#यश कुमार ��िवाह
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ये रही Holi 2023 की नयी प्लेलिस्ट, बॉलीवुड के इन मजेदार गानों के साथ बनाएं अपनी होली को हैप्पी
वैसे तो Holi रंगों का त्योहार हैं पर जब इन रंगों के साथ कुछ गानों के धुन मिल जाए, तो वाह- जी-वाह क्या बात होगी। और देखा जाए तो कुछ संगीत के बिना Holi पार्टी थोड़ी बोरिंग ही हो जाएगी। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने साल के हैं, इस दिन को थोड़ा खास बनाने के लिए आपको डांस करने की जरूरत तो बिलकुल है। इसलिए, अगर आप इस बार अपने दोस्तों और परिवार के लिए पार्टी दे रहे हैं, तो आपकी प्लेलिस्ट को खास बनाने में हम आपकी मदद करेंगे।
चूंकि यह रंगों का त्योहार है, तो क्यों न हाल के और पुराने दोनों ही गानों को शामिल किया जाए, जिसके शब्द आपको थिड़कने पर मजबूर कर दे। इस त्योहारी सीजन में आपके प्लेलिस्ट को मजेदार बनाने के लिए यहां हमारे शीर्ष चयन हैं, गौर करें।
Rang Barse
यह अब तक का सब��े प्रतिष्ठित Holi गीत है। महान यश चोपड़ा की सिलसिला से, यह गाना होली पर मस्ती करने के बारे में है।
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स्क्रीन पर अमिताभ बच्चन, रेखा, संजीव कुमार और जया बच्चन के साथ, आप इस गाने की धुन पर थिरकने से खुद को बिलकुल रोक नहीं पाएंगे! आखिरकार, यह रंग और होली के बारे में है, आप जरूर सुनिए!
Rangsaari
अब यह गाना ऐसा है जिसे आज कल हर कोई सुनना पसंद कर रहा है।
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सिंगल रिलीज होने से लेकर इंस्टाग्राम रील पर ट्रेंड करने से लेकर फिल्म जुग जुग जीयो में दिखाए जाने तक, कनिष्क सेठ और कविता सेठ का यह गाना निश्चित रूप से पार्टी करने के लिए सबसे अच्छा चयन है। इसमें आप अपने दोस्तों, या फिर अपने प्रेमी के साथ थिरक सकते हैं।
Rang De Basanti
अब पार्टी हो और भला कोई भांगड़ा कैसे न करें? हम शर्त लगाते हैं कि जब यह दलेर मेहंदी का ये खास गाना बजाना शुरू करेगा तो कोई भी शांत नहीं बै�� पाएगा।
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एआर रहमान के मजेदार संगीत और मेहंदी की प्रभावशाली आवाज के साथ, इसी नाम की फिल्म का यह गाना आपको पार्टी में हर किसी का पसंदीदा बना देगा!
Balam Pichkari
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जय गोविन्द ज्ञान शब्दसागर
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पंडित श्री गोविन्द झा शताब्दी बर्ष
( लेखक: नागेश चन्द्र मिश्र, पूर्व अभियंत�� प्रमुख,ग्राम:नवटोल,सरिसब-पाही )
19 सितंबर 2021 - जहियासं चि. अक्कू’क व्हाट्सऐप सँ ई बुझलौंह जे साहित्यिकी’क तत्वावधान मे दिनॉंक 10 अक्तूबर 2021 कें इसहपुर मे पण्डित श्री गोविन्द झा शतवार्षिकी समारोह आयोजित अछि - तहिये सँ हम दुनू प्राणी मोने मोन गुड़-चाओर फाँकि रहल छी ! आदरणीय पंडित जीक दलान पर सभ आत्मीय जनसँ भेंट हैत, परात भेने 11 अक्टूबर कें छोटकी बहीनक ( डा. श्रीमती नीरजा ‘रेणु’ ) जन्मदिन मनायब आ छोटका ओझाक ‘नन्दलाल’ कें जगाएब ! ओही मध्य अपन गाम नवटोलक दुर्गा पूजा , वाह की अमृत योग बनि रहल छैक !
ईप्सित अभिलाषाक मगन मेला दू-चारि दिन तक नाच-तमाशा देखबैत रहल - फेर, शरीर किछु ने किछु ‘शरारत’ शुरू कर’ लागल ! मोनमे प्रश्न उठल-राजा दैव विवर्जत: ... जँ कोनो कारणवश ससमय नहिं पहुँच सकलहुँ तँ ? ई प्रश्न मोनमे अइ दुआरे उठल जे … आठ - दस बर्ष पूर्व पंडित जी ‘क पटेलनगर एपार्टमेंट मे पंडित जीक समक्ष हम बाजल रही जे ….जेना भारतरत्न मोक्षगुण्डम विश्वेश्वरैयाक शतबार्षिकी समारोह मनाओल गेल छलन्हिं आ ओ खूब होशोहवास मे धुरझाड़ धारा प्रवाह बाजल छलाह, पंडित जी सेहो ओही तरहें हमरा लोकनिकें अपन ओजस्वी भाषणसँ आशीर्वाद दय अनुगृहित करताह आ हम ओहि शुभ अवसर पर उपस्थित रहब - एकर साक्षी छथि चि. अक्कू ….आ ओ शुभ मुहूर्तक बेर आबि रहल छैक ! की करू ? जँ चुकलहुँ तँ मोनक मनोरथ मोनेमे रहि जायत आ मनोरंजन पूर नहिं हैत से एक बात - हम अपन कमीटमेन्ट सेहो नहिं निभा’ सकब - एहेन ‘शरद:शतम्’ तँ ‘ऑन्ली वन्स इन ए लाइफ़ टाइम ‘ अबैत छैक ! ई सभ गुन-धुन आ ‘आत्मालाप’ चलिते रहे कि ‘अतीतालोक’ मे विचरण करैत ‘फ़्लाइ लेवेल’ नपैत-नपैत “गोविन्द लोक” पहुँच गेलौंह!
अतीतक चलचित्र चल’ लागल ! बाल्यावस्था मे देखल छल हमर पिता ( पंडित हरिश्चन्द्र मिश्र,स्पेशल ऑफ़िसर , राज दरभंगा)क अलमारी मे महावैयाकरण पंडित दीनबन्धु झाक पुस्तक ! एक दिन बाबूसँ भेंट करै’ ले क्यो प्रतिष्ठित लोक आयल रहथीन्ह ; बाबू कहलन्हिं , ‘गोड़ लगियन्हुँ’ ; आगन्तुकक चरण-स्पर्श कयलन्हिं आ ओ भरिपोख आशीर्वाद देलन्हिं ! चाह-ताह’क बाद जखन ओ विदा भ’ गेलखीन्ह , ओकर बाद बाबू कें पुछलियन्हिं , ‘बाबू , ई के छलथिन्ह?’ बाबू कहलन्हिं, ‘ई छलाह पंडित जीवनाथ झा, महावैयाकरण पंडित दीनबन्धु झा’क जेठ बालक ! श्रद्धा सँ मोन भरि गेल ! बाद मे, दुर्गा पूजा’क समय जखन अपन गाम नवटोल गेल करी, तँ नवटोल, लालगंज आ पाहीटोलक नाट्यमंच आ ओही क्रम मे पंडित जीक लीखल नाटक #बसात सँ परिचित भेलहुँ !हुनक ‘सामाक पौती’ हमरा पर अमिट छाप छोड़लक ! ईशनाथ कका , रमानाथ कका , तंत्रनाथ कका , सुभद्र कका आदिक मुँहें ‘गोविन्द जी’क चर्चा सुनलौंह! नैयायिक जी ( पंडित दुर्गाधर झा , उजान जिनका हम सभ दिन पीसा कहैत रहलियन्हिं - हमर ननिया ससुर भेलाक बादो - हुनको सँ पंडित जीक समस्त परिवारक विषयमे बुझल करी ! हमर छोटका ओझा पंडित किशोर नाथ झा , बिट्ठो ओ छोटकी बहीन ( हमरा सँ दू बर्ष जेठ श्रीमती नीरजा ‘रेणु’ )क परिवार पंडित जी सँ सदैव निकटता रहलन्हिं अछि ! हम विवाह सँ पहिने बाबू संग जखन पटना आबी, तँ विजय भाई ( विजय नाथ ठाकुर , बेरमा ) क ओहि ठाम ठहरल करी - हुनक डेरा ओहि समय राजापुर पुल लग रहन्हिं ! किछु बरखक बाद ओ राजवंशी नगर सरकारी क्वार्टर मे आबि गेलाह आ पंडित जी हुनक बगलगीर भेलखिन्ह ! दुनू गोटा राजभाषा विभाग मे पदस्थापित रहथि ! पंडित जीसँ अपेक्षा बढ़ल - ई महावैयाकरणक माझिल बालक छथीन्ह आ अपनहुँ सतत कर्मशील विशिष्ट विद्वान छथि, ख़ूब यश-प्रतिष्ठा अर्जित क’ रहल छलाह - अइ सबसँ विशेष आकर्षित भेलहुँ ! जहिया कहियो भेंट करियन्हिं, आबेस-पाति करथि !पंडित जी हमर श्रद्धेय श्वसुर ( देवी नाथ मिश्र, पाहीटोल )क सेहो बहुत आप्त रहथिन्ह ! हम सरकारी नौकरी मे एलौंह 1973 मे - जेपी मूवमेंट सँ पहिने 1974 मे यद्यपि हमर ट्रांसफ़र सहरसा भ’ गेल , मुदा सरकारी काजसँ वा छुट्टी मे पटना जखन कहियो अबै’ छलौंह, पंडित जी सँ भेंट होइत रहल ! अपन मुख्य अभियंता श्रद्धेय ‘व्यास’ जी सँ सेहो पंडित जीक पाण्डित्यक चर्चा सुनल करी ! चि. अक्कू सँ परिचय बढ़ल - हुनक साहित्यिक गतिविधि एवं नाटक सँ परिचित भेलहुँ ! ओ जेपी मूवमेंट मे सेहो सक्रिय रहथि ! ओही बर्ष जखन हमर छोट बालकक जन्म भेलन्हिं, पटेल नगर स्थित हमर सासुरमे हुनक नामकरणक पूजा पंडिते जी करौने रहथि- हिनक ई उपकार हम कहियो नहिं बिसरलियन्हिं !
दिनानुदिन पंडित जीसँ अपेक्षा बढ़ैत गेल ! हुनक सभ परिवारक सदस्य सँ घनिष्ठता रहल ! 1988-89 मे पश्चिमी पटेलनगर, पटना स्थित अपन निजी आवास मे हम जहिया से आवासित भेलहुँ - पंडित जी पटेलनगर मोहल्ला मे रहथि ! कतेको साहित्यिक मंच पर देखने - सुनने छियन्हिं !
बर्ष 1998 मे जखन पंडित जीक अमृत महोत्सव आ अभिनन्दन समारोह विद्यापति भवन मे आयोजित भेलन्हिं - ओहि समारोहक मुख्य अतिथि प्रकांड विद्वान पंडित अनन्त लाल ठाकुरक स्नेह आ उदारता कही जे ओ अपन निकट संबंधीक अनुरोध के नहिं मानि अपन प्रिय शिष्य आ हमर छोटका ओझा डाक्टर किशोर नाथ झा कें कहलखीन्ह जे ‘चि. कुमार’ ( घरक हमर नाम )क ओहिठाम रहब ! एतय ई कहब आवश्यक जे पंडित अनन्त लाल ठाकुरक श्वसुर श्रद्धेय गोपाल बाबू ( दरभंगाक डॉक्टर गोपाल भट्टाचार्य ) हमर पिताक पुरान मित्र रहलखिन्ह आ ओहि प्रगाढ़ अनुबंधक कारणेँ हमर बहनोई किशोर बाबूक प्रिय गुरू जी सेहो सदैव हमर बहनोईतुल्य रहलाह ! ओझा, छोटकी बहीन आ गुरू जीक कृपासँ जे दू-तीन दिन ओ हमरा ओहिठाम रहल हेताह -हमर आवासीय परिसर गुरूकुल सदृश पवित्र बनल रहल - पंडित जीक ओछाओन- विछावन सेहो गुरू जीक कमरामे लगा देलिअन्हिं - दुनू प्रकांड विद्वानकें एक संगे देखि मोन बड्ड प्रसन्न रहल करे !छोटका ओझा आ छोटकी बहीन गुरूसेवा मे सदैव तत्पर रहथि ! ��ुरू जीकें पटना स्टेशन पर रिसीभ करबासँ ल’के आयोजन समारोह मे हुनका ल’ गेनाइ - अननाइ आ ‘सी ऑफ’ करबाक पूरा दायित्व छोटका ओझा पंडित किशोर नाथ झा पर रहन्हिं - हम मात्र हुनक सहायकक भूमिका मे रहलहुँ ! पंडित अनन्त लाल ठाकुर कें कलकत्ता से पटना तक स्लीपर क्लास मे अनबाक भार श्री नवीन चौधरी जी निर्वाह कयलन्हिं! वापसी मे मुख्य अतिथि गुरू जीकें लालकिला एक्सप्रेसक स्लीपर क्लास मे रिजर्वेशन रहन्हि- जखन छोटका ओझा संग हुनका विदा करबाक हेतु पटना जंक्शन लगभग नौ बजे रात्रि पहुँचलौंह , तँ गाड़ी अनिश्चित क़ालीन लेट होइत गेलै आ चारि-पॉंच बजे भोर में जखन गाड़ी एलै आ विदा भेलै, तावत धरि गुरू जी जतेक धैर्य पूर्वक अपार कष्ट सहैत आ रात्रि जागरण करैत रहलाक बादो एतेक शान्त - प्रसन्नचित्त रहि हमरा आ छोटका ओझा कें बीच-बीच मे कहैत रहि गेलाह जे अहाँ दुनू गोटा हमरा लेल जगरना जुनि करू आ डेरा घुरि जाउ - हुनका एकसर छोड़ि हम सब कोना आबि सकैत रही ! ट्रेन खुजबा काल हुनक आशीष दैत दुनू हाथ आ दीप्त चेहरा जीवनकाल धरि नहिं बिसरि सकैत छी !
एतेक विस्तार सँ 1998 मे आइ से 23 बर्ष पूर्व सुसम्पन्न भेल पंडित गोविन्द झा जीक अमृत महोत्सव एवं अभिनंदन ग्रंथक ‘अर्चा आ चर्चा ‘ क संगहि ओहि समारोहक मुख्य अतिथि पंडित अनन्त लाल ठाकुर कें अपन प्रिय ‘श्री गोविन्द जी’क प्रति अपार स्नेह आ उदारताक वर्णन करबाक पाछू हमर दू टा उद्देश्य अछि ! पहिल ई जे पंडित जीक शतबार्षिकी समारोहक सुअवसर पर हुनका पंडित अनन्त लाल ठाकुरक अमर आत्माक अशेष आशीर्वाद भेटैत रहैन्ह ….आ दोसर ई जे …. सरकारी तिथिक हिसाबें पंडित जीक शतबार्षिकी समारोह 10 अक्टूबर 2023 तक जारी रहन्हि ! संगहि…बैशाख कृष्ण अष्टमी 1922 तिथिक अनुसारें …पंडित जी क शताब्दी बर्षक शुरूआत भ’ गेलैक अछि जे बर्ष 2022 तक जारी रहन्हिं ! एहि तरहेँ चलैत रहला’ सँ हमरो कोनो ने क��नो सेशन एटेन्ड करबाक सुअवसर प्राप्त होइत रहत आ हमहूँ अपन कमिटमेन्ट पूरा करबामे समर्थ भ’ सकब !
एखन हम बर्ष 1998 तक मात्र अइ पहिल खेप मे , पंडित जीक प्रति अपन उद्गार व्यक्त कयलहुँ अछि - ई धारावाहिक सेहो जारी रहतैक जे समय - समय पर प्रगट करैत रहब !
श्री 108 भगवतीक कृपासँ पटना मे पंडित जी’क आवास हमर डेरासँ पाँच-सात मिनट पर जहिया सँ एलन्हिं - ओकर बादक ‘अर्चा आ चर्चा ‘ विस्तार सँ कहब बाकी अछि - तावत धरि हमरो पंडित जीक समस्त रचना पढ़ि कालिदास सदृश विद्वान हेबाक समय भेट जायत आ पंडित जी सेहो बीस टा आओर मौलिक रचना गढ़बामे लागल रहताह ! हुनका स्वस्थ प्रसन्न रहि ‘कुर्व��्नेह योग’ मे देखैत रहलाह सँ हमरो लोकनिक उत्साह बनल रहैत अछि - तैं , पंडित जी - अपने अहिना शब्द सागर में लैपटॉप पर लिखैत पढ़ैत रही - से करबद्ध निवेदन आ प्रार्थना करैत गोड़ लगै’ छी - सात अक्टूबर 2021 कें जहिया अहाँ पटना सँ इसहपुर हेतु प्रस्थान करब - हम अहाँ सँ आशीर्वाद लेबाक हेतु पुनः आयब ! अइ संस्मरण मे जे कोनो त्रुटि रहि गेल हो - ओहि लेल क्षमा क’ देब जेना करैत रहलहुँ अछि - आ सुधारि सेहो देब ! गामक यात्रा शुभ हो - जय गणेश मंगल गणेश 🙏🏽
( नागेश चन्द्र मिश्र, पटना , 30 सितम्बर, 2021 )
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