ) ने अपनी कविताएँ प्रस्तुत की :
डॉ. विष्णु सक्सेना जी : “शाख रिश्तों की अगर टूट के झुक जायेगी, प्यार की बहती हुई ये नदी रुक जायेगी, फेंकियेगा ना अगर पास हो पानी गंदा, प्यास चाहे ना बुझे आग तो बुझ जायेगी |"
डॉ. प्रवीण शुक्ल जी : "स्वर तो मौन हुआ है बेशक, पर धुन अब भी गूँज रही है, गीत भवन में काव्य-कामिनी, अपना प्रियतम ढूँढ़ रही है, वो लगते थे बड़े अलग से, कहते थे वो सारे जग से, बूँद-बूँद रस के झरने से पूरा घड़ा भरा करता है, कुछ साँसों के रुक जाने से नीरज नहीं मरा करता है |”
श्री दिनेश रघुवंशी जी : “मैं हूँ सौभाग्यशाली प्यार जो पाया बुज़ुर्गों का, मुझे ऊँचाइयों तक प्यार ही लाया बुज़ुर्गों का, मेरे ईश्वर मेरी चाहत नहीं इसके सिवा कुछ भी, मेरे सर पर हमेशा ही रहे साया बुज़ुर्गों का |”
डॉ. सोनरूपा विशाल जी : “नैन को रूप की ज़रूरत है, प्यास को कूप की ज़रूरत है, बर्फ़ पिघला सके दिलों की जो, अब तो उस धूप की ज़रूरत है |”
श्री बलराम श्रीवास्तव जी : "घुला जब दर्द पानी में तो आंसू हो गए खारे, ढुलक कर आ गए बाहर हुए हैं नैन से न्यारे, तुम्हारे आंसुओं की भक्ति और अनुरक्ति के आगे, तुम्हारी जीत होती है सदा रहते हैं हम हारे ll”
श्री यशपाल यश जी : “हो जाता हर दर्द हवा है, बन जाता हर गीत दवा है, यहाँ वासना प्रतिबंधित है, यह नीरज की प्रेम सभा है |”
डॉ. राजीव राज जी : "जो साधना से हीन से संगीत नहीं है, सद्भावना विहीन है वो मीत नहीं है, आँसू न जिसका शब्द शब्द चूमने लगे, शब्दों की व्यवस्था है मगर गीत नहीं है ।“
श्री सर्वेश अस्थाना जी : "रिश्तों में तकरार बहुत है, लेकिन इनमें प्यार बहुत है, सारी दुनिया खुश रखने को, बस अपना परिवार बहुत है |”
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का संचालन कवि श्री सर्वेश अस्थाना (लखनऊ) ने किया । श्री राजीव वत्सल ने नीरज जी के गीतो पर बांसुरी वादन प्रस्तुत कर सभी श्रोताओं के दिल मे नीरज जी की यादों को ताजा कर दिया तथा श्रीमती स्नेहा ने नीरज जी के गीतो पर नृत्य कर समा बांध दिया |
कार्यक्रम में विशेष अतिथियों के रूप में श्रीमती मालविका हरिओम श्री मिलन प्रभात 'गुंजन' (नीरज जी के पुत्र), श्री पल्लव नीरज (नीरज जी के पौत्र), कवि श्री सुरेश श्रीवास्तव, हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की आंतरिक सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. राजेंद्र प्रसाद, श्री महेंद्र भीष्म, श्री पंकज अवस्थी, डॉ अल्का निवेदन, डॉ ऋतु चक्रबोरती, डॉ शिखा श्रीवास्तव, डॉ राधा बिष्ट एवं लखनऊ शहर के गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही |
#YeNeerajKiPremSabhaHai #पद्मभूषण #गोपालदासनीरज #Geeton_Ke_Darvesh
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#JusticeAshokKumar #DineshSharma #PawanSinghChauhan #MukeshSharma #RajeshPandey #SarveshAsthana
#MilanPrabhatGunjan #PallavNeeraj
#UdayPratapSingh #DrVishnuSaxena #BalramShrivastava
#DrRajeevRaj #DrSonRoopaVishal #YashpalYash #DrPraveenShukla
#DineshRaghuvanshi #DrSuresh #YogiYogeshShukla #DrHariOm
#AkhileshMishra #SuryapalGangwar #AlokRaj #RajeevVatsal #Sneha
#MahendraBhishma #PankajAwasthi #DrAlkaNivedan
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पद्मभूषण (डॉ) गोपाल दास नीरज | जन्मशती | यह नीरज की प्रेम सभा है | डॉ सुरेश श्रीवास्तव
04.01.2025, लखनऊ | हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पूर्व संरक्षक, महाकवि और गीतों के दरवेश पद्मभूषण (डॉ०) गोपाल दास नीरज जी के जन्मशती वर्ष के अवसर पर "यह नीरज की प्रेम सभा है" कार्यक्रम का भव्य आयोजन हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के संयुक्त तत्वावधान में संत गाडगे प्रेक्षा गृह, संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ में किया गया । मुख्य अतिथि के रूप में श्री दिनेश शर्मा जी, माननीय सांसद एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश ने कार्यक्रम में शिरकत की | जबकि विशिष्ट अतिथि में श्री मुकेश शर्मा जी, माननीय सदस्य, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश, श्री पवन सिंह चौहान जी, माननीय सभापति, वित्तीय एवं प्रशासनिक विलम्ब समिति, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश, श्री राजेश पांडे जी, रिटायर्ड आईपीएस, नोडल अधिकारी, यूपीडा की गरिमामयी उपस्थिति रही । कार्यक्रम की अध्यक्षता आदरणीय श्री अशोक कुमार जी, माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एवं अध्यक्ष, राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उत्तर प्रदेश ने की | अतिथियों को प्रतीक चिन्ह व अंगवस्त्र से सम्मानित किया |
“यह नीरज की प्रेम सभा है” कार्यक्रम के अंतर्गत हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा साहित्य एव संगीत जगत मे अपना अलग मुकाम बनाने वाले 6 प्रबुद्धजनों को सम्मानित किया गया, साथ ही अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, नीरज जी के गीतो पर बांसुरी वादन तथा नृत्य की प्रस्तुति भी की गयी |
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ, तत्पश्चात मुख्य अतिथि श्री दिनेश शर्मा जी, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री अशोक कुमार जी, विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश शर्मा जी, श्री पवन सिंह चौहान जी, श्री राजेश पांडे जी, उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रमुख श्री सर्वेश अस्थाना, श्री मिलन प्रभात 'गुंजन' (नीरज जी के पुत्र), श्री पल्लव नीरज (नीरज जी के पौत्र), हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल और न्यासी डॉ॰ रूपल अग्रवाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा नीरज जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया |
कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि माननीय श्री दिनेश शर्मा जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, “मैं हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा को कार्यक्रम "यह नीरज की प्रेम सभा है" आयोजित करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं | आज हम उस महान कवि और व्यक्तित्व को याद कर रहे हैं, जिन्होंने न केवल अपनी काव्य रचनाओं से हमें समृद्ध किया, बल्कि अपनी सादगी, विनम्रता और गहन संवेदनशीलता से हमारे जीवन को प्रेरित किया । महाकवि गोपाल दास 'नीरज' जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । उनकी कविताएँ मानवीय भावनाओं का गहन चित्रण करती थीं । इतने बड़े साहित्यिक व्यक्तित्व के बावजूद, वे अत्यंत साधारण और सहज जीवन जीते थे । मुझे याद है, जब मैं छोटा था, तब अपने पिता जी के साथ नीरज जी को एक कवि सम्मेलन में सुनने गया था । उनकी कविताएँ न केवल मंच पर नई ऊर्जा का संचार करती थीं, बल्कि उन्होंने कवि सम्मेलनों को एक नया स्वरूप भी प्रदान किया । एक बार, मैं गोखले मार्ग स्थित एक घर में उन्हें लेकर स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी से मिलने गया । वह एक अविस्मरणीय क्षण था । लगभग पौने दो घंटे तक हमने नीरज जी और अटल जी की कविताएँ सुनीं । यह दो महान आत्माओं का संगम था । आगे चलकर अटल जी हमारे देश के प्रधानमंत्री बने, लेकिन नीरज जी ने 'कवि हृदय के प्रधानमंत्री' के रूप में हमेशा हमारे दिलों पर राज किया । नीरज जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि चाहे आप कितने ही ऊँचे मुकाम पर क्यों न पहुँच जाएँ, सादगी और विनम्रता ही आपके व्यक्तित्व की सच्ची पहचान है । उनकी कविताएँ आज भी हमें जीवन के गहरे अर्थ समझाने के साथ-साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं ।“
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री अशोक कुमार जी ने कहा कि, ”आज हम म��ाकवि गोपाल दास 'नीरज' जी को याद कर रहे हैं, जिनके गीतों में अद्भुत कशिश और गहराई थी । उनका गीत "इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में, तुमको लग जाएँगी सदियाँ हमें भुलाने में" सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक भावना है, जो यह बताती है कि सच्चे कलाकार और उनकी कला को भुलाना आसान नहीं होता । नीरज जी के शब्दों में जीवन का यथार्थ, प्रेम, पीड़ा और मानवीय संबंधों का गहन चित्रण था । वे जब मंच पर अपनी रचनाएँ गाते, तो ऐसा लगता था मानो शब्दों में जान आ गई हो । उनकी कविताएँ हमें सिखाती हैं कि साधारण शब्द असाधारण प्रभाव डाल सकते हैं । आइए, उनकी स्मृतियों को सहेजें और उनकी प्रेरणा को अपनी ज़िंदगी में उतारें ।"
श्री राजेश पांडे जी ने कहा कि, “इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान नीरज जी से मेरी पहली मुलाकात हुई । उस एक मुलाकात से जो रिश्ता जुड़ा, वह उनके जीवन के अंत तक बना रहा । नीरज जी के साथ समय बिताना ऐसा लगता था, मानो शब्दों और संवेदनाओं का समंदर हमारे सामने बह रहा हो । उनकी बातों में, उनकी कविताओं में, और उनके व्यक्तित्व में वह जादू था, जो हर किसी को अपना बना लेता था । नीरज जी का जीवन यह सिखाता है कि रिश्ते शब्दों से नहीं, बल्कि दिल से बनाए जाते हैं । उनकी सादगी, उनकी संवेदनशीलता और उनकी काव्य रचनाओं ने हर किसी को प्रभावित किया । चाहे मंच पर उनकी कविताएँ हों या उनके व्यक्तिगत संबंध, हर जगह उन्होंने एक अमिट छाप छोड़ी । उनकी रचनाओं की खासियत यह थी कि वे मानवीय भावनाओं, प्रेम, पीड़ा और जीवन के यथार्थ को इतनी गहराई से व्यक्त करते थे कि हर व्यक्ति खुद को उनसे जुड़ा महसूस करता था । आइए, आज हम नीरज जी की कविताओं और उनके जीवन से प्रेरणा लें । उनके दिखाए मार्ग पर चलें और उनके रिश्तों की तरह अपने जीवन में मधुरता और गहराई लाएँ ।“
हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि, “नीरज जी ने अपने गीतों और मानवतावादी दृष्टिकोण से भारतीय साहित्य में अमिट छाप छोड़ी । उनकी पंक्तियां "एक मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए, जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए ।" हमें आज भी प्रेरित करती हैं । नीरज जी का ट्रस्ट से जुड़ाव हमारी सांस्कृतिक यात्रा का अमूल्य हिस्सा है । उनके आशीर्वाद और मार्गदर्शन ने हमें अनेक साहित्यिक व सामाजिक अभियानों में प्रेरित किया । श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा "गोपाल दास नीरज स्मृति पुरस्कार योजना" के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी और आदरणीय डॉ. दिनेश शर्मा जी का आभार व्यक्त किया । हमारा निवेदन है कि "गोपाल दास नीरज स्मृति पुरस्कार” का वितरण मुख्यमंत्री जी के कर कमलों से किया जाए । यह केवल नीरज जी का नहीं, बल्कि उनके प्रेम, मानवता के संदेश और साहित्य जगत का सम्मान होगा । श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने सभी से अपील करी कि ट्रस्ट को निरंतर सहयोग दें ताकि नीरज जी की स्मृति में और भव्य आयोजन निरंतर किए जा सकें ।“
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष श्री उदय प्रताप सिंह जी ने कहा कि, “हरिवंश राय बच्चन जी के बाद यदि कोई कवि सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली हुआ, तो वह गोपाल दास 'नीरज' जी थे । उनकी ग़ज़लें, भजन और कव्वालियां देखकर यह स्पष्ट होता है कि उनके पास भाषाओं के कितने रंग और विविधता थी । नीरज जी ने हिंदी भाषा की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया । उन्होंने हिंदी को नए आयाम दिए और जन-जन तक पहुँचाया । बावजूद इसके, उनके व्यक्तित्व में कभी अहंकार नहीं आया । उनकी सादगी और विनम्रता आज के कवियों के लिए एक बड़ी सीख है । आइए, हम उनके योगदान को नमन करें और उनके जीवन से प्रेरणा लें ।"
नीरज जी के पुत्र श्री मिलन प्रभात "गुंजन" ने कहा कि, “पापा का हर लेख, हर विचार जीवन के उन अनकहे पहलुओं को उजागर करता था, जो आमतौर पर हम नहीं देख पाते । उनकी रचनाओं की विशेषता यह थी कि उन्होंने शब्दों के माध्यम से जीवन की गहराई को हमारे सामने रखा । वे जानते थे कि सच्ची भावनाएँ शब्दों में नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों में होती हैं । यही कारण था कि उनकी लिखाई न केवल समझने में आसान थी, बल्कि वह दिलों को छूने वाली थी । आज हम उनका आदर करते हैं क्योंकि उन्होंने हमें यह सिखाया कि असली कला वह होती है, जो सरलता से दिलों तक पहुँच जाए । आइए, हम उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारे और अपनी लेखनी, विचार और भावनाओं को ऐसी सादगी और गहराई से व्यक्त करें, जैसे उन्होंने किया ।“
नीरज जी के पौत्र श्री पल्लव नीरज ने अपने संबोधन में कहा कि, “बाबा की कविताओं का पाठ करना एक अद्भुत अनुभव था । उनकी रचनाओं में गहराई और सरलता का अद्भुत सामंजस्य था । वे छोटी-छोटी बातों को याद रखते थे और उन्हें अपनी कविताओं में हम तक पहुँचाते थे, जो उनके जीवन जीने के तरीके को दर्शाता है । नीरज जी का व्यक्तित्व और उनकी कविताएँ हमारे दिलों में आज भी जीवित हैं । उनके साथ बिताए हर एक पल की यादें हमेशा हमारे साथ रहेंगी । वे हमारे पास उनके शब्दों और आदर्शों के रूप में हमेशा हैं ।“
विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश शर्मा जी, श्री पवन सिंह चौहान जी तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रमुख श्री सर्वेश अस्थाना जी ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए |
कार्यक्रम के अंतर्गत हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा साहित्य एव संगीत जगत मे अपना अलग मुकाम बनाने वाले 6 प्रबुद्धजनों श्री उदय प्रताप सिंह (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष), डॉ हरिओम (आईएएस), श्री आलोक राज (आईपीएस), श्री सूर्यपाल गंगवार (आईएएस), श्री अखिलेश मिश्रा (आईएएस), श्री पवन कुमार (आईएएस) को प्रतीक चिन्ह व अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया |
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन मे डॉ. विष्णु सक्सेना (हाथरस), डॉ. प्रवीण शुक्ल (दिल्ली), श्री दिनेश रघुवंशी (फरीदाबाद), डॉ. सोनरूपा विशाल (बदायूं), श्री बलराम श्रीवास्तव (मैनपुरी), श्री यशपाल यश (फिरोजाबाद), डॉ. राजीव राज (इटावा), श्री सर्वेश अस्थाना (लखनऊ) ने अपनी कविताएँ प्रस्तुत की :
डॉ. विष्णु सक्सेना जी : “शाख रिश्तों की अगर टूट के झुक जायेगी, प्यार की बहती हुई ये नदी रुक जायेगी, फेंकियेगा ना अगर पास हो पानी गंदा, प्यास चाहे ना बुझे आग तो बुझ जायेगी |"
डॉ. प्रवीण शुक्ल जी : "स्वर तो मौन हुआ है बेशक, पर धुन अब भी गूँज रही है, गीत भवन में काव्य-कामिनी, अपना प्रियतम ढूँढ़ रही है, वो लगते थे बड़े अलग से, कहते थे वो सारे जग से, बूँद-बूँद रस के झरने से पूरा घड़ा भरा करता है, कुछ साँसों के रुक जाने से नीरज नहीं मरा करता है |”
श्री दिनेश रघुवंशी जी : “मैं हूँ सौभाग्यशाली प्यार जो पाया बुज़ुर्गों का, मुझे ऊँचाइयों तक प्यार ही लाया बुज़ुर्गों का, मेरे ईश्वर मेरी चाहत नहीं इसके सिवा कुछ भी, मेरे सर पर हमेशा ही रहे साया बुज़ुर्गों का |”
डॉ. सोनरूपा विशाल जी : “नैन को रूप की ज़रूरत है, प्यास को कूप की ज़रूरत है, बर्फ़ पिघला सके दिलों की जो, अब तो उस धूप की ज़रूरत है |”
श्री बलराम श्रीवास्तव जी : "घुला जब दर्द पानी में तो आंसू हो गए खारे, ढुलक कर आ गए बाहर हुए हैं नैन से न्यारे, तुम्हारे आंसुओं की भक्ति और अनुरक्ति के आगे, तुम्हारी जीत होती है सदा रहते हैं हम हारे ll”
श्री यशपाल यश जी : “हो जाता हर दर्द हवा है, बन जाता हर गीत दवा है, यहाँ वासना प्रतिबंधित है, यह नीरज की प्रेम सभा है |”
डॉ. राजीव राज जी : "जो साधना से हीन से संगीत नहीं है, सद्भावना विहीन है वो मीत नहीं है, आँसू न जिसका शब्द शब्द चूमने लगे, शब्दों की व्यवस्था है मगर गीत नहीं है ।“
श्री सर्वेश अस्थाना जी : "रिश्तों में तकरार बहुत है, लेकिन इनमें प्यार बहुत है, सारी दुनिया खुश रखने को, बस अपना परिवार बहुत है |”
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का संचालन कवि श्री सर्वेश अस्थाना (लखनऊ) ने किया । श्री राजीव वत्सल ने नीरज जी के गीतो पर बांसुरी वादन प्रस्तुत कर सभी श्रोताओं के दिल मे नीरज जी की यादों को ताजा कर दिया तथा श्रीमती स्नेहा ने नीरज जी के गीतो पर नृत्य कर समा बांध दिया |
कार्यक्रम में विशेष अतिथियों के रूप में श्रीमती मालविका हरिओम श्री मिलन प्रभात 'गुंजन' (नीरज जी के पुत्र), श्री पल्लव नीरज (नीरज जी के पौत्र), कवि श्री सुरेश श्रीवास्तव, हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की आंतरिक सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. राजेंद्र प्रसाद, श्री महेंद्र भीष्म, श्री पंकज अवस्थी, डॉ अल्का निवेदन, डॉ ऋतु चक्रबोरती, डॉ शिखा श्रीवास्तव, डॉ राधा बिष्ट एवं लखनऊ शहर के गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही |
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हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पूर्व संरक्षक और हमारे देश के महान साहित्यकार पद्म भूषण डॉ. गोपाल दास नीरज जी की जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम "यह नीरज की प्रेम सभा है" का आयोजन दिनांक: 04 जनवरी 2025 (शनिवार), समय: सायं 05:00 बजे से, स्थान: संत गाडगे प्रेक्षागृह, संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ मे किया जा रहा है |
इस सांस्कृतिक संध्या में बांसुरी वादन, नृत्य प्रस्तुति, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह का आयोजन होगा । कार्यक्रम की परिकल्पना श्री सर्वेश अस्थाना ने की है |
अध्यक्षता: आदरणीय श्री अशोक कुमार जी, माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त)
अध्यक्ष, राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग उत्तर प्रदेश |
मुख्य अतिथि: श्री दिनेश शर्मा जी, माननीय सांसद एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश |
विशिष्ट अतिथि: श्री पवन सिंह चौहान जी, माननीय सभापति, वित्तीय एवं प्रशासनिक विलंब समिति, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश, श्री मुकेश शर्मा जी, माननीय सदस्य, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश एवं श्री राजेश पाण्डेय जी, रिटायर्ड आई.पी.एस., नोडल अफसर, यूपीडा |
कार्यक्रम को गौरव प्रदान करेंगे श्री मिलन प्रभात 'गुंजन' (नीरज जी के पुत्र) एवं श्री पल्लव नीरज (नीरज जी के पौत्र) |
नीरज जन्मशती सम्मान से सम्मानित प्रबुद्धजन:
श्री उदय प्रताप सिंह, पूर्व सांसद एवं पूर्व अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान |
श्री हरिओम, IAS |
श्री आलोक राज, IPS |
श्री सूर्य पाल गंगवार, IAS |
श्री अखिलेश मिश्रा, IAS |
श्री पवन कुमार, IAS |
कवि सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिष्ठित कवि:
डॉ. विष्णु सक्सेना, हाथरस |
डॉ. प्रवीण शुक्ल, दिल्ली |
श्री दिनेश रघुवंशी, फ़रीदाबाद |
डॉ. सोनरूपा विशाल, बदायु |
श्री बलराम श्रीवास्तव, मैनपुरी |
श्री यशपाल यश, फ़िरोज़ाबाद |
डॉ. राजीव राज, इटावा |
श्री सर्वेश अस्थाना, लखनऊ |
विशेष प्रस्तुतियां:
बांसुरी वादन: श्री राजीव वत्सल |
नृत्य प्रस्तुति: श्रीमती स्नेहा |
हम आपका सपरिवार सादर स्वागत करते हैं । आपके समय और सहयोग के लिए हम हार्दिक आभारी र��ेंगे ।
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पद्मभूषण (डॉ) गोपाल दास नीरज | जन्मशती | यह नीरज की प्रेम सभा है | डॉ सुरेश श्रीवास्तव
04.01.2025, लखनऊ | हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के पूर्व संरक्षक, महाकवि और गीतों के दरवेश पद्मभूषण (डॉ०) गोपाल दास नीरज जी के जन्मशती वर्ष के अवसर पर "यह नीरज की प्रेम सभा है" कार्यक्रम का भव्य आयोजन हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के संयुक्त तत्वावधान में संत गाडगे प्रेक्षा गृह, संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ में किया गया । मुख्य अतिथि के रूप में श्री दिनेश शर्मा जी, माननीय सांसद एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश ने कार्यक्रम में शिरकत की | जबकि विशिष्ट अतिथि में श्री मुकेश शर्मा जी, माननीय सदस्य, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश, श्री पवन सिंह चौहान जी, माननीय सभापति, वित्तीय एवं प्रशासनिक विलम्ब समिति, विधान परिषद, उत्तर प्रदेश, श्री राजेश पांडे जी, रिटायर्ड आईपीएस, नोडल अधिकारी, यूपीडा की गरिमामयी उपस्थिति रही । कार्यक्रम की अध्यक्षता आदरणीय श्री अशोक कुमार जी, माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एवं अध्यक्ष, राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उत्तर प्रदेश ने की | अतिथियों को प्रतीक चिन्ह व अंगवस्त्र से सम्मानित किया |
“यह नीरज की प्रेम सभा है” कार्यक्रम के अंतर्गत हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा साहित्य एव संगीत जगत मे अपना अलग मुकाम बनाने वाले 6 प्रबुद्धजनों को सम्मानित किया गया, साथ ही अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, नीरज जी के गीतो पर बांसुरी वादन तथा नृत्य की प्रस्तुति भी की गयी |
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ, तत्पश्चात मुख्य अतिथि श्री दिनेश शर्मा जी, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री अशोक कुमार जी, विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश शर्मा जी, श्री पवन सिंह चौहान जी, श्री राजेश पांडे जी, उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रमुख श्री सर्वेश अस्थाना, श्री मिलन प्रभात 'गुंजन' (नीरज जी के पुत्र), श्री पल्लव नीरज (नीरज जी के पौत्र), हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल और न्यासी डॉ॰ रूपल अग्रवाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा नीरज जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया |
कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि माननीय श्री दिनेश शर्मा जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, “मैं हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा को कार्यक्रम "यह नीरज की प्रेम सभा है" आयोजित करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं | आज हम उस महान कवि और व्यक्तित्व को याद कर रहे हैं, जिन्होंने न केवल अपनी काव्य रचनाओं से हमें समृद्ध किया, बल्कि अपनी सादगी, विनम्रता और गहन संवेदनशीलता से हमारे जीवन को प्रेरित किया । महाकवि गोपाल दास 'नीरज' जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । उनकी कविताएँ मानवीय भावनाओं का गहन चित्रण करती थीं । इतने बड़े साहित्यिक व्यक्तित्व के बावजूद, वे अत्यंत साधारण और सहज जीवन जीते थे । मुझे याद है, जब मैं छोटा था, तब अपने पिता जी के साथ नीरज जी को एक कवि सम्मेलन में सुनने गया था । उनकी कविताएँ न केवल मंच पर नई ऊर्जा का संचार करती थीं, बल्कि उन्होंने कवि सम्मेलनों को एक नया स्वरूप भी प्रदान किया । एक बार, मैं गोखले मार्ग स्थित एक घर में उन्हें लेकर स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी से मिलने गया । वह एक अविस्मरणीय क्षण था । लगभग पौने दो घंटे तक हमने नीरज जी और अटल जी की कविताएँ सुनीं । यह दो महान आत्माओं का संगम था । आगे चलकर अटल जी हमारे देश के प्रधानमंत्री बने, लेकिन नी���ज जी ने 'कवि हृदय के प्रधानमंत्री' के रूप में हमेशा हमारे दिलों पर राज किया । नीरज जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि चाहे आप कितने ही ऊँचे मुकाम पर क्यों न पहुँच जाएँ, सादगी और विनम्रता ही आपके व्यक्तित्व की सच्ची पहचान है । उनकी कविताएँ आज भी हमें जीवन के गहरे अर्थ समझाने के साथ-साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं ।“
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री अशोक कुमार जी ने कहा कि, ”आज हम महाकवि गोपाल दास 'नीरज' जी को याद कर रहे हैं, जिनके गीतों में अद्भुत कशिश और गहराई थी । उनका गीत "इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में, तुमको लग जाएँगी सदियाँ हमें भुलाने में" सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक भावना है, जो यह बताती है कि सच्चे कलाकार और उनकी कला को भुलाना आसान नहीं होता । नीरज जी के शब्दों में जीवन का यथार्थ, प्रेम, पीड़ा और मानवीय संबंधों का गहन चित्रण था । वे जब मंच पर अपनी रचनाएँ गाते, तो ऐसा लगता था मानो शब्दों में जान आ गई हो । उनकी कविताएँ हमें सिखाती हैं कि साधारण शब्द असाधारण प्रभाव डाल सकते हैं । आइए, उनकी स्मृतियों को सहेजें और उनकी प्रेरणा को अपनी ज़िंदगी में उतारें ।"
श्री राजेश पांडे जी ने कहा कि, “इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान नीरज जी से मेरी पहली मुलाकात हुई । उस एक मुलाकात से जो रिश्ता जुड़ा, वह उनके जीवन के अंत तक बना रहा । नीरज जी के साथ समय बिताना ऐसा लगता था, मानो शब्दों और संवेदनाओं का समंदर हमारे सामने बह रहा हो । उनकी बातों में, उनकी कविताओं में, और उनके व्यक्तित्व में वह जादू था, जो हर किसी को अपना बना लेता था । नीरज जी का जीवन यह सिखाता है कि रिश्ते शब्दों से नहीं, बल्कि दिल से बनाए जाते हैं । उनकी सादगी, उनकी संवेदनशीलता और उनकी काव्य रचनाओं ने हर किसी को प्रभावित किया । चाहे मंच पर उनकी कविताएँ हों या उनके व्यक्तिगत संबंध, हर जगह उन्होंने एक अमिट छाप छोड़ी । उनकी रचनाओं की खासियत यह थी कि वे मानवीय भावनाओं, प्रेम, पीड़ा और जीवन के यथार्थ को इतनी गहराई से व्यक्त करते थे कि हर व्यक्ति खुद को उनसे जुड़ा महसूस करता था । आइए, आज हम नीरज जी की कविताओं और उनके जीवन से प्रेरणा लें । उनके दिखाए मार्ग पर चलें और उनके रिश्तों की तरह अपने जीवन में मधुरता और गहराई लाएँ ।“
हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि, “नीरज जी ने अपने गीतों और मानवतावादी दृष्टिकोण से भारतीय साहित्य में अमिट छाप छोड़ी । उनकी पंक्तियां "एक मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए, जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए ।" हमें आज भी प्रेरित करती हैं । नीरज जी का ट्रस्ट से जुड़ाव हमारी सांस्कृतिक यात्रा का अमूल्य हिस्सा है । उनके आशीर्वाद और मार्गदर्शन ने हमें अनेक साहित्यिक व सामाजिक अभियानों में प्रेरित किया । श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा "गोपाल दास नीरज स्मृति पुरस्कार योजना" के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी और आदरणीय डॉ. दिनेश शर्मा जी का आभार व्यक्त किया । हमारा निवेदन है कि "गोपाल दास नीरज स्मृति पुरस्कार” का वितरण मुख्यमंत्री जी के कर कमलों से किया जाए । यह केवल नीरज जी का नहीं, बल्कि उनके प्रेम, मानवता के संदेश और साहित्य जगत का सम्मान होगा । श्री हर्ष वर्धन अग्रवाल ने सभी से अपील करी कि ट्रस्ट को निरंतर सहयोग दें ताकि नीरज जी की स्मृति में और भव्य आयोजन निरंतर किए जा सकें ।“
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष श्री उदय प्रताप सिंह जी ने कहा कि, “हरिवंश राय बच्चन जी के बाद यदि कोई कवि सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली हुआ, तो वह गोपाल दास 'नीरज' जी थे । उनकी ग़ज़लें, भजन और कव्वालियां देखकर यह स्पष्ट होता है कि उनके पास भाषाओं के कितने रंग और विविधता थी । नीरज जी ने हिंदी भाषा की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया । उन्होंने हिंदी को नए आयाम दिए और जन-जन तक पहुँचाया । बावजूद इसके, उनके व्यक्तित्व में कभी अहंकार नहीं आया । उनकी सादगी और विनम्रता आज के कवियों के लिए एक बड़ी सीख है । आइए, हम उनके योगदान को नमन करें और उनके जीवन से प्रेरणा लें ।"
नीरज जी के पुत्र श्री मिलन प्रभात "गुंजन" ने कहा कि, “पापा का हर लेख, हर विचार जीवन के उन अनकहे पहलुओं को उजागर करता था, जो आमतौर पर हम नहीं देख पाते । उनकी रचनाओं की विशेषता यह थी कि उन्होंने शब्दों के माध्यम से जीवन की गहराई को हमारे सामने रखा । वे जानते थे कि सच्ची भावनाएँ शब्दों में नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों में होती हैं । यही कारण था कि उनकी लिखाई न केवल समझने में आसान थी, बल्कि वह दिलों को छूने वाली थी । आज हम उनका आदर करते हैं क्योंकि उन्होंने हमें यह सिखाया कि असली कला वह होती है, जो सरलता से दिलों तक पहुँच जाए । आइए, हम उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारे और अपनी लेखनी, विचार और भावनाओं को ऐसी सादगी और गहराई से व्यक्त करें, जैसे उन्होंने किया ।“
नीरज जी के पौत्र श्री पल्लव नीरज ने अपने संबोधन में कहा कि, “बाबा की कविताओं का पाठ करना एक अद्भुत अनुभव था । उनकी रचनाओं में गहराई और सरलता का अद्भुत सामंजस्य था । वे छोटी-छोटी बातों को याद रखते थे और उन्हें अपनी कविताओं में हम तक पहुँचाते थे, जो उनके जीवन जीने के तरीके को दर्शाता है । नीरज जी का व्यक्तित्व और उनकी कविताएँ हमारे दिलों में आज भी जीवित हैं । उनके साथ बिताए हर एक पल की यादें हमेशा हमारे साथ रहेंगी । वे हमारे पास उनके शब्दों और आदर्शों के रूप में हमेशा हैं ।“
विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश शर्मा जी, श्री पवन सिंह चौहान जी तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रमुख श्री सर्वेश अस्थाना जी ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए |
कार्यक्रम के अंतर्गत हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा साहित्य एव संगीत जगत मे अपना अलग मुकाम बनाने वाले 6 प्रबुद्धजनों श्री उदय प्रताप सिंह (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष), डॉ हरिओम (आईएएस), श्री आलोक राज (आईपीएस), श्री सूर्यपाल गंगवार (आईएएस), श्री अखिलेश मिश्रा (आईएएस), श्री पवन कुमार (आईएएस) को प्रतीक चिन्ह व अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया |
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन मे डॉ. विष्णु सक्सेना (हाथरस), डॉ. प्रवीण शुक्ल (दिल्ली), श्री दिनेश रघुवंशी (फरीदाबाद), डॉ. सोनरूपा विशाल (बदायूं), श्री बलराम श्रीवास्तव (मैनपुरी), श्री यशपाल यश (फिरोजाबाद), डॉ. राजीव राज (इटावा), श्री सर्वेश अस्थाना (लखनऊ) ने अपनी कविताएँ प्रस्तुत की :
डॉ. विष्णु सक्सेना जी : “शाख रिश्तों की अगर टूट के झुक जायेगी, प्यार की बहती हुई ये नदी रुक जायेगी, फेंकियेगा ना अगर पास हो पानी गंदा, प्यास चाहे ना बुझे आग तो बुझ जायेगी |"
डॉ. प्रवीण शुक्ल जी : "स्वर तो मौन हुआ है बेशक, पर धुन अब भी गूँज रही है, गीत भवन में काव्य-कामिनी, अपना प्रियतम ढूँढ़ रही है, वो लगते थे बड़े अलग से, कहते थे वो सारे जग से, बूँद-बूँद रस के झरने से पूरा घड़ा भरा करता है, कुछ साँसों के रुक जाने से नीरज नहीं मरा करता है |”
श्री दिनेश रघुवंशी जी : “मैं हूँ सौभाग्यशाली प्यार जो पाया बुज़ुर्गों का, मुझे ऊँचाइयों तक प्यार ही लाया बुज़ुर्गों का, मेरे ईश्वर मेरी चाहत नहीं इसके सिवा कुछ भी, मेरे सर पर हमेशा ही रहे साया बुज़ुर्गों का |”
डॉ. सोनरूपा विशाल जी : “नैन को रूप की ज़रूरत है, प्यास को कूप की ज़रूरत है, बर्फ़ पिघला स���े दिलों की जो, अब तो उस धूप की ज़रूरत है |”
श्री बलराम श्रीवास्तव जी : "घुला जब दर्द पानी में तो आंसू हो गए खारे, ढुलक कर आ गए बाहर हुए हैं नैन से न्यारे, तुम्हारे आंसुओं की भक्ति और अनुरक्ति के आगे, तुम्हारी जीत होती है सदा रहते हैं हम हारे ll”
श्री यशपाल यश जी : “हो जाता हर दर्द हवा है, बन जाता हर गीत दवा है, यहाँ वासना प्रतिबंधित है, यह नीरज की प्रेम सभा है |”
डॉ. राजीव राज जी : "जो साधना से हीन से संगीत नहीं है, सद्भावना विहीन है वो मीत नहीं है, आँसू न जिसका शब्द शब्द चूमने लगे, शब्दों की व्यवस्था है मगर गीत नहीं है ।“
श्री सर्वेश अस्थाना जी : "रिश्तों में तकरार बहुत है, लेकिन इनमें प्यार बहुत है, सारी दुनिया खुश रखने को, बस अपना परिवार बहुत है |”
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का संचालन कवि श्री सर्वेश अस्थाना (लखनऊ) ने किया । श्री राजीव वत्सल ने नीरज जी के गीतो पर बांसुरी वादन प्रस्तुत कर सभी श्रोताओं के दिल मे नीरज जी की यादों को ताजा कर दिया तथा श्रीमती स्नेहा ने नीरज जी के गीतो पर नृत्य कर समा बांध दिया |
कार्यक्रम में विशेष अतिथियों के रूप में श्रीमती मालविका हरिओम श्री मिलन प्रभात 'गुंजन' (नीरज जी के पुत्र), श्री पल्लव नीरज (नीरज जी के पौत्र), कवि श्री सुरेश श्रीवास्तव, हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की आंतरिक सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. राजेंद्र प्रसाद, श्री महेंद्र भीष्म, श्री पंकज अवस्थी, डॉ अल्का निवेदन, डॉ ऋतु चक्रबोरती, डॉ शिखा श्रीवास्तव, डॉ राधा बिष्ट एवं लखनऊ शहर के गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही |
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गाजीपुर: समाजसेवी पंडित रामाधार मिश्र की पांचवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा एवं कंबल वितरण
गाजीपुर। सिधौना में प्रखर समाजसेवी पंडित रामाधार मिश्र की पांचवीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सुंदरकांड का संगीत मय पाठ किया गया और पाँच सौ असहाय, निर्धन, दिव्यांग, वृद्ध और विधवाओं को कंबल वितरित किए गए। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष, खाद्य सुरक्षा और औषधीय प्रशासन विभाग उ0प्र0, डॉ. दयाशंकर मिश्र ने श्रद्धांजलि सभा में बोलते हुए कहा, “केंद्र सरकार ने हर वर्ग,…
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UCC के पास खेल के रूप में एक ही टीम की भावना है, कोई नहीं के खिलाफ भेदभाव: देहरादुन में राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन करने के बाद पीएम मोदी | भारत समाचार
नेशनल गेम्स में पीएम मोदी (छवि क्रेडिट: बीजेपी) नई दिल्ली: प्रध���नमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को स्वागत किया उत्तराखंड सरकार लागू करने के लिए पहला राज्य होने के लिए समान नागरिक संहिता (UCC)।उद्घाटन पर सभा को संबोधित करना राष्ट्रीय खेल उत्तराखंड के देहरादुन में, सीएम के साथ पुष्कर सिंह धामीपीएम ने कहा, “कल, उत्तराखंड वर्दी नागरिक संहिता को लागू करने के लिए राज्य बन गया … मैं इसके लिए उत्तराखंड…
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पीएमश्री योजना में हुआ हिमाचल के 180 स्कूलों का चयन, केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री ने संसद में दी जानकारी
Himachal News: पीएमश्री योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश में 180 स्कूलों का चयन किया गया है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने संसद में लोक सभा सदस्य डॉक्टर राजीव भारद्वाज को बताया कि योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश में 56 प्राथमिक, 5 सेकेंडरी और 119 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों का चयन किया गया है। योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शाशित राज्यों द्वारा संचालित 14,500…
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Regional Marathi Text Bulletin, Chhatrapati Sambhajinagar
Date - 03 March 2025
Time 01.00 to 01.05 PM
Language Marathi
आकाशवाणी छत्रपती संभाजीनगर
प्रादेशिक बातम्या
दिनांक ०३ मार्च २०२५ दुपारी १.०० वा.
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राज्य सरकार सर्व समाज घटकांना सोबत घेऊन सर्वसमावेशक, प्रगतीशील, पुरोगामी आणि विकसित महाराष्ट्र घडवण्यासाठी काम करत असल्याचं राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन यांनी म्हटलं आहे. राज्य विधिमंडळाच्या अर्थसंकल्पीय अधिवेशनाला आज राज्यपालांच्या अभिभाषणानं सुरवात झाली, त्यावेळी ते बोलत होते.
महाराष्ट्राने देशातल्या एकूण स्थूल देशांतर्गत उत्पन्नामध्ये १४ टक्क्यांपेक्षा अधिक योगदान दिलं असून, महाराष्ट्र हे थेट परकीय गुंतवणुकीसाठी पसंतीचं राज्य असल्याचं नमूद करत त्यांनी, दावोसमध्ये झालेल्या गुंतवणुकीची माहिती दिली. राज्य सरकार गतिमान आणि सुशासनाचं ध्येय साध्य करण्यासाठी त्रिसूत्री कार्यक्रम राबवत असल्याचं राज्यपालांनी सांगितलं. यामध्ये शासकीय प्रक्रियेची पुनर्रचना करणं, कर्मचाऱ्यांची कार्यक्षमता वाढवणं आणि एकात्मिक मानव संसाधन प्रणाली विकसित करणं, यांचा समावेश असल्याचं ते म्हणाले. राज्याच्या शहरी भागात उत्तम पायाभूत सुविधांद्वारे जीवनमान सुधारण्यासाठी नगरोत्थान महाअभियान प्रभावीपणे राबवण्यासाठी सरकार कटिबद्ध असल्याचं राज्यपालांनी सांगितलं.
सरकार महाराष्ट्र - कर्नाटक सीमा वाद सोडवण्यासाठी बांधील असून, सर्वोच्च न्यायालयासमोर महाराष्ट्राची बाजू मांडण्यासाठी तज्ज्ञ वकिलांची नेमणूक केली आहे. सरकार सीमाभागातल्या मराठी नागरीकांसाठी शिक्षण, आरोग्य आणि इतर योजना राबवत असल्याचं त्यांनी सांगितलं.
महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक वाहन धोरण, फास्टटॅगच्या माध्यमातून ऑनलाईन पद्धतीने टोल वसुली, १० लाख युवकांना प्रशिक्षित करण्याचं लक्ष्य, औद्योगिकीकरणाला चालना देण्यासाठी केलेल्या उपाययोजना, वस्त्रोद्योग क्षेत्राचं बळकटीकरण आणि विस्तार, कर्मयोगी भारत कार्यक्रम, प्रधानमंत्री आवास योजना, गाळमुक्त धरण गाळयुक्त शिवार, प्रधानमंत्री कृषी सिंचन योजना, अटल भूजल योजना, नमो ड्रोन दीदी आदी योजनांचा राज्यपालांनी आपल्या अभिभाषणात उल्लेख केला.
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उपमुख्यमंत्री तथा अर्थमंत्री अजित पवार यांनी २०२४-२५ च्या सहा हजार कोटी रुपयांच्या पुरवणी मागण्या सभागृहात सादर केल्या. यात ९३२ कोटींच्या अनिवार्य, तीन हजार ४२० कोटींच्या कार्यक्रमाअंतर्गत, दोन हजार १३३ कोटींच्या केंद्र पुरस्कृत कार्यक्रमा अंतर्गत अर्थसहाय्य उपलब्ध होण्याच्या अनुषंगाने पुरवणी मागण्या आहेत. या मागण्यांवर सहा आणि सात मार्च रोजी चर्चा आणि मतदान होणार आहे.
योगेश सागर, बबनराव लोणीकर, दिलीप बनकर, सुनील राऊत, अमित झनक यांची सभा अध्यक्षांच्या तालिकेवर निवड झाली.
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर यांनी सभागृहात शोक प्रस्ताव ठेवला. माजी पंतप्रधान डॉ मनमोहन सिंग, प्रदीप जाधव नाईक, मुकुंदराव मानकर, उपेंद्र शेंडे, तुकाराम बिरकड यांना आदरांजली वाहण्यात आली. त्यानंतर विधानसभेचं कामकाज दिवसभरासाठी तहकूब करण्यात आलं.
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दरम्यान, अधिवेशन सुरु होण्यापूर्वी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आणि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तसंच अजित पवार यांनी विधान भवनातल्या छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या पुतळ्याला अभिवादन केलं.
राष्ट्रवादी काँग्रेस शरदचंद्र पवार पक्षाचे आमदार जितेंद्र आव्हाड यांनी हातात बेड्या घालून विधान भवनात प्रवेश केला. राज्यात विरोधी पक्षांचा आवाज दाबला जात असल्याचा आरोप त्यांनी केला. अमेरिकेत अवैधरित्या राहणाऱ्या भारतीयांची पाठवणी करताना होणाऱ्या अपमानाच्या विरोधात हे आंदोलन असल्याचं ते म्हणाले.
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दरम्यान, राज्याचा आगामी वर्षाचा अर्थसंकल्प दहा मार्च रोजी सादर होणार आहे. या अधिवेशनात महायुतीचं सरकार, शेतकरी, कष्टकरी, कामगार-मजूर वर्ग, महिला, सर्वसामान्यांचे प्रश्न तडीस नेण्यासाठी सर्वोतोपरी प्रयत्न करेल, असं उपमुख्यमंत्री अजित पवार यांनी म्हटलं आहे. ते आज विधीमंडळ परिसरात वार्ताहरांशी बोलत होते. सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिकदृष्ट्या मागास अशा राज्यातल्या सर्व समाजघटकांच्या हिताचे सर्वसमावेशक निर्णय या अधिवेशनात घेतले जातील, असं त्यांनी सांगितलं.
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जागतिक वन्यजीव दिवस आज पाळण्यात येत आहे. पर्यावरण संतुलन, वन्यप्राण्याचं संरक्षण आणि संवर्धनासाठी प्रयत्न करणाच्या उद्देशानं जागरुकता निर्माण करण्यासाठी आज विविध उपक्रमांचं आयोजन करण्यात आलं आहे.
वन्यजीव दिनानिमित्त सामाजिक माध्यमावर जारी केलेल्या संदेशात पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी, जैवविविधतेचे संरक्षण आणि संवर्धन करण्यासाठी कटीबद्ध राहण्याचं आवाहन केलं आहे. प्रत्येक प्रजाती महत्त्वाची भूमिका बजावते यावर त्यांनी भर दिला. वन्यजीवांच्या संरक्षण आणि संवर्धनात भारताच्या योगदानाबद्दल पंतप्रधानांनी अभिमान व्यक्त केला.
पर्यावरण, वने आणि हवामान बदल मंत्री भूपेंद्र यादव ��ांनीही जागतिक वन्यजीव दिनानिमित्त शुभेच्छा दिल्या आहेत.
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राज्यातल्या रब्बी हंगामातल्या पिकांच्या पेरण्याखालील सरासरी क्षेत्र ५३ लाख ९७ हजार हेक्टर इतकं आहे. तर कृषी विभागाच्या पीक पेरणीच्या अंतिम अहवालानुसार यंदाच्या रब्बी हंगामात उच्चांकी म्हणजे ६४ लाख ८३ हजार हेक्टरवर पेरण्या पूर्ण झाल्या आहेत. राज्यात पाण्याची उपलब्धता अधिक असल्यामुळे पेरणी क्षेत्र वाढण्यास मदत झाल्याचं पुणे कृषी आयुक्तालयाकडून सांगण्यात आलं. यंदा ऊसाचं क्षेत्र कमी असल्यामुळे रब्बी पिकांच्या पेरण्यांखालील क्षेत्रात वाढ होण्यास मदत झाली. त्यामुळे यंदा उत्पादनातही निश्चित वाढ अपेक्षित असल्याचं, कृषी आयुक्तालयाचे मुख्य सांख्यिक वैभव तांबे यांनी सांगितलं.
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